सरकार ने बहस के लिए अड़े विपक्ष को मनाया चुनाव सुधारों पर लोकसभा में 9 दिसंबर को चर्चा

नई दिल्ली,02 दिसम्बर 2025। एसआईआर और