- एक व्यक्ति की जनगणना पर 97 रुपए खर्च आएगा
- केंद्र ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ मंजूर किए
नई दिल्ली,12 दिसम्बर 2025। कैबिनेट ने शुक्रवार को तीन महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी। कैबिनेट ने जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोयला लिंकेज नीति में सुधार के लिए कोलसेटू नीति को भी मंजूरी दी है। सरकार ने खोपरा 2025 सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को भी नीतिगत मंजूरी दे दी है।
जनगणना 2027 के बारे में केंद्रीय मंत्री ने बताया
कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जनगणना 2027 की जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विश्व का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास होगा। जनगणना 2027 अब तक की 16 वीं और स्वतंत्रता के बाद की 8 वीं जनगणना होगी। जनगणना केंद्र का विषय है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत इसे किया जाता है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। कोविड महामारी के कारण जनगणना 2021 आयोजित नहीं की जा सकी। इससे पहले 16 जून 2025 को जनगणना 2027 की राजपत्र अधिसूचना जारी की गई। जनगणना 2027 की अनुमानित लागत 11,718 करोड़ रुपये होगी।
दो चरणों में होगी जनगणना
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 को होगी। बर्फ से ढके क्षेत्रों के लिए यह तिथि 1 अक्तूबर 2026 को होगी। वैष्णव ने कहा, ‘जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी। पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास जनगणना होगी। इसे अप्रैल से सितंबर 2026 तक अंजाम दिया जाएगा। दूसरे चरण में जनसंख्या की गिनती होगी। यह फरवरी 2027 से शुरू होगी। बर्फ से ढके क्षेत्रों में सितंबर 2026 से शुरू होगी।
30 लाख लोग जनगणना को देंगे अंजाम
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जाति गणना को भी जनगणना 2027 में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस बार स्व-गणना का भी विकल्प प्रदान किया जाएगा। जनगणना-एक-सेवा विभिन्न मंत्रालयों/राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों को उपयोगकर्ता के अनुकूल, मशीन-पठनीय और कार्रवाई योग्य प्रारूप में डैशबोर्ड जैसी सुविधाओं के साथ डेटा उपलब्ध कराएगी। जनगणना के दौरान राष्ट्रव्यापी जागरूकता,समावेशी भागीदारी,अंतिम छोर तक जुड़ाव और जमीनी कार्यों के समर्थन के लिए लक्षित और व्यापक प्रचार अभियान चलाया जाएगा। इस कार्य में लगभग 30 लाख जमीनी कार्यकर्ता शामिल होंगे और 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा।
मनरेगा की जगह पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी होगा नया नाम
मनरेगा योजना अब पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी के नाम से जाना जाएगा। मोदी सरकार की कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय हो गया है। ग्रामीणों को साल में 125 दिन काम की गारंटी मिलेगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस आशय की जानकारी दी। शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में सरकार ने इसके लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। मनरेगा योजना को साल 2005 में तत्कालीन मनमोहन सरकार ने शुरुआत की थी। शुरु में इसका नाम नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट था, बाद में इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (मनरेगा) किया गया था। यह योजना देश के ग्रामीण परिवारों को आर्थिक स्थिरता और आजीविका देने वाले सबसे बड़े सरकारी फ्लैगशिप योजनाओं में से एक है। पूरी योजना का संचालन ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरफ से किया जाता है।
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