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बैकुंठपुर/कोरिया@ ग्राम रनई के आलोक तिवारी बने ‘डॉ. आलोक तिवारी’ ज्योतिष एवं वास्तु के क्षेत्र में मिला मानद पीएचडी सम्मान

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देश ही नहीं विदेशों में भी बना चुके हैं पहचान,
निःशुल्क ज्योतिष शिक्षा देकर कर रहे ज्ञान का प्रसार
-संवाददाता-
बैकुंठपुर/कोरिया,17 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
कोरिया जिले के ग्राम रनई के लिए गर्व का क्षण तब आया जब गांव के निवासी पं. आलोक तिवारी (मनीष) को ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र के क्षेत्र में उनके विशेष शोध, अनुभव और योगदान के लिए Honorary Doctorate (मानद पीएचडी) की उपाधि से सम्मानित किया गया, इस सम्मान के बाद अब वे ‘डॉ. आलोक तिवारी’ के नाम से जाने जाएंगे, डॉ. आलोक तिवारी ने वर्षों से ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के क्षेत्र में अध्ययन,शोध और परामर्श के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है,उनका ज्योतिषीय ज्ञान केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी उन्हें सम्मान और पहचान मिली है, उनकी इस उपलब्धि से ग्राम रनई सहित पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।
गांव के सरकारी स्कूल से शुरू हुआ सफर…
डॉ. आलोक तिवारी का बचपन ग्राम रनई में ही बीता,उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के शासकीय विद्यालय से प्राप्त की,एक छोटे से गांव से निकलकर अपने ज्ञान, मेहनत और समर्पण के बल पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है।
यूट्यूब के माध्यम से दे रहे निःशुल्क शिक्षा-डॉ. आलोक तिवारी ने बताया कि वे अपने ‘आलोक तिवारी ज्योतिषी’ नामक यूट्यूब चैनल के माध्यम से ज्योतिष शास्त्र की निःशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं,उनका उद्देश्य ज्योतिष के प्राचीन ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है, ताकि इच्छुक विद्यार्थी बिना किसी शुल्क के इस विद्या का अध्ययन कर सकें।
क्षेत्र के लिए प्रेरणा बनी उपलब्धि-एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना और मानद पीएचडी जैसी प्रतिष्ठित उपाधि प्राप्त करना निश्चित रूप से क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है,डॉ. आलोक तिवारी की यह उपलब्धि यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर अध्ययन और समर्पण के बल पर ग्रामीण परिवेश से निकलकर भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है।
बचपन के मित्र ने जताई खुशी…
डॉ. आलोक तिवारी के बचपन के मित्र शशि प्रकाश जायसवाल ने कहा कि वे उन्हें बचपन से जानते हैं और हमेशा देखा है कि आलोक तिवारी जिस कार्य को करने का संकल्प लेते हैं, उसे पूरी लगन और ईमानदारी से पूरा करते हैं, उन्होंने कहा आज उनकी मेहनत और समर्पण का ही परिणाम है कि वे ‘डॉ. आलोक तिवारी’ के नाम से सम्मानित हुए हैं, यह मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से अत्यंत खुशी और गर्व का विषय है कि मेरा बचपन का मित्र आज इस मुकाम पर पहुंचा है।
परिवार ने बताया गौरव का क्षण…
डॉ. आलोक तिवारी के मामा राम सुशील पाण्डेय ने कहा कि यह सम्मान केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं,बल्कि पूरे ग्राम रनई और क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है, उन्होंने कहा,‘मेरा भांजा बचपन से ही परिश्रमी,अनुशासित और दृढ़ संकल्प वाला रहा है। आज उसकी वर्षों की मेहनत रंग लाई है और उसे मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हुई है। हमें उसकी इस उपलब्धि पर गर्व है। ‘


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