प्रधानमंत्री आवास की बनावट पर सवाल,ग्राम चंद्रपुर में पसरा मातम
-संवाददाता-
सूरजपुर,18 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है, कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत चंद्रपुर में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई,मृतकों में पति-पत्नी और उनकी मासूम बेटी शामिल हैं। रात में जो परिवार हंसते-बोलते भोजन कर सोया था, सुबह वही घर चीख-पुकार और सन्नाटे में डूब गया।
क्या हुआ उस रात?- प्राप्त जानकारी के अनुसार चंद्रपुर निवासी कवल सिंह (28 वर्ष), उनकी पत्नी कुंती (25 वर्ष) और लगभग चार वर्षीय बेटी मामत रात में खाना खाने के बाद अपने कमरे में सो गए थे, कमरे के भीतर सिगड़ी में कोयला जल रहा था, आशंका जताई जा रही है कि उसी सिगड़ी से निकली जहरीली गैस—संभवतः कार्बन मोनोऑक्साइड—धीरे-धीरे पूरे कमरे में भर गई, दरवाजे और खिड़कियां बंद होने के कारण धुआं बाहर नहीं निकल पाया और दम घुटने से तीनों की मौत हो गई, सुबह जब काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों को शंका हुई, दरवाजा तोड़कर अंदर देखा गया तो पूरा परिवार अचेत अवस्था में पड़ा था।
दो बच्चों की बची जान- बताया जा रहा है कि परिवार के दो अन्य बच्चे—प्रिंस (7 वर्ष) और प्राची (5 वर्ष)—उस रात अपने नाना के साथ घर के दूसरे हिस्से में सो रहे थे, इसी कारण उनकी जान बच गई, अब यही दो मासूम बच्चे इस त्रासदी के बीच अकेले खड़े हैं, गांव में हर जुबान पर एक ही सवाल है—इन बच्चों का भविष्य कौन संभालेगा?
प्राथमिक जांच क्या कहती है?- पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में जहरीली गैस से दम घुटने की आशंका जताई गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट होगा, विशेषज्ञों के अनुसार बंद कमरे में कोयला या सिगड़ी जलाकर सोना बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड गैस रंगहीन और गंधहीन होती है—जिसका अहसास होने तक बहुत देर हो जाती है।
प्रधानमंत्री आवास योजना पर उठे सवाल- ग्रामीणों का कहना है कि मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बना था, लेकिन उसमें पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था, गांव के लोगों का आरोप हैः कमरे में रोशनदान की कमी थी, खिड़कियां छोटी या अपर्याप्त थीं, हवा के निकास की उचित व्यवस्था नहीं थी, यदि पर्याप्त वेंटिलेशन होता तो संभव है कि गैस बाहर निकल जाती और यह हादसा टल जाता। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि क्षेत्र में बने कई आवासों में तकनीकी खामियां हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए।
प्रशासन से मुआवजे की मांग– परिवार के परिजन प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं, उनका कहना है कि परिवार मेहनत-मजदूरी कर जीवनयापन करता था, एक ही झटके में तीन जिंदगियां चली गईं, अब दो मासूम बच्चों की परवरिश, शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी किसकी होगी? यही सवाल पूरे गांव में गूंज रहा है।
यह सिर्फ हादसा नहीं, चेतावनी भी- यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और निर्माण मानकों की समीक्षा की जरूरत की ओर भी इशारा करती है, सर्दियों में सिगड़ी या कोयला जलाकर बंद कमरे में सोना जानलेवा साबित हो सकता है, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इसके खतरों के बारे में जानकारी दें, साथ ही, जिन घरों में वेंटिलेशन की कमी है, वहां तकनीकी सुधार के निर्देश जारी किए जाएं।
गांव में पसरा सन्नाटा- चंद्रपुर गांव में फिलहाल मातम का माहौल है, घर के बाहर बैठी बूढ़ी मां की सूनी आंखें और बिलखते परिजन इस त्रासदी की गवाही दे रहे हैं, एक छोटी सी चूक, या व्यवस्था की कमी—तीन जिंदगियां लील गई, अब नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या जांच के बाद जवाबदेही तय होगी?
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