संविदा कर्मचारी पर गंभीर आरोप,रायपुर की निजी संस्था की रिपोर्ट देने का दावा
मरीज के परिजन ने कलेक्टर कोरिया से की शिकायत,जांच व कार्रवाई की मांग
कोरिया,01 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। प्रदेश सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को आम जनता के लिए सुलभ और निःशुल्क बनाने के दावे कर रही हो,लेकिन कोरिया जिले के जिला अस्पताल बैकुंठपुर से सामने आया मामला इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है,जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में जांच के नाम पर अवैध वसूली और बाहरी निजी संस्था की रिपोर्ट दिए जाने के आरोप लगे हैं। इस पूरे मामले की लिखित शिकायत समस्त दस्तावेजों के साथ कलेक्टर कोरिया को सौंपी गई है, शिकायत के अनुसार,जिला अस्पताल की लैब में पदस्थ एक संविदा कर्मचारी और उसके द्वारा अवैध रूप से रखे गए एक बाहरी व्यक्ति द्वारा मरीजों और उनके परिजनों से पैसों की मांग की जा रही है। आरोप है कि जिन जांचों की सुविधा जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, उनकी भी रिपोर्ट मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही है।
रायपुर की निजी संस्था की रिपोर्ट जिला अस्पताल में देने का आरोप- मरीज के परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, डायबिटीज जांच के नाम पर रायपुर स्थित निजी संस्था वन ग्लोबल सर्विस प्रोवाइडर लिमिटेड की रिपोर्ट जिला अस्पताल में दी जा रही है। इन रिपोर्ट्स पर एमडी पैथोलॉजी डॉ. धनंजय प्रसाद की डिजिटल साइन होने का भी दावा किया गया है, अब यह जांच का विषय है कि ये रिपोर्ट्स वास्तव में वैध हैं या फिर फर्जी तरीके से मरीजों को थमाई जा रही हैं।
केमिकल खरीदी में कमीशनखोरी का भी आरोप
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिला अस्पताल में लैब केमिकल खरीदी के नाम पर भी कमीशनखोरी का खेल चल रहा है,इन अवैध गतिविधियों में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है,जिसकी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
मरीज के परिजन ने बताई आपबीती
इस पूरे मामले को उजागर करने वाले स्थानीय निवासी आशीष जायसवाल ने कलेक्टर कोरिया चंदन त्रिपाठी को लिखित शिकायत दी है, अपने आवेदन में उन्होंने बताया 15 दिसंबर 2025 को मैं अपनी माताजी श्रीमती अनीता जायसवाल को लेकर जिला अस्पताल बैकुंठपुर आया था। डॉक्टर की सलाह पर पैथोलॉजी लैब में जांच कराई गई। वहां पदस्थ संविदा कर्मचारी राधेश्याम चौरसिया और उनके सहयोगी आकाश गुप्ता द्वारा मुझसे 600 रुपये की मांग की गई। पैसे नहीं देने पर रिपोर्ट देने से मना कर दिया गया। मजबूरी में पैसे देने के बाद 17 दिसंबर को रिपोर्ट दी गई। पैसे लेने का कारण पूछने पर कोई जवाब नहीं दिया गया, आशीष जायसवाल ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि यह अवैध वसूली गरीब और मजबूर मरीजों के साथ खुला अन्याय है।
कलेक्टर से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में मरीजों और उनके परिजनों से इस तरह की अवैध वसूली न हो सके।
स्वास्थ्य विभाग की साख पर सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है,जब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात कर रहे हैं। जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में इस तरह के आरोप न केवल स्वास्थ्य विभाग की साख पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि आम जनता के भरोसे को भी चोट पहुंचाते हैं।
अब नजर प्रशासन पर…
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर शिकायत पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है,क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी,या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा,यह आने वाला समय बताएगा।
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