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सोनहत/कोरिया@ करोड़ों ‘स्वाहा’, फिर भी हलक सूखा

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कोरिया में कागजों पर दौड़ा ‘नल’, धरातल पर ढोढ़ी-झरिया का गंदा पानी बनी नियति
सुंदरपुर में जल जीवन मिशन का ‘सूखा’ सचः 1.59 करोड़ खर्च…फिर भी ग्रामीण ढोढ़ी का गंदा पानी पीने को मजबूर
-राजन पाण्डेय-
सोनहत/कोरिया ,22 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)।
वनांचल ब्लॉक सोनहत की ग्राम पंचायत सुंदरपुर में गर्मी बढ़ने के साथ ही पेयजल संकट गहराने लगा है। सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत यहाँ 5 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर 1.59 करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी ग्रामीणों के गले की प्यास नहीं बुझ पा रही है। पीएचई विभाग के रिकॉर्ड में भले ही गांव नलों से लैस हो, लेकिन धरातल पर लोग गंदी और बदबूदार ढोढ़ी (प्राकृतिक स्रोत) का पानी पीने को विवश हैं।
सरकारी रिकॉर्ड बनाम जमीनी हकीकत
पीएचई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1618 की जनसंख्या वाले इस गांव के 318 घरों में से 296 घरों में नल कनेक्शन दे दिए गए हैं, रिकॉर्ड बताते हैं कि पंचायत में 28 हैंडपंप हैं, जिनमें से केवल 4 खराब हैं,साथ ही 4 सोलर पंप और 1 सिंगल फेस पावर पंप चालू हालत में दिखाए गए हैं। इसके विपरीत,ग्रामीणों का कहना है कि नलों में आज तक पानी की एक बूंद नहीं टपकी है,भीषण गर्मी में हैंडपंपों का जलस्तर नीचे चले जाने से अब ढोढ़ी ही एकमात्र सहारा बची है।
खतरे में जान : सुरक्षा घेरा न होने से बढ़ रहा डर
ग्रामीणों को पानी के लिए लगभग 1 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है,जिस ढोढ़ी से पानी लिया जा रहा है,उसके चारों ओर कोई सुरक्षा घेरा नहीं है,जिससे हमेशा हादसे का डर बना रहता है,छोटे-बच्चे इन असुरक्षित खुले कुओं और ढोढि़यों के आसपास खेलते व नहाते नजर आते हैं,जो किसी बड़ी अनहोनी को न्योता दे रहे हैं।
कोरिया जिले के ग्राम पंचायत सलका में गहराया पेयजल संकट,ग्रामीणों ने कलेक्टर से की शिकायत
कोरिया जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सलका में पिछले कई महीनों से पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है,जिससे ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, यहाँ के एक मोहल्ले में स्थित मुख्य नलकूप लंबे समय से खराब पड़ा है, लेकिन बार-बार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सूचना देने के बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई,विभाग की इस अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने अंततः जिला कलेक्टर को आवेदन सौंपकर जल संकट को दूर करने की गुहार लगाई है,ग्रामीणों का कहना है कि नलकूप बंद होने के कारण करीब 20 परिवारों को पानी के लिए मीलों दूर भटकना पड़ रहा है, जिसका सबसे बुरा असर महिलाओं और स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है, पीने के पानी के साथ-साथ खाना बनाने और साफ-सफाई जैसे आवश्यक कार्यों के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कोरिया जिले में ‘जल जीवन मिशन’ केवल कागजों और ठेकेदारों के मुनाफे तक सीमित रह गया है, ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे गुणवत्ताहीन कार्य और विभागीय उदासीनता के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द ही खराब नलकूप की मरम्मत नहीं हुई या पाइपलाइन के जरिए स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
