नई दिल्ली,16 दिसम्बर 2025। केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह एक नया विधेयक, ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक-2025’, लेकर आई है, जिसका कांग्रेस पार्टी कड़ा विरोध कर रही है। कांग्रेस इसे महात्मा गांधी के आदर्शों का अपमान बता रही है और केंद्र पर राष्ट्रपिता के विचारों और गरीबों के अधिकारों से नफरत करने का आरोप लगा रही है। यह राजनीतिक और वैचारिक जंग अब केवल जुबानी नहीं रही, बल्कि सड़क पर उतरने की तैयारी में है। कांग्रेस ने इस विधेयक के विरोध में 17 दिसंबर को देशभर के जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। वेणुगोपाल ने मनरेगा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह एक ऐतिहासिक कानून है, जिसने देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों को काम का अधिकार दिया, श्रम की गरिमा को बनाए रखा और उनकी आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने इस संघर्ष की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘हमारा संघर्ष किसी सामान्य बिल का विरोध करने के बारे में नहीं है, यह एक मुश्किल से मिले अधिकार की रक्षा करने और उन लाखों लोगों के साथ खड़े होने के बारे में है जिनकी जिंदगी, गरिमा और उम्मीद मनरेगा पर निर्भर करती है।’
उन्होंने यह भी दोहराया कि कांग्रेस पार्टी महात्मा गांधी की भावना से और भारत के सबसे गरीब लोगों की रक्षा में इस लड़ाई का नेतृत्व करती रहेगी।
मनरेगा को खत्म करने की योजना के खिलाफ 17 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सरकार की इस योजना का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा को खत्म करने की केंद्र सरकार की योजना के खिलाफ लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए, कांग्रेस पार्टी ने 17 दिसंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, कांग्रेस के स्थापना दिवस (28 दिसंबर) के अवसर पर भी पार्टी के कार्यकर्ता विशेष कार्यक्रम आयोजित करेंगे। वेणुगोपाल ने बताया कि इस दिन हर मंडल और गांव में महात्मा गांधी जी की तस्वीरों के साथ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि इस ‘जनविरोधी कानून’ और ‘बापू जी की विरासत पर सीधे हमले’ का विरोध किया जा सके।
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