
कवासी लखमा ने भाजपा नेताओं को गले लगाया,अजय चंद्राकर ने सदन में थप-थपाई पीठ
रायपुर,23 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र की शुरुआत हो चुकी है। पहले दिन सदन में राज्यपाल का अभिभाषण हुआ,जिसमें उन्होंने अपनी सरकार के विकास कार्यों के बारे में जानकारी दी। उनके मुताबिक रायपुर में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बनेगा और पिछले दो सालों में 532 नक्सली न्यूट्रलाइज्ड किए जा चुके हैं। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद सदन पहुंचे पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने भाजपा नेताओं से गले मिलकर मुलाकात की। उन्होंने अजय चंद्राकर,रामविचार नेताम और धर्मजीत सिंह को गले लगाया। इस दौरान चंद्राकर ने लखमा की पीठ थप-थपाई। 25 फरवरी को इस अभिभाषण पर चर्चा होगी। वित्तमंत्री ओ. पी. चौधरी ने आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की। बजट,वित्तीय वर्ष 2026-27 का, 24 फरवरी को पेश किया जाएगा।
प्रति व्यक्ति आय 1,79,244
रुपए पहुंचने का अनुमान
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया है। आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत से अधिक की रफ्तार से बढ़ सकती है। स्थिर कीमतों (आधार वर्ष 2011-12) पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 8.11 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। वहीं, प्रति व्यक्ति आय 1,79,244 रुपये तक पहुंचने की संभावना है। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट सोमवार को विधानसभा में योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के मंत्री ओ. पी. चौधरी ने पेश की। रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में राज्य की त्रस्ष्ठक्क स्थिर कीमतों पर बढ़कर 3,58,293 करोड़ रुपये और चालू कीमतों पर 6,31,291 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। चालू कीमतों पर वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
सर्वेक्षण में राज्य की वृद्धि को तीन प्रमुख क्षेत्रों में बांटा गया है
– कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र (कृषि, पशुपालन, वानिकी, मत्स्य)ः 7.49′ वृद्धि
– उद्योग क्षेत्र (खनन, निर्माण, विनिर्माण, बिजली,गैस, जल आपूर्ति)ः 7.21′ वृद्धि
– सेवा क्षेत्रः 9.11′ वृद्धि
चालू कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय इस वित्तीय वर्ष में 1,79,244 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है,जो पिछले वर्ष 1,62,848 रुपये थी। इसका मतलब है कि प्रति व्यक्ति आय में 10.07 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी।
एक साल बाद सदन में वापसी
शराब घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा करीब एक साल तक जेल में रहे। इस दौरान वे विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सके। अब उच्च न्यायालय की ओर से 3 फरवरी को उन्हें अंतरिम जमानत दी गई है। इसके बाद विधानसभा की ओर से 7 फरवरी को उनका अभिमत मांगा गया और 2026 में उन्होंने अपनी सहमति व्यक्त की। अब उन्हें तय शर्तों के आधार पर सत्र में शामिल होने की अनुमति दी गई। विधानसभा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कवासी लखमा को जब भी सदन में आना या जाना होगा, इसकी जानकारी पहले से विधानसभा सचिव को देनी होगी। उनकी आवाजाही पर नजर रहेगी और पूरा कार्यक्रम औपचारिक रूप से दर्ज किया जाएगा। उन्हें अपने निवास क्षेत्र का दौरा करने की अनुमति नहीं होगी। यानी वे सत्र के दौरान किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि या क्षेत्रीय कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकेंगे। उनकी मौजूदगी केवल विधानसभा परिसर और सत्र की कार्यवाही तक सीमित रहेगी। सबसे महत्वपूर्ण शर्त ‘नो स्पीच’ से जुड़ी है। उन्हें अपने ऊपर चल रहे मामले के संबंध में किसी भी प्रकार का बयान देने या चर्चा करने की अनुमति नहीं होगी।
वे बजट या अन्य सामान्य विषयों पर चर्चा में भाग ले सकते हैं, लेकिन अपने केस से जुड़े किसी भी मुद्दे पर न तो बोलेंगे और न ही टिप्पणी करेंगे। यदि उन्होंने इन शर्तों का उल्लंघन किया तो उनकी अनुमति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण सदन में भी इस विषय पर कोई चर्चा नहीं की जाएगी।
राजनीतिक तौर से अहम सत्र
शुरू हुआ यह बजट सत्र वित्तीय दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है ही, राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है। सरकार 2026-27 के बजट के जरिए अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखेगी, वहीं विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। इसके साथ ही कवासी लखमा की सशर्त मौजूदगी भी सत्र के दौरान चर्चा का विषय बनी रहेगी। अगले एक महीने तक राज्य की राजनीति का केंद्र विधानसभा ही रहेगा।
दो अहम विधेयक भी सूची में…
इस सत्र में दो महत्वपूर्ण विधेयक भी लाए जाने की सूचना है। छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंर्त्य विधेयक, 2026 और छत्तीसगढ़ लोक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन विधेयक, 2026। इन विधेयकों को लेकर राजनीतिक बहस की संभावना जताई जा रही है।
सवालों और प्रस्तावों की भरमार
बजट सत्र के लिए अब तक 2813 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें 1376 तारांकित प्रश्न शामिल हैं। इसके अलावा 61 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, नियम 139 के तहत 1 अविलंबनीय चर्चा, 13 अशासकीय संकल्प, शून्यकाल की 9 सूचनाएं और 112 याचिकाएं भी प्राप्त हुई हैं। इससे साफ है कि सत्र के दौरान सरकार को कई मुद्दों पर जवाब देना होगा।
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