पहाड़ों की तलछट से प्यास बुझाने को मजबूर वनांचल ग्राम सीतापुर के ग्रामीण- सोनहत विकासखण्ड की सीमा से लगे कोटाडोल तहसील के दूरस्थ वनांचल ग्राम सीतापुर में मूलभूत सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों पर भारी पड़ रहा है,जिला मुख्यालय से लगभग 140 किमी दूर स्थित इस आदिवासी बहुल गांव में पेयजल की समस्या इतनी विकराल है कि ग्रामीणों को रोजाना पथरीले और जंगली रास्तों से होकर लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है,गांव में करीब 30 परिवार निवासरत हैं, जिनकी प्यास बुझाने के लिए सुविधाओं के नाम पर केवल एक सोलर पंप है,जो अक्सर खराब रहता है,सोलर पंप के बंद होने पर बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं कंधों पर बर्तन लेकर दुर्गम घाटियों से पानी लाने को मजबूर होते हैं, ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी जमीनी हकीकत से वाकिफ होने के बाद भी इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल रहे हैं। शासन की पेयजल योजनाएं यहाँ दम तोड़ती नजर आ रही हैं और ग्रामीण आज भी अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सोनहत का रेवलाः पहाड़ों की ओट में ‘नल-जल’ योजना का दम तोड़ता सच
सोनहत जनपद के सुदूर वनांचल और चारों ओर ऊँची पहाडि़यों के बीच,किसी गहरी खाई की तरह बसे ग्राम रेवला में सरकारी दावों की जमीनी हकीकत डरावनी है,यहाँ केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना पिछले चार सालों से सिर्फ फाइलों में कैद है, यह इस सदी का सबसे बड़ा मजाक ही है कि जहाँ घर-घर नल पहुँचाने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहाँ रेवला के ग्रामीणों को आज तक एक अदद हैंडपंप तक नसीब नहीं हो सका है, पहाड़ों की दुर्गम भौगोलिक स्थिति ने यहाँ के जीवन को और भी दूभर बना दिया है,पूरा गाँव आज भी प्यास बुझाने के लिए केवल एक प्राकृतिक झरिया (सोता) के भरोसे है,आलम यह है कि गाँव की महिलाएं चिलचिलाती धूप और पथरीले रास्तों की परवाह किए बिना,सिर पर पानी के बर्तन ढोकर कोसों दूर से घर तक पानी लाती हैं,चार साल का लंबा वक्त बीत गया,कई मौसम बदले,लेकिन रेवला की महिलाओं के सिर से पानी का यह बोझ कम नहीं हुआ,प्रशासन की अनदेखी ने इस वनांचल को विकास की मुख्यधारा से काटकर आदिम युग जैसी स्थिति में छोड़ दिया है, जहाँ स्वच्छ पेयजल आज भी एक लग्जरी बना हुआ है।
ग्रामीणों की जुबानी, अव्यवस्था की कहानी
‘मजबूरी में गंदा पानी पीना पड़ रहा है,जिससे बीमारियां बढ़ रही हैं। हमारे पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है। ‘
मानमती सुंदरपुर
‘गांव में घर-घर नल तो लगे हैं, लेकिन शोभा की वस्तु बनकर रह गए हैं। हम सब आज भी ढोढ़ी के भरोसे हैं। ‘
सुशीला सुंदरपुर
सीतापुर में में पानी की गम्भीर समस्या है लोग काफी दूर से पानी लाते हैं
ब्रिज किशोर ग्राम कटवार
तुर्री पानी मे एक मुहल्ले में भारी समस्या है तुर्रा के पानी पर निर्भर हैं गर्मी में पानी को लेकर भारी तकलीफ है
लता सिंह
जलजीवन मिशन को लेकर जैसी उम्मीद जगाई गई थी वैसा हुआ नही, नल जल का सपना दिखा कर कही जल नही तो कही नल ही गायब हो गया
ज्योत्स्ना राजवाड़े पूर्व जिला पंचायत सदस्य
सोनहत के रेवला सुखतरा सेमरिया और अन्य वनाचलो में जल जीवन मिशन की स्थिति दयनीय है पानी को लेकर भारी जद्दोजहद का सामना जनता को करना पड़ रहा है
लल्ली सिंह पूर्व जनपद अध्यक्ष


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