रैंकिंग की दौड़ से ज्यादा योजनाओं के समय पर क्रियान्वयन पर जोर, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
पांच घंटे की समीक्षा बैठक में दिया स्पष्ट संदेश – प्रतिस्पर्धा नहीं, समय पर परिणाम चाहिए
‘काम कर देंगे’ नहीं,‘काम हो गया है’ सुनना चाहती हैं कलेक्टर
-रवि सिंह-
कोरिया,04 जून 2026 (घटती-घटना)। सरकारी बैठकों में अक्सर लक्ष्य,उपलब्धि,रैंकिंग और राज्य स्तर पर प्रथम आने की चर्चा होती है,लेकिन कोरिया जिले में आयोजित पांच घंटे लंबी समीक्षा बैठक में जो बात निकलकर सामने आई,वह सामान्य प्रशासनिक सोच से बिल्कुल अलग थी,जिला पंचायत के मंथन सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने अधिकारियों को जो संदेश दिया, यदि उसे गंभीरता से लागू कर लिया गया तो कोरिया जिले की प्रशासनिक कार्यशैली में बड़ा बदलाव दिखाई दे सकता है,बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका उद्देश्य जिले को किसी भी कीमत पर प्रथम स्थान पर पहुंचाना नहीं है,उन्होंने अधिकारियों को समझाते हुए कहा कि प्रशासन का असली उद्देश्य रैंकिंग की दौड़ नहीं, बल्कि शासन की योजनाओं को समय पर जनता तक पहुंचाना होना चाहिए, कलेक्टर का यह दृष्टिकोण इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अधिकांश सरकारी तंत्र में आंकड़ों और रैंकिंग की प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ जाती है कि कई बार वास्तविक काम पीछे छूट जाता है,लेकिन कोरिया कलेक्टर ने साफ संकेत दिया कि उन्हें नंबरों की बाजीगरी नहीं बल्कि परिणाम चाहिए।
बता दे की जिला पंचायत के मंथन सभाकक्ष में आयोजित पांच घंटे लंबी समीक्षा बैठक केवल विभागीय आंकड़ों की समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह बैठक कोरिया जिले की प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को लेकर एक स्पष्ट और सख्त संदेश देने वाली साबित हुई,पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ग्रामीण यांत्रिकी, समाज कल्याण और जिला योजना एवं सांख्यिकी विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में बता दिया कि अब केवल आश्वासन और प्रस्तुतिकरण का दौर नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाई देने चाहिए, बैठक में कलेक्टर का सबसे चर्चित वाक्य रहा—‘काम कर देंगे,हो जाएगा,प्रयास कर रहे हैं’ नहीं सुनना है,बल्कि ‘काम हो रहा है और काम हो गया है’ सुनना है, प्रशासनिक हलकों में इसे केवल एक टिप्पणी नहीं बल्कि कार्यशैली बदलने का संकेत माना जा रहा है।
प्रथम आने की होड़ नहीं,ग्रीन जोन में रहना है…
बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार कलेक्टर ने अधिकारियों को एक बेहद महत्वपूर्ण बात समझाई,उन्होंने कहा कि जिले को हर हाल में प्रथम स्थान पर पहुंचाने की मानसिकता से ज्यादा जरूरी है कि शासन की योजनाएं समय पर पूरी हों और जनता तक उनका लाभ पहुंचे,उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य केवल रैंकिंग की दौड़ में शामिल होना नहीं होना चाहिए,यदि योजनाएं समय पर पूरी होंगी,शिकायतें कम होंगी और लाभार्थियों तक सुविधाएं पहुंचेंगी तो जिले की स्थिति स्वतः बेहतर होगी, कलेक्टर का यह दृष्टिकोण इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कई बार आंकड़ों में बेहतर दिखने की होड़ में वास्तविक काम पीछे छूट जाता है, लेकिन इस बैठक में फोकस केवल एक बात पर था— समय पर और गुणवत्तापूर्ण कार्य।
