-संवाददाता-
अम्बिकापुर,10 दिसम्बर 2025
(घटती-घटना)।
कार्मल स्कूल में एक जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया,जिसमें समाजसेवी शिल्पा पांडेय ने बाल अधिकार संरक्षण,मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन,महिला उत्पीडऩ निवारण,नशे की प्रवृत्तियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। यह कार्यक्रम जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर विजन समाजसेवी संस्था द्वारा आयोजित किया गया। विजन समाजसेवी संस्था की निदेशक शिल्पा पांडेय ने इस अवसर पर बताया कि उच्चतम न्यायालय ने शैक्षणिक संस्थानों में आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या और मानसिक स्वास्थ्य संकट को देखते हुए, हर शैक्षणिक संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन के लिए कार्यशालाओं, बैठकों, नाटकों और अन्य माध्यमों से जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए हैं। उनका उद्देश्य यह है कि जो बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हैं या जो ‘रेड जोन’ में हैं, उन्हें जीवन की प्रत्याशा में वापस लौटाया जा सके। शिल्पा पांडेय ने यह भी कहा कि वे लगातार शिक्षकों से संवाद स्थापित कर रही हैं और बच्चों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनने के बाद महसूस हुआ कि बच्चों को एक समर्थन की आवश्यकता है। उनका मानना है कि छोटे प्रयास से माता-पिता के बच्चों का जीवन बचाया जा सकता है। ‘जीवन अनमोल है’ यह जागरूकता की थीम जीवन के प्रति विश्वास और आस्था को पुनः स्थापित करने पर केंद्रित है। उन्होंने बच्चों से यह भी अपील की कि यदि उन्हें कहीं भी मानसिक रूप से असुरक्षित महसूस होता है, तो वे सीधे संपर्क कर सकती हैं। समाजसेवी संतोष दास ने बच्चों के मानसिक विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास दोनों ही अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, और बच्चों को जीवन की हर परीक्षा का सामना डटकर करना सिखाना चाहिए। कार्यक्रम का समापन कार्मल स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर रोशनी ने धन्यवाद ज्ञापन इस अवसर पर समाजसेविका अरुण सिंह ने भी अपने विचार साझा किए और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में विजन समाजसेवी संस्था के सदस्य राजू यादव, सुरेखा पैकरा, परमानंद गुप्ता और पीजी कॉलेज के एनसीसी कैडेट्स भी उपस्थित थे।
बच्चों के लिए घर का वातावरण भी महत्वपूर्ण
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के जिला मिशन प्रबंधक सर्वजीत पाठक ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए केवल स्कूल का वातावरण ही नहीं, बल्कि घर का वातावरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि घर का माहौल तनावपूर्ण है, तो यह बच्चों को भीतर से कमजोर और डरपोक बना सकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के संस्कारों का ध्यान रखें, क्योंकि बच्चों का भविष्य उनके घर से ही बनता है।
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