जयपुर,28 दिसम्बर 2025। अरावली पर्वतमाला को लेकर उठा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दरअसल, जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाडि़यों को ही अरावली मानने की नई परिभाषा का विरोध हो रहा है। अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की वैकेशन बेंच सोमवार को सुनवाई करेगी। बेंच में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी होंगे। सीजेआई के वैकेशन कोर्ट में यह मामला पांचवें नंबर पर लिस्टेड है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई पर टिकी हैं,जहां केंद्र और राज्य सरकारों को नए निर्देश जारी किए जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिश स्वीकार की,जिसमें 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाडि़यों को अरावली के रूप में मान्यता देने की बात कही गई। इससे पहले 1985 से चले आ रहे गोदावर्मन और एमसी मेहता मामले में अरावली को व्यापक संरक्षण मिला हुआ था। नए फैसले के बाद राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पर्यावरण कार्यकर्ता इसे इकोलॉजिकल आपदा बता रहे हैं। पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। पर्यावरणविदों का तर्क है कि अरावली रेंज में 100 मीटर से छोटी पहाडि़यों में खनन की मंजूरी मिलने से इन पर्वतमालाओं के अस्तित्व खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है। वहीं, केंद्र का कहना है कि यह गलतफहमी है और संरक्षण बरकरार रहेगा।
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