काम के लिए खून मत जलाइए, लेकिन काम समय पर होना चाहिए…
सूत्रों के अनुसार बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों को यह भी समझाया कि काम करने का मतलब अनावश्यक तनाव लेना नहीं है, उन्होंने कहा कि अधिकारी अपनी सुविधा और व्यवस्था के अनुसार समय का प्रबंधन कर सकते हैं,लेकिन यह सुनिश्चित होना चाहिए कि शासन की योजनाएं निर्धारित समय पर पूरी हों, यह संदेश उन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो अक्सर संसाधनों और दबावों का हवाला देकर कामों में देरी को सामान्य मान लेते हैं,कलेक्टर का स्पष्ट संकेत था कि बहाने नहीं,परिणाम देखे जाएंगे।
लापरवाही पर सीधी चेतावनी
बैठक के दौरान कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जाएगा,उन्होंने कहा कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी यह न समझे कि लापरवाही के बाद भी वह बच जाएगा,शासन ने जिस जिम्मेदारी के लिए किसी को पद पर नियुक्त किया है, उसका निर्वहन पूरी गंभीरता से करना होगा,सूत्रों के अनुसार कलेक्टर ने कहा कि यदि शिकायतें आएंगी तो कार्रवाई भी होगी और कार्रवाई उनके अपने तरीके से होगी,यह टिप्पणी बैठक में मौजूद अधिकारियों के लिए स्पष्ट चेतावनी मानी जा रही है।
फील्ड में जाएं,फाइलों से बाहर निकलें…
कलेक्टर ने अधिकारियों को कार्यालयों तक सीमित रहने की प्रवृत्ति छोड़ने की सलाह दी, उन्होंने कहा कि शासन वेतन केवल बैठकों में बैठने और फाइलें आगे बढ़ाने के लिए नहीं देता, अधिकारी गांवों में जाएं, निर्माण कार्यों का निरीक्षण करें, गुणवत्ता जांचें और सुनिश्चित करें कि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचे, उन्होंने स्पष्ट किया कि कागजों में प्रगति और जमीन पर दिखाई देने वाली प्रगति में अंतर होता है।
मनरेगा कार्यों की खुद करेंगी जांच…
मनरेगा की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में 54,030 परिवार और 91,545 श्रमिक पंजीकृत हैं, इनमें 49,313 परिवार और 79,759 श्रमिक सक्रिय हैं, आजीविका डबरी निर्माण के 123 स्वीकृत कार्यों में से केवल 53 पूर्ण हुए हैं जबकि 20 कार्य शुरू तक नहीं हो सके हैं, इस स्थिति पर कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण वे स्वयं करेंगी और मौके पर जाकर गुणवत्ता एवं प्रगति की जांच करेंगी।
बहानेबाजी छोडि़ए…जिम्मेदारी निभाइए…
बैठक में कलेक्टर ने एक और महत्वपूर्ण बात कही,उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि काम न होने के कारण खोजने की बजाय काम पूरा करने के उपाय खोजे जाएं,अक्सर समीक्षा बैठकों में यह सुनने को मिलता है कि संसाधन नहीं मिले, कर्मचारी कम हैं,तकनीकी समस्या है या प्रक्रिया लंबित है,लेकिन इस बैठक में कलेक्टर का जोर इस बात पर था कि समस्या चाहे जो भी हो,उसका समाधान निकालना प्रशासन की जिम्मेदारी है,कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि गोलमोल जवाब और अधूरी जानकारी से वास्तविक स्थिति नहीं बदली जा सकती,उन्होंने अधिकारियों से कहा कि समस्याओं के कारण गिनाने की बजाय उनके समाधान पर काम किया जाए,शासन और प्रशासन जनता की समस्याएं दूर करने के लिए हैं,उन्हें बढ़ाने के लिए नहीं।
प्रधानमंत्री आवास योजना में धीमी प्रगति पर नाराजगी
