

- एनीकेट खुला,टंकियां सूखी—सूरजपुर में जल संकट चरम पर,मछली के चक्कर में शहर प्यासा, सूरजपुर में पेयजल संकट गहराया
- गर्मी में डबल मार : लापरवाही और बदहाल व्यवस्था से सूखा सूरजपुर
- पानी बहा,व्यवस्था बहकी—सूरजपुर में टैंकरों के भरोसे जिंदगी
- एनीकेट से निकला पानी,सिस्टम की पोल खुली—शहर में हाहाकार
- जर्जर मोटर,ठेकेदारी टैंकर और खुला एनीकेट—प्यासा सूरजपुर
- करोड़ों के फंड पर सवाल, शहर में पानी का संकट बेकाबू
- जिम्मेदार मौन, जनता परेशान—सूरजपुर में पेयजल संकट गहराया
-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,22 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। भीषण गर्मी के बीच सूरजपुर शहर इस समय गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है,एक ओर जहां नयनपुर एनीकेट का गेट मछुआरों द्वारा खोल दिए जाने से नगर पालिका की जल आपूर्ति व्यवस्था अचानक चरमरा गई,वहीं दूसरी ओर पहले से ही जर्जर सिस्टम, अनियमित सप्लाई और प्रशासनिक उदासीनता ने हालात को और अधिक गंभीर बना दिया है, स्थिति यह है कि शहर के कई वार्डों में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है और लोग बुनियादी जरूरत के लिए भी भटकने को मजबूर हैं।
एनीकेट का गेट खुला,टंकियां हुईं खाली– जानकारी के अनुसार नयनपुर एनीकेट में नगर पालिका द्वारा जल आपूर्ति के लिए पानी संग्रहित किया गया था, लेकिन मछुआरों ने मछली पकड़ने के उद्देश्य से एनीकेट का गेट खोल दिया,जिससे भारी मात्रा में पानी बह गया। इसका सीधा असर नगर पालिका की टंकियों पर पड़ा और देखते ही देखते जल भंडारण खाली हो गया,इस घटना के बाद शहर के विभिन्न वार्डों में नलों ने जवाब दे दिया,जहां रोजाना पानी आता था,वहां अचानक सप्लाई बंद हो गई और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पहले से ही चरमराई व्यवस्था,संकट हुआ और गहरा-एनीकेट की इस घटना ने उस सच्चाई को उजागर कर दिया,जो लंबे समय से दबे स्वर में सामने आ रही थी,शहर में पहले से ही पानी की आपूर्ति अनियमित थी,कई वार्डों में दो-दो दिन तक पानी नहीं पहुंच रहा था,जबकि कहीं बिना सूचना के सप्लाई बंद कर दी जाती थी,वार्डवासियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों से शिकायत की,लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया,अब एनीकेट की घटना ने इस समस्या को विकराल रूप दे दिया है।
टैंकरों के भरोसे शहर,लेकिन व्यवस्था नाकाफी- जल संकट के बाद नगर पालिका ने टैंकरों के माध्यम से पानी सप्लाई शुरू की है, लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह पर्याप्त नहीं है, कई वार्डों में टैंकर समय पर नहीं पहुंच रहे, तो कहीं पानी की मात्रा जरूरत से कम है,लोगों को घंटों लाइन में लगकर पानी भरना पड़ रहा है, महिलाओं,बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक कठिनाई झेलनी पड़ रही है। कई परिवारों को मजबूरी में पानी खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं।
जर्जर मोटर और ठेकेदारी व्यवस्था पर उठे सवाल- नगर पालिका से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक जल आपूर्ति की पूरी व्यवस्था पुराने और जर्जर मोटरों के सहारे चल रही है, ये मोटर बार-बार खराब हो जाती हैं,जिससे सप्लाई बाधित होती रहती है,इसके अलावा नगर में यह चर्चा भी है कि नगरपालिका के अधिकांश टैंकर ठेकेदारी में हैं,कई टैंकर संधारण के अभाव में खड़े-खड़े जर्जर हो रहे हैं, जबकि उनके रखरखाव के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं,ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब संसाधन मौजूद हैं, तो उनका सही उपयोग क्यों नहीं हो पा रहा।
जिम्मेदारी को लेकर उठे तीखे सवाल-इस पूरे मामले ने जिम्मेदारों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्या एनीकेट जैसे महत्वपूर्ण जल स्रोत की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जानी चाहिए थी? क्या मछुआरों द्वारा गेट खोलना प्रशासनिक विफलता नहीं है? नगर के विकास के लिए मिलने वाले करोड़ों रुपये आखिर खर्च कहां हो रहे हैं? क्या जनता के चुने हुए प्रतिनिधि इस संकट पर जवाबदेही तय करेंगे? शहर में इन सवालों को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है और लोग जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पुलिस अधीक्षक की पहल को मिली सराहना-जहां एक ओर नगर पालिका की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं, वहीं जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर की पहल की शहरभर में सराहना हो रही है, पेयजल संकट को देखते हुए उन्होंने अपने विभाग का टैंकर नगर पालिका को उपलब्ध कराया, जिससे कुछ हद तक लोगों को राहत मिली। नागरिकों ने इस कदम को मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण बताया है।
अधिकारियों ने दिया आश्वासन- मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रभाकर शुक्ला ने बताया कि नयनपुर एनीकेट का पानी मछुआरों द्वारा छोड़ दिए जाने के कारण यह स्थिति बनी है,उन्होंने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत टैंकरों से पानी सप्लाई की जा रही है और जल्द ही स्थिति सामान्य कर दी जाएगी,नगरपालिका अध्यक्ष कुसुमलता राजवाड़े ने भी कहा कि जल आपूर्ति बहाल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और अगले दिन से नियमित सप्लाई शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।
बढ़ती गर्मी में संकट बना गंभीर चुनौती-गौरतलब है कि इस समय क्षेत्र में तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे पानी की मांग भी बढ़ गई है,ऐसे में जल प्रबंधन की जरा सी चूक भी बड़े संकट का रूप ले सकती है, सूरजपुर में हुई यह घटना इसी का उदाहरण है, जहां एक ओर लापरवाही और दूसरी ओर कमजोर व्यवस्था ने मिलकर पूरे शहर को संकट में डाल दिया।
सबक और समाधान की जरूरत- सूरजपुर का यह जल संकट केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है,यह बताता है कि बुनियादी सुविधाओं के प्रबंधन में लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है, अब जरूरत है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदारों की पहचान कर कार्रवाई की जाए और जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए, साथ ही एनीकेट जैसे जल स्रोतों की सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
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