- सोनहत अस्पताल में महीनों से बंद सोनोग्राफी सेवा
- चलती व्यवस्था पर ताला क्यों? सोनहत में बंद सोनोग्राफी ने खोली ‘स्वास्थ्य सुशासन’ की पोल
- पूर्व विधायक गुलाब कमरो का सरकार पर हमला कहा, स्वास्थ्य सुविधा बनी मज़ाक,यह सुशासन नहीं, जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है…


-राजन पाण्डेय-
कोरिया/सोनहत,01 जनवरी 2026(घटती-घटना)। कोरिया जिले के सोनहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से बंद पड़ी सोनोग्राफी सेवा अब एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद का विषय बन गई है,अत्यंत जरूरी स्वास्थ्य सुविधा होने के बावजूद सोनोग्राफी मशीन का महीनों तक उपयोग न होना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हालात यह हैं कि मशीन अस्पताल में मौजूद है,कमरा भी तैयार है,लेकिन ताले के पीछे बंद पड़ी यह सुविधा मरीजों के किसी काम नहीं आ रही,इस मुद्दे को लेकर भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने प्रदेश सरकार और जिला स्वास्थ्य प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे ग्रामीण और आदिवासी अंचल की जनता के साथ सीधा अन्याय बताया है।
बता दे की स्वास्थ्य व्यवस्था का असली इम्तिहान नई योजनाओं की घोषणा से नहीं, बल्कि पहले से मौजूद सुविधाओं के सुचारू संचालन से होता है, कोरिया जिले के सोनहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से बंद पड़ी सोनोग्राफी सेवा इस कसौटी पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग दोनों को कठघरे में खड़ा करती है, सवाल सीधा है जब मशीन मौजूद है, कमरा मौजूद है, मरीज मौजूद हैं, तो फिर सेवा क्यों बंद है? एक डॉक्टर के तबादले के बाद पूरी व्यवस्था का ठप हो जाना यह साबित करता है कि सिस्टम व्यक्ति-आधारित है, व्यवस्था-आधारित नहीं। यही सबसे बड़ी प्रशासनिक विफलता है, सोनहत जैसे आदिवासी और दूरस्थ अंचल में सोनोग्राफी जैसी सुविधा सुविधा नहीं,ज़रूरत है, खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए, पूर्व विधायक गुलाब कमरो का यह सवाल वाजिब है कि पूर्व सरकार में शुरू हुई सुविधा,सरकार बदलते ही बंद क्यों हो गई? अगर नई सरकार पुरानी व्यवस्था को बेहतर नहीं कर सकती,तो कम से कम उसे बिगाड़ने का अधिकार भी नहीं होना चाहिए, सबसे चिंताजनक पहलू यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं दिखता, जब सरकारी सुविधा बंद रहती है और मरीजों को 50-60 किलोमीटर दूर निजी केंद्रों में जाना पड़ता है,तो संदेह पैदा होना स्वाभाविक है क्या यह अनजाने में हो रहा है,या जानबूझकर? सोनहत से बैकुंठपुर जाने की मजबूरी गरीब ग्रामीणों के लिए केवल दूरी नहीं, बल्कि आर्थिक और भावनात्मक सजा है। मेरे पास बैकुंठपुर जाने के पैसे नहीं हैं साहब—यह वाक्य किसी रिपोर्ट की पंक्ति नहीं,बल्कि व्यवस्था पर सबसे कठोर टिप्पणी है।
डॉक्टर के तबादले के बाद ठप हुई पूरी व्यवस्था
जानकारी के अनुसार,सोनहत अस्पताल में सोनोग्राफी सेवा पूर्व में नियमित रूप से संचालित हो रही थी,लेकिन एक डॉक्टर के स्थानांतरण के बाद यह पूरी व्यवस्था अचानक ठप्प हो गई,न तो वैकल्पिक डॉक्टर की व्यवस्था की गई और न ही किसी अन्य तकनीकी समाधान पर ध्यान दिया गया। परिणामस्वरूप,लाखों रुपये की मशीन बंद कमरे में धूल खा रही है, पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सवाल उठाया अगर एक डॉक्टर के तबादले से पूरी सेवा बंद हो जाती है,तो यह व्यवस्था की कमजोरी नहीं तो और क्या है?
मरीजों की बदहाली,गर्भवती महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर
सोनोग्राफी सेवा बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को हो रही है। उन्हें जांच के लिए 50 से 60 किलोमीटर दूर बैकुंठपुर या निजी सोनोग्राफी केंद्रों में जाना पड़ रहा है, इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, बल्कि समय पर जांच न होने से स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ गया है,पूर्व विधायक ने कहा कि सोनहत और आसपास के गांवों के अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं और पूरी तरह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में सुविधा का बंद होना सीधे तौर पर गरीबों पर मार है।
निजी केंद्रों को फायदा पहुंचाने की साजिश?
गुलाब कमरो ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी सोनोग्राफी मशीन को जानबूझकर बंद रखा जा रहा है, ताकि निजी क्लीनिकों को लाभ पहुंचाया जा सके,उन्होंने कहा जब सरकारी सुविधा बंद रहती है,तो मजबूरी में लोग निजी जांच केंद्रों में जाते हैं। यह स्थिति संदेह पैदा करती है और इसकी जांच होनी चाहिए।
भावुक कर देने वाला मामलाः मेरे पास बैकुंठपुर जाने के पैसे नहीं हैं साहब
कुछ दिन पहले रामगढ़ क्षेत्र से सोनोग्राफी कराने सोनहत अस्पताल पहुंची एक महिला को जब यह पता चला कि यहां महीनों से सोनोग्राफी बंद है, तो वह फूट-फूटकर रो पड़ी। महिला ने बताया कि उसे गंभीर तकलीफ है और जांच बेहद जरूरी है,जब लोगों ने उसे बैकुंठपुर जाने की सलाह दी, तो उसने कहा मेरे पास बैकुंठपुर जाने के पैसे नहीं हैं साहब, इस घटना ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। बाद में यूथ कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे को लेकर एसडीएम सोनहत को ज्ञापन भी सौंपा गया,लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मकर संक्रांति से पहले सेवा शुरू न हुई तो आंदोलन
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने चेतावनी दी है कि यदि नए साल में, मकर संक्रांति से पहले सोनहत अस्पताल में सोनोग्राफी सेवा पुनः शुरू नहीं की गई और सप्ताह में कम से कम तीन दिन सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, तो वे हजारों कार्यकर्ताओं और जनता के साथ मिलकर सीएमएचओ कार्यालय का घेराव करेंगे, उन्होंने कहा पूर्व सरकार में जनता की मांग पर यह सुविधा शुरू की गई थी, सरकार बदलते ही सेवा पर ताला लग जाना यह दिखाता है कि स्वास्थ्य विभाग जनता के प्रति कितना असंवेदनशील हो गया है।
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी,सवाल बरकरार…
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर मुद्दे पर अब तक जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है, न यह बताया गया कि सेवा कब शुरू होगी,न यह कि जिम्मेदार कौन है।
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