प्रधानमंत्री जनमन योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की समीक्षा के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए, पीएम जनमन योजना के तहत स्वीकृत 75 आवासों में से 53 पूर्ण हुए हैं जबकि 21 अब भी अधूरे हैं, वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) 2024-26 के तहत स्वीकृत 16,363 आवासों में से 10,243 आवास पूर्ण हुए हैं,जब शेष आवासों की स्थिति पूछी गई तो कई अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके,इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई और निर्देश दिए कि जिन हितग्राहियों ने राशि प्राप्त करने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा नहीं किया है, उनके खिलाफ वसूली और नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
शौचालय निर्माण की सुस्ती पर फटकार
व्यक्तिगत और सामुदायिक शौचालय निर्माण की समीक्षा के दौरान प्रगति बेहद धीमी पाई गई,सामुदायिक शौचालयों की स्थिति विशेष रूप से निराशाजनक रही,कलेक्टर ने सवाल उठाया कि 15 से 20 दिनों में पूरे होने वाले कार्य महीनों तक लंबित क्यों हैं,उन्होंने चेतावनी दी कि समयसीमा में कार्य पूर्ण नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
एक महीने बाद फिर होगी समीक्षा
बैठक के अंत में कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अगली समीक्षा बैठक में केवल प्रस्तुतिकरण नहीं बल्कि वास्तविक प्रगति दिखाई देनी चाहिए,उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी पूरी तैयारी के साथ बैठकों में आएं और अपने विभाग की वास्तविक स्थिति से अवगत रहें।
क्या बदल जाएगी कोरिया की प्रशासनिक कार्यसंस्कृति?
पांच घंटे तक चली इस बैठक से जो संदेश निकलकर सामने आया,वह केवल आंकड़ों की समीक्षा नहीं बल्कि प्रशासनिक सोच में बदलाव का संकेत है,कलेक्टर का जोर बार-बार एक ही बात पर रहा— प्रतिस्पर्धा नहीं, काम, बहाने नहीं,परिणाम। आश्वासन नहीं,उपलब्धि,यदि अधिकारी और कर्मचारी इस संदेश को गंभीरता से लेते हैं और अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करते हैं,तो आने वाले समय में कोरिया जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, फिलहाल बैठक के बाद जिले में सबसे ज्यादा चर्चा कलेक्टर की इसी बात की हो रही है—हमें प्रथम नहीं बनना है,लेकिन अंतिम भी नहीं रहना है। हमें केवल यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाएं समय पर जनता तक पहुंचें और काम समय पर पूरा हो, यही सोच यदि धरातल पर उतर गई तो संभव है कि कोरिया जिले की प्रशासनिक तस्वीर भी बदलती नजर आए।
डिस्क्लेमर
इस समाचार में प्रकाशित तथ्य जिला जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति,समीक्षा बैठक में उपलब्ध कराई गई जानकारी तथा बैठक से जुड़े विभिन्न सूत्रों से प्राप्त जानकारियों पर आधारित हैं,बैठक के दौरान हुई कुछ महत्वपूर्ण चर्चाएं और प्रशासनिक दृष्टिकोण से जुड़ी बातें आधिकारिक विज्ञप्ति का हिस्सा नहीं थीं,लेकिन वे सूत्रों के माध्यम से सामने आईं,चूंकि उन चर्चाओं का संबंध जिले की प्रशासनिक कार्यप्रणाली,जवाबदेही और जनहित से जुड़ा हुआ था,इसलिए उन्हें समाचार के विश्लेषणात्मक पक्ष के रूप में शामिल किया गया है,समाचार का उद्देश्य किसी व्यक्ति या विभाग की छवि प्रभावित करना नहीं, बल्कि प्रशासनिक सोच, कार्यसंस्कृति और सार्वजनिक महत्व के विषयों को पाठकों तक पहुंचाना है।
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