-संवाददाता-
अम्बिकापुर, 07 मार्च 2026 (घटती-घटना)। महिला एवं बाल विकास विभाग में पदस्थ पर्यवेक्षक और वरिष्ठ साहित्यकार राजलक्ष्मी पाण्डेय ‘राज’ को साहित्य,पेंटिंग और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान,संग्रहालय बालाघाट (मध्यप्रदेश) द्वारा ‘वाचस्पति’ मानद उपाधि (डॉक्टरेट अवार्ड) से सम्मानित किया गया है। राजलक्ष्मी पाण्डेय वर्तमान में राष्ट्रीय कवि संगम, अम्बिकापुर की जिलाध्यक्ष भी हैं और लंबे समय से साहित्यिक व सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने हिंदी और सरगुजिहा भाषा में अब तक करीब 640 रचनाएं लिखी हैं,जिनमें कविता, कहानी,लेख, गीत,नाटक और लघुकथाएं शामिल हैं। उनकी रचनाओं का प्रसारण आकाशवाणी से 127 भेंटवार्ता, 25 काव्यपाठ और 14 कहानियों के रूप में हो चुका है। इसके अलावा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी उनकी कविताएं और कहानियां प्रकाशित हुई हैं। वे कई मंचीय कार्यक्रमों में मंच संचालन, नाट्य मंचन और शासकीय कवि सम्मेलनों में भी सक्रिय भागीदारी निभाती रही हैं। राजलक्ष्मी पाण्डेय को अब तक सरगुजा प्रशासन, राजभाषा आयोग छत्तीसगढ़ और राष्ट्रीय कवि संगम सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा 55 से अधिक सम्मान मिल चुके हैं। छात्र जीवन में भी उन्होंने नृत्य,पेंटिंग और निबंध प्रतियोगिताओं में जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया था। साहित्य के साथ-साथ वे बालिका शिक्षा प्रोत्साहन, महिलाओं में शिक्षा जागरूकता और जरूरतमंद बच्चों की सहायता जैसे सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं। वर्तमान में वे बाल कहानी संग्रह, बाल कविता संग्रह ‘मीना की गुडिय़ा’,किशोरी स्वास्थ्य विषयक पुस्तक और ‘मैं सरगुजा कर माटी हों’ काव्य संग्रह पर कार्य कर रही हैं। बताया जाता है कि राजलक्ष्मी पाण्डेय का कला और साहित्य से जुड़ाव बचपन से ही रहा है। मात्र 10 वर्ष की उम्र से ही उन्हें चित्रकला, नृत्य, अभिनय, खेल और लेखन में रुचि रही है।
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