चेन्नई, 20 दिसम्बर 2025। मद्रास हाईकोर्ट के जज जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ विपक्षी सांसदों के महाभियोग प्रस्ताव का देश के 36 पूर्व जजों ने विरोध किया है। इससे पहले 56 पूर्व जज भी इस प्रस्ताव पर विरोध जता चुके हैं। शनिवार को इन 36 जजों ने खुले पत्र में कहा- महाभियोग के प्रस्ताव का कदम जजों पर राजनीतिक-वैचारिक दबाव बनाने और डराने की कोशिश है। अगर इस तरह की कोशिशों को आगे बढ़ने दिया गया, तो यह लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता की जड़ों पर हमला होगा क्योंकि लोकतंत्र में फैसलों की परीक्षा अपील और कानूनी समीक्षा से होती है, न कि महाभियोग की धमकियों से। दरअसल, जस्टिस स्वामीनाथन ने 1 दिसंबर को मंदिर और दरगाह से जुड़े मामले में हिंदुओं के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद 9 दिसंबर को प्रियंका गांधी वाड्रा समेत इंडिया गठबंधन के 107 सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था।
जजों ने 4 पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा, रंजन गोगोई, ए.एस बोबड़े, डीवाई चंद्रचूड़ का भी पत्र में जिक्र करते हुए कहा कि इनके खिलाफ भी महाभियोग लाने की कोशिश की गई थी। जज संविधान और शपथ के प्रति जवाबदेह होते हैं, न कि राजनीतिक दबाव के लिए इसलिए देश के सभी सांसदों, नागरिकों को विपक्ष के इस कदम की खुलकर निंदा करनी चाहिए।
यह है पूरा मामला
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक राइट-विंग एक्टिविस्ट की याचिका पर 4 दिसंबर को सुनवाई करते हुए तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर मौजूद एक मंदिर और दरगाह से जुड़े मामले में हिंदुओं के पक्ष में फैसला दिया था।
जस्टिस स्वामीनाथन ने सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के अधिकारियों को दूसरे पक्ष के विरोध के बावजूद दीपाथून पर शाम 6 बजे तक दीपक जलाने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद तमिलनाडु सरकार काफी भड़क गई थी और आदेश मानने से ही इनकार कर दिया। इसी के बाद से विरोध शुरू हुआ था।
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