

-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,07 मार्च 2026 (घटती-घटना)। तामडाड स्थित अंजनी जलाशय से निकलने वाली नहर के लाइनिंग निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। करीब 4 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से चल रहे इस निर्माण कार्य में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की अनदेखी किए जाने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य में निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा और काम घटिया तरीके से कराया जा रहा है,ग्रामीणों के अनुसार नहर लाइनिंग निर्माण कार्य में ठेकेदार द्वारा मनमाने ढंग से काम कराया जा रहा है,जबकि जलसंसाधन विभाग के अधिकारी और इंजीनियर मौके पर कम ही दिखाई देते है,ऐसे में कार्य की गुणवत्ता को लेकर संदेह और गहरा गया है।
गुणवत्ता पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नहर लाइनिंग के निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य में बिना ब्रांडेड सीमेंट और अन्य निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है,इसके साथ ही निर्माण में अपनाए जाने वाले तकनीकी मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा है,नहर की बेसमेंट ढलाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जानकारी के अनुसार जहां विभागीय इस्टीमेट में बेसमेंट और साइड बेस की मोटाई 8 इंच निर्धारित है,वहीं मौके पर करीब 6 इंच मोटाई की ढलाई किए जाने की बात सामने आ रही है।
बिना सूचना पटल के चल रहा निर्माण
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर किसी प्रकार का सूचना पटल या बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। आम तौर पर ऐसे निर्माण कार्यों में लागत, कार्य की अवधि, ठेकेदार का नाम और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी प्रदर्शित की जाती है,ताकि स्थानीय लोगों को भी परियोजना की जानकारी मिल सके,लेकिन इस निर्माण स्थल पर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं दिखाई दे रही है,जिससे ग्रामीणों में संदेह और बढ़ गया है।
ठेकेदार के इंजीनियर ने भी बताई खामियां : ग्रामीणों के मुताबिक जब निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठाए गए तो ठेकेदार के इंजीनियर ने खुद यह स्वीकार किया कि बेसमेंट की ढलाई करीब 6 इंच की की गई है, उन्होंने यह भी कहा कि इतनी मोटाई में वाइब्रेटर चलाना संभव नहीं है,जबकि तकनीकी मानकों के अनुसार ढलाई के दौरान वाइब्रेटर का उपयोग जरूरी माना जाता है, ताकि कंक्रीट में मजबूती बनी रहे,यह स्थिति खुद इस बात की ओर इशारा करती है कि निर्माण कार्य में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी कई जलाशयों में नहर लाइनिंग का निर्माण कराया गया था,लेकिन गुणवत्ता ठीक नहीं होने के कारण बाद में उन निर्माण कार्यों को उखाड़कर दोबारा बनाना पड़ा था,ग्रामीणों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया तो फिर से करोड़ों रुपये खर्च कर निर्माण दोहराने की नौबत आ सकती है।
जांच की उठी मांग…
ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह कार्य जनता के टैक्स के पैसे से किया जा रहा है,इसलिए निर्माण में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित होना जरूरी है।
विभागीय अधिकारी से संपर्क नहीं हो पाया
इस संबंध में जब जलसंसाधन विभाग के इंजीनियर से फोन पर संपर्क कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया,तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया,अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विभाग इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच करेगा और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की समीक्षा कराएगा।
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