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रायपुर@छत्तीसगढ़ में अब धर्मांतरण कराने पर उम्रकैद…

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विधानसभा में धर्म स्वतंत्रता बिल पास,25 लाख जुर्माना लगेगा,मददगारों को भी होगी जेल

रायपुर,19 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंर्त्य विधेयक, 2026 पास हो गया है। अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने के मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। यदि पीडि़त नाबालिग,महिला,अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से हो,तो सजा बढ़ाकर 10 से 20 साल तक की जेल और न्यूनतम 10 लाख जुर्माना देना होगा। वहीं,सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास होगी। कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माना लगेगा। गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा पेश किया गया यह नया विधेयक वर्ष 1968 के पुराने कानून की जगह लेगा,जिसे सरकार ने वर्तमान तकनीक और सामाजिक परिस्थितियों के लिहाज से नाकाफी माना है। सरकार के अनुसार इस बिल का मकसद बल,प्रलोभन,धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। सदन में बिल के पास होते ही बीजेपी विधायकों ने जय श्री राम के नारे लगाए। वहीं विपक्ष ने इस बिल का विरोध किया और वॉकआउट कर दिया था। विपक्ष का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के साथ-साथ सभी दलों के विधायकों की राय ली जानी चाहिए। सदन में यह बिल ध्वनि मत से पास हुआ।
संविधान के तहत राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार : वहीं, भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार के समय भी ऐसा कानून लागू किया गया था, इसलिए इसे गलत बताना ठीक नहीं है। उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है,जिससे राज्य इस तरह का कानून नहीं बना सकते। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत कानून बनाने का अधिकार राज्य सरकार को है और यह बिल पूरी तैयारी और चर्चा के बाद लाया गया है। सदन की कार्यवाही चला रहे धर्मलाल कौशिक ने कांग्रेस की आपत्तियों को खारिज कर दिया और बिल पेश करने की अनुमति दे दी।
विजय शर्मा बोले…भाग रहा विपक्ष
इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया और पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। इस पर विजय शर्मा ने कहा कि यह वॉकआउट नहीं बल्कि भागना है। यह बिल पिछले हफ्ते ही राज्य कैबिनेट से मंजूर हुआ था। सरकार का कहना है कि इसमें 1968 के कानून को और मजबूत किया गया है और धर्मांतरण के नए तरीकों, जैसे डिजिटल और आर्थिक प्रलोभन, को भी शामिल किया गया है। फिलहाल राज्य में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968’ लागू है, जिसे राज्य बनने के बाद मध्य प्रदेश से अपनाया गया था।
नेता प्रतिपक्ष बोले…
त्योहार के दिन छुट्टी नहीं

सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद सभापति धरमलाल कौशिक, डिप्टी सीएम अरुण साव और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने चैत्र नवरात्रि,गुड़ी पड़वा और हिन्दू नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।
चरणदास महंत-लोकसभा में सत्र चल रहा था, लेकिन आज वहां अवकाश दिया गया। हम हिन्दू राष्ट्र की कल्पना कर रहे हैं, शायद इसी सोच के तहत वहां छुट्टी दी गई। हम यहां ऐसा नहीं कर पाए,इसका मुझे दुख है।
विपक्ष ने किया धर्म स्वतंत्रता बिल का विरोध
धर्म स्वतंत्रता बिल पेश होते ही नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कानून देश के कई राज्यों में पहले से हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है, इसलिए इस बिल को जल्दबाजी में पास नहीं किया जाना चाहिए। महंत ने मांग की कि बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए, ताकि इस पर विस्तार से चर्चा हो सके। उन्होंने कहा कि इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के साथ-साथ सभी दलों के विधायकों की राय ली जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कोई फैसला नहीं होना चाहिए, जिससे समाज में विभाजन बढ़े। महंत ने संविधान और सहिष्णुता का हवाला देते हुए नेताओं और समाज सुधारकों के विचारों का जिक्र किया।
आयुष्मान कार्ड की प्रोत्साहन राशि में अनियमितता का मामला
– कांग्रेस एमएलए कुंवर सिंह निषाद – जवाब में कहा गया है कि किसी तरह की अनियमितता नहीं पाई गई,लेकिन वहां के कम्प्यूटर ऑपरेटरों ने आवेदन देकर खुद स्वीकार किया है कि डॉक्टरों के दबाव में उनके खातों में आयुष्मान की प्रोत्साहन राशि डाली गई। उस समय तत्कालीन अधिकारी डॉ. सोनी थे,क्या उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
– स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल – सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अर्जुन्दा की शिकायत स्वयं विधायक द्वारा दर्ज कराई गई थी। इस पर विभाग ने तीन सदस्यीय समिति बनाकर जांच कराई। जांच के बाद मामला निरस्त कर दिया गया और किसी भी प्रकार की आर्थिक अनियमितता नहीं पाई गई। किसी डॉक्टर द्वारा जानबूझकर ऐसा नहीं कराया गया।
– कुंवर सिंह निषाद – वहां का पूरा स्टाफ थाने गया था और शिकायत की थी कि उनके आईडी-पासवर्ड का उपयोग कर डॉक्टर के खाते में पैसे डाले गए। ट्रांजेक्शन भी हो गया था। एफआईआर के बाद पैसा जिले में आया और फिर शिकायत के बाद उसे होल्ड कर दिया गया। कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा है कि डॉक्टर बोरकर के कहने पर यह किया गया।
– श्याम बिहारी जायसवाल – यह गलत एंट्री का मामला था,भुगतान नहीं हुआ था। यह इतना बड़ा मामला नहीं था कि इस पर एफआईआर दर्ज कराई जाती।
– कुंवर सिंह निषाद – यह आर्थिक अनियमितता का मामला है। मैं पहले की जांच से संतुष्ट नहीं हूं। क्या इस पर फिर से जांच समिति बनाई जाएगी और उसमें मुझे शामिल किया जाएगा।
– श्याम बिहारी जायसवाल – किसी के खाते में पैसा आया ही नहीं। प्रक्रिया जिला स्तर से आगे बढ़ी ही नहीं, वहीं से वापस कर दी गई।
– कांग्रेस एमएलए देवेन्द्र यादव – मंत्री ने खुद कहा कि पैसा जिला स्तर तक ट्रांसफर हुआ। यह आर्थिक अनियमितता का मामला है और इसे योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया। क्या इस पर एफआईआर की जाएगी।
– श्याम बिहारी जायसवाल – नहीं।
– कांग्रेस एमएलए उमेश पटेल – मंत्री कह रहे हैं कि वित्तीय अनियमितता नहीं हुई, लेकिन स्टाफ खुद थाने जाकर एफआईआर कर चुका है। इसमें क्या कार्रवाई हुई, यह बताएं। यह 420 का मामला है।
– श्याम बिहारी जायसवाल – किसी को बचाया नहीं जा रहा है। विभाग की जानकारी में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।


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