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सूरजपुर@ कुमेली जंगल में जुए का कथित साम्राज्य, “न बंद हुआ,न बंद होगा” के दावे से मचा हड़कंप

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  • सूरजपुर में जुए का नेटवर्क बेखौफ:खबरों के बाद भी जारी खेल,सिस्टम पर उठे सवाल
  • जंगल में ‘जुआ दरबार’: 4 घंटे का खेल,लाखों के दांव और कार्रवाई पर सवाल
  • खबर छापते रहो, जुआ चलता रहेगा” — कुमेली में कथित जुआ नेटवर्क की खुली चुनौती
  • कानून को चुनौती या सिस्टम की नाकामी?कुमेली में जुए के कथित नेटवर्क से उठे बड़े सवाल
  • जंगल में संगठित जुआ नेटवर्क की चचार्:तय समय,तय सिस्टम और कथित संरक्षण का खेल
  • कथित संरक्षण और सिस्टम की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

-शमरोज खान-
सूरजपुर,05 अप्रैल 2026(घटती-घटना)।
जिले में अवैध जुए के कथित नेटवर्क को लेकर हालात अब सामान्य चर्चा से आगे बढ़कर खुली चुनौती के रूप में सामने आ रहे हैं,कुमेली पर्यटन स्थल और आसपास के जंगल क्षेत्रों में जुआ संचालन को लेकर स्थानीय स्तर पर यह तक कहा जा रहा है कि पत्रकार खबर छापते रहें,जुआ न बंद हुआ है और न बंद होगा।
सूत्रों के अनुसार यह बयान कथित तौर पर जुआ संचालित करने वाले लोगों द्वारा दिया जा रहा है, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही जानकारियों ने पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार पहले जुए के कई ठिकाने शहर के आसपास सक्रिय थे,जहां समय-समय पर पुलिस कार्रवाई भी होती थी और मामले सुर्खियों में आते थे,लेकिन जैसे-जैसे निगरानी बढ़ी,वैसे-वैसे जुआ संचालित करने वालों ने अपनी रणनीति बदल ली,अब कथित तौर पर जुए का यह नेटवर्क शहर से दूर जंगलों और सीमावर्ती इलाकों में शिफ्ट हो गया है, कुमेली पर्यटन स्थल के आसपास और सूरजपुर-कोरिया सीमा के पास स्थित माजा क्षेत्र को इसका नया केंद्र बताया जा रहा है,ग्रामीणों का कहना है कि जंगल का चयन इसलिए किया गया है ताकि आवाजाही कम रहे, बाहरी लोगों की नजर न पड़े और किसी भी कार्रवाई की स्थिति में बच निकलना आसान हो,कुछ लोग इसे व्यंग्य में जंगल मॉडल कह रहे हैं।
तय समय में चलता है खेल : 4 घंटे का ‘जुआ शिफ्ट सिस्टम’
सूत्रों के मुताबिक जुए का यह कथित संचालन पूरी तरह समयबद्ध तरीके से किया जा रहा है, शाम लगभग 4 बजे से शुरुआत,रात 8 बजे तक समापन, इन चार घंटों के भीतर लाखों रुपये के दांव लगने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय लोग इसे जुआ शिफ्ट सिस्टम की संज्ञा दे रहे हैं,जहां समय, स्थान और संचालन सभी पहले से तय रहते हैं।
बुक सिस्टम’ से चलता है पूरा नेटवर्क
बताया जा रहा है कि यह केवल मौके पर बैठकर ताश खेलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक व्यवस्थित आर्थिक तंत्र भी सक्रिय है, बुक के माध्यम से दांव दर्ज किए जाते हैं, दूर बैठे लोग भी इसमें शामिल होते हैं,हार-जीत का पूरा हिसाब व्यवस्थित रूप से रखा जाता है,इससे यह संकेत मिलता है कि जुए का यह कथित नेटवर्क एक संगठित संरचना के रूप में काम कर रहा है, हालांकि इन बातों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ नामों की चर्चा : जिम्मेदारियों का बंटवारा
स्थानीय स्तर पर इस कथित नेटवर्क से जुड़े कुछ नाम बार-बार चर्चा में आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कुमेली क्षेत्र में संचालन की जिम्मेदारी कथित रूप से शमशेर के पास बताई जा रही है,माजा क्षेत्र में एस कुमार अपनी टीम के साथ सक्रिय बताए जा रहे हैं, इसके अलावा बबलू,विवेक,राजकुमार और संजू जैसे नाम भी चर्चा में हैं,हालांकि इन सभी नामों और आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही चर्चाओं ने मामले को गंभीर बना दिया है।
जुआ बंद नहीं होगा…खुलेआम दावे से बढ़ी चिंता
स्थानीय लोगों का दावा है कि जुआ संचालित करने वाले कुछ लोग खुलेआम यह कहते सुने जा रहे हैं— पत्रकारों को जितना खबर छापना है छाप लें,जुआ न बंद हुआ है और न बंद होगा। यह भी कहा जा रहा है कि जब भी खबरें प्रकाशित होती हैं,तो कुछ दिनों के लिए गतिविधियां धीमी हो जाती हैं, लेकिन 5-6 दिन बाद फिर वही सिलसिला शुरू हो जाता है, यदि ये दावे सही हैं,तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही है।
पुलिस और साइबर शाखा की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप स्थानीय पुलिस थाना और साइबर शाखा को लेकर लगाए जा रहे हैं, कुछ लोगों का दावा है कि जब तक संबंधित टीम में कुछ अधिकारी मौजूद हैं,तब तक यह गतिविधियां जारी रहेंगी। यहां तक कि यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि पूरा नेटवर्क कथित संरक्षण में संचालित हो रहा है,हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने पुलिस व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कथित लेन-देन और बंटवारे की चर्चा
सूत्रों के अनुसार इस कथित जुए के नेटवर्क में रोजाना बड़े पैमाने पर आर्थिक लेन-देन होता है, कुछ चर्चाओं में यह भी सामने आ रहा है कि इस रकम का एक हिस्सा अलग-अलग स्तरों पर बांटा जाता है,हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इस तरह की बातें सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है।
प्रशासनिक चुप्पी बनी बड़ा सवाल
लगातार सामने आ रही चर्चाओं और आरोपों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई स्पष्ट और ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इतने बड़े स्तर पर गतिविधियां चल रही हैं और कार्रवाई नहीं हो रही,तो यह स्थिति चिंताजनक है और इससे गलत संदेश जाता है।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
क्षेत्र के नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है, उनका कहना है कि जुए के इस कथित नेटवर्क की गहराई से जांच हो,यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाए,किसी भी स्तर पर संरक्षण देने वालों को बख्शा न जाए।
क्या रुकेगा ‘जंगल का जुआ नेटवर्क’?
सूरजपुर जिले में जुए के इस कथित नेटवर्क ने केवल कानून व्यवस्था ही नहीं,बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है,अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या यह नेटवर्क वास्तव में खत्म होगा, या फिर न बंद हुआ है,न बंद होगा जैसे दावे ही हकीकत बनते रहेंगे? फिलहाल, पूरे जिले की निगाहें प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


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