-संवाददाता-
अम्बिकापुर,06 मार्च 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को किसी गैर-विश्व विद्यालय कार्यालय में अटैच करना कानून के विरुद्ध है। न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू की एकलपीठ ने इस संबंध में राज्य शासन द्वारा जारी आदेश को निरस्त कर दिया है। मामले में याचिकाकर्ता बिनोद कुमार एक्का, जो संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा में रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत थे, को 15 मार्च 2024 के आदेश के तहत उच्च शिक्षा आयुक्त के कार्यालय में अटैच कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि छत्तीसगढ़ विश्व विद्यालय अधिनियम 1973 और विश्व विद्यालय सेवा नियम 1983 के अनुसार रजिस्ट्रार का पद विश्वविद्यालय का वैधानिक पद है और उसकी सेवा केवल एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में ही स्थानांतरित की जा सकती है। किसी अन्य विभाग या कार्यालय में पदस्थापना का प्रावधान नहीं है। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से तर्क दिया गया कि शासन नियुक्ति प्राधिकारी होने के कारण पोस्टिंग करने के लिए सक्षम है। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उन्हें विश्वविद्यालय से हटाकर आयुक्त कार्यालय में अटैच करना नियमों का उल्लंघन है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि रजिस्ट्रार का पद पूरी तरह विश्वविद्यालय अधिनियम और नियमों के तहत संचालित होता है तथा उसे किसी अन्य गैर-विश्वविद्यालय कार्यालय में अटैच करने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए जारी आदेश कानून के अनुरूप नहीं है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि याचिकाकर्ता को विश्वविद्यालय से बाहर अटैच करने का आदेश नियमों के विपरीत है।
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