Breaking News

खड़गवां/चिरमिरी@फिटनेस फेल बस में मासूमों का सफर! SECL में बच्चों की सुरक्षा से खेल कौन खेल रहा है?

Share

  • 2025 से फेल कागज,फिर भी सड़क पर दौड़ रही स्कूल बस! बच्चों की जान पर किसका भरोसा?
  • नियम फेल,सिस्टम पास! एसईसीएल क्षेत्र में बिना फिटनेस बस से बच्चों की रोज़ाना यात्रा
  • फिटनेस फेल बस में भविष्य का सफर! जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल
  • स्कूल बस या चलता खतरा? एसईसीएल क्षेत्र में फेल दस्तावेज वाली बस से बच्चों का सफर
  • 2025 से फिटनेस,टैक्स और पीयुसी फेल बताई जा रही बस से स्कूल आना-जाना,बच्चों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां/चिरमिरी,12 मार्च 2026 (घटती-घटना)। चिरमिरी क्षेत्र में स्थित सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कोयला कंपनी एसईसीएल में कर्मचारियों के बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने के लिए संचालित एक बस को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार बस क्रमांक सीजी 15 ईबी 7244 से प्रतिदिन बच्चों को स्कूल पहुंचाया जा रहा है,जबकि स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि इस बस का फिटनेस,टैक्स और पीयूसी वर्ष 2025 से ही फेल बताया जा रहा है, यदि यह जानकारी सही है तो यह मामला केवल एक वाहन के दस्तावेजों का नहीं,बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े बड़े सवाल खड़े करता है,एसईसीएल जैसे बड़े सार्वजनिक उपक्रम के क्षेत्र में यदि ऐसे वाहन संचालित हो रहे हैं तो यह व्यवस्था और निगरानी तंत्र दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
ठेके की बस,लेकिन जिम्मेदारी किसकी?– बताया जा रहा है कि यह बस एसईसीएल क्षेत्र में कर्मचारियों के बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए ठेके पर संचालित की जा रही है। हर सुबह और दोपहर इसी बस के माध्यम से कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों से बच्चों को स्कूल ले जाया और वापस लाया जाता है, ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि यदि वाहन के जरूरी दस्तावेज लंबे समय से फेल हैं, तो क्या इसकी जानकारी ठेकेदार, वाहन मालिक या एसईसीएल प्रबंधन को नहीं है? या फिर जानकारी होने के बावजूद भी अनदेखी कर बस को सड़कों पर दौड़ने दिया जा रहा है? मुखविरों के अनुसार दस्तावेजों की स्थिति संदिग्ध होने के बावजूद बस का संचालन लगातार जारी है। इससे अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है।
स्कूल बसों के लिए तय हैं सख्त नियम : स्कूल बसों के संचालन को लेकर परिवहन विभाग ने कई सख्त नियम निर्धारित किए हैं, इन नियमों का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, सामान्यतः किसी भी स्कूल बस के लिए निम्न दस्तावेजों का वैध होना अनिवार्य होता है वाहन का वैध फिटनेस सर्टिफिकेट,मोटर वाहन टैक्स का भुगतान,बीमा,पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) प्रमाण पत्र,इसके अलावा स्कूल बसों में कई सुरक्षा मानक भी अनिवार्य किए गए हैं,जैसे बस पर स्पष्ट रूप से स्कूल बस लिखा होना, फायर एक्सटिंग्विशर और फर्स्ट एड बॉक्स, इमरजेंसी एग्जिट,प्रशिक्षित चालक,बच्चों की निगरानी के लिए सहायक यदि इन नियमों की अनदेखी कर कोई वाहन बच्चों को ढो रहा है तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं,बल्कि सीधे-सीधे बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ माना जा सकता है।
अभिभावकों में बढ़ी चिंता : एसईसीएल कॉलोनी और आसपास रहने वाले कई अभिभावकों का कहना है कि उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता हो रही है,उनका कहना है कि जब बच्चे रोज इसी बस से स्कूल जाते हैं तो यह सुनिश्चित होना चाहिए कि वाहन पूरी तरह सुरक्षित और वैध दस्तावेजों से लैस हो, कुछ अभिभावकों का कहना है कि यदि वाहन की फिटनेस ही फेल है तो यह किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकता है, ऐसे में बच्चों को ऐसे वाहन से स्कूल भेजना जोखिम भरा हो सकता है।
यदि दुर्घटना हुई तो कौन होगा जिम्मेदार?
इस मामले का सबसे गंभीर सवाल यही है कि यदि इस बस से कोई दुर्घटना या अप्रिय घटना हो जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? क्या जिम्मेदार होगा, एसईसीएल प्रबंधन,जिसने बस को ठेके पर लगाया है? वाहन मालिक,जो कथित रूप से बिना वैध दस्तावेज के बस चला रहा है? या फिर परिवहन विभाग,जिसकी जिम्मेदारी ऐसे वाहनों की जांच और निगरानी की होती है? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुर्घटना की स्थिति में सबसे बड़ा नुकसान मासूम बच्चों की सुरक्षा को होगा।
जांच और कार्रवाई की मांग…
मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने संबंधित विभागों से तत्काल जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है, उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती,अभिभावकों की मांग है कि संबंधित बस के दस्तावेजों की तत्काल जांच की जाए,यदि दस्तावेज फेल पाए जाते हैं तो बस का संचालन तुरंत रोका जाए,बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
अब निगाहें कार्रवाई पर…
यह मामला सामने आने के बाद अब निगाहें एसईसीएल प्रबंधन और परिवहन विभाग की कार्रवाई पर टिक गई हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल नियमों की अनदेखी का मामला होगा बल्कि बच्चों की सुरक्षा को जोखिम में डालने की गंभीर लापरवाही भी माना जाएगा, अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं, क्या जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी कुछ दिनों की चर्चा के बाद ठंडे बस्ते में चला जाएगा — यह आने वाला समय ही बताएगा।
निगरानी तंत्र पर भी उठे सवाल
इस मामले ने स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि किसी वाहन के दस्तावेज लंबे समय से फेल हैं और फिर भी वह रोज बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ रहा है,तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जांच और निरीक्षण की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है, स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में चलने वाले वाहनों की समय-समय पर जांच होनी चाहिए ताकि ऐसी स्थितियां पैदा ही न हों।


Share

Check Also

अम्बिकापुर@नदी में नहाने गए मामा-भांजी की डूबने से मौत…परिवार में मातम

Share अम्बिकापुर,25 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। शहर से लगे मेन्ड्राकला स्थित नदी में नहाने के दौरान …

Leave a Reply