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बिलासपुर@कोटवार खुद को जिंदा बताने हाईकोर्ट पहुंचा,न्याय की आस

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बिलासपुर,17 जुलाईं 2026। सरकारी तंत्र की लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिस व्यक्ति के जीवित होने के पर्याप्त सबूत थे और जो खुद अपने हक की लड़ाई लड़ रहा था, उसे सरकारी रिकार्ड में मृत घोषित कर नौकरी से हटा दिया गया था। मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने कमिश्नर के आदेश को निरस्त करते हुए न सिर्फ कर्मचारी को राहत दी, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। जशपुर जिले के मनोरा तहसील स्थित ग्राम गजमा निवासी मरियानुस एक्का ग्राम पंचायत में कोटवार के पद पर कार्यरत थे। इस नियुक्ति को लेकर सुबोध कुमार तिर्की ने अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष चुनौती दी थी। अनुविभागीय अधिकारी ने मामले को खारिज कर दिया, लेकिन मामला सरगुजा कमिश्नर के न्यायालय में अपील के रूप में पहुंचा। 18 जून 2018 को कमिश्नर ने एक ऐसा आदेश पारित किया, जिसने सबको चौंका दिया। कमिश्नर ने याचिका को स्वीकार करते हुए तर्क दिया कि याचिकाकर्ता मरियानुस एक्का अब इस दुनिया में नहीं हैं,लिहाजा उनकी नियुक्ति निरस्त की जाती है।


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