
- तालाब बनी सड़क,हर सफर जोखिम भरा…सोनहत-धुम्माडांड मार्ग पर हादसे का इंतजार? सोनहत-धुम्माडांड मार्ग की बदहाली ने खोली विकास की हकीकत…
- बरसात में बह गई सड़क, गड्ढों और कीचड़ में फंसी जिंदगी…
- ’खूनी गड्ढों’ में तब्दील हुआ सोनहत-धुम्माडांड मार्ग,हर दिन हादसे का खतरा
- बरसात में सड़क बनी तालाब,स्कूली बच्चे कीचड़ और गंदे पानी से गुजरने को मजबूर,ग्रामीण बोले…
- मरम्मत नहीं हुई तो होगा आंदोलन…
-राजन पाण्डेय-
बैकुंठपुर/सोनहत,17 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के सोनहत से धुम्माडांड को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली के कारण लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है,बरसात शुरू होते ही सड़क की वास्तविक स्थिति सामने आ गई है, जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से यह तय कर पाना मुश्किल हो गया है कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां, हालात ऐसे हैं कि यह मार्ग अब सड़क कम और तालाब अधिक दिखाई देता है,रोजाना इसी रास्ते से गुजरने वाले ग्रामीण,स्कूली बच्चे,कर्मचारी और वाहन चालक अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं,स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की हालत लंबे समय से खराब है, लेकिन समय रहते मरम्मत नहीं होने के कारण बरसात में स्थिति और भयावह हो गई है। सड़क पर बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटना का खतरा लगातार बढ़ गया है।
गड्ढों ने निगल ली सड़क-सोनहत-धुम्माडांड मार्ग पर कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है,डामर की परत खत्म होने के बाद वहां बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं,जिनमें बारिश का पानी भर चुका है। वाहन चालकों को यह अंदाजा ही नहीं लग पाता कि पानी के नीचे सड़क है या गहरा गड्ढा, ऐसे में हर सफर जोखिम भरा साबित हो रहा है,स्थानीय लोगों के अनुसार कई दोपहिया वाहन चालक गड्ढों में फंसकर गिर चुके हैं,चार पहिया वाहन भी धीरे-धीरे और अत्यंत सावधानी के साथ इस मार्ग से गुजर रहे हैं, बारिश के दौरान सड़क किसी जलाशय जैसी दिखाई देती है,जिससे दुर्घटनाओं की आशंका और बढ़ जाती है।
स्कूली बच्चों के लिए बनी सबसे बड़ी मुसीबत-इस जर्जर सड़क का सबसे अधिक असर स्कूल जाने वाले बच्चों पर पड़ रहा है,प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं इसी मार्ग से स्कूल पहुंचते हैं,साफ-सुथरी यूनिफॉर्म पहनकर निकलने वाले बच्चों को कीचड़ और पानी से भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है,सबसे बड़ी परेशानी तब होती है जब कोई भारी वाहन गड्ढों से होकर गुजरता है, गंदे पानी और कीचड़ के छींटे सीधे बच्चों के कपड़ों और स्कूल बैग पर पड़ते हैं,कई बार बच्चों को रास्ते में रुकना पड़ता है या भीगने और फिसलने का खतरा उठाकर स्कूल पहुंचना पड़ता है।
दलदल में बदल चुकी है सड़क- सड़क के कई हिस्सों में केवल मिट्टी और कीचड़ बची है, लगातार बारिश के कारण यह हिस्सा दलदल में बदल गया है,पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है,बुजुर्ग,महिलाएं और छात्र-छात्राएं सबसे अधिक परेशान हैं, दोपहिया वाहन चालकों को वाहन संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है,ग्रामीणों का कहना है कि कई बार वाहन गड्ढों में फंस जाते हैं और लोगों को धक्का लगाकर उन्हें बाहर निकालना पड़ता है,यह स्थिति केवल असुविधा नहीं बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है।
तस्वीरें खोल रही हैं विकास के दावों की पोल-मार्ग की तस्वीरें खुद बयां कर रही हैं कि सड़क की हालत कितनी खराब है, सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे,पानी से भरे हिस्से और कीचड़ यह बताने के लिए काफी हैं कि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई,ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क की बदहाली से संबंधित विभाग और प्रशासन पूरी तरह परिचित हैं। कई बार शिकायतें भी की गईं,लेकिन केवल आश्वासन मिले,समाधान नहीं।
आखिर कब जागेगा प्रशासन?- स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है,इसी मार्ग से मरीज अस्पताल जाते हैं,किसान अपनी उपज लेकर बाजार पहुंचते हैं और स्कूली बच्चे शिक्षा के लिए प्रतिदिन सफर करते हैं। इसके बावजूद सड़क की मरम्मत को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है,ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो किसी भी दिन गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी…
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही सड़क की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य शुरू नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे,उनका कहना है कि सड़क की मरम्मत कोई विशेष मांग नहीं बल्कि उनका मूल अधिकार है,बरसात के मौसम में सोनहत-धुम्माडांड मार्ग की यह बदहाल स्थिति न केवल विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है,बल्कि यह भी बता रही है कि समय पर रखरखाव नहीं होने से एक महत्वपूर्ण सड़क किस तरह लोगों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बन सकती है,अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस ओर गंभीरता दिखाता है या फिर लोगों को इसी तरह जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ेगा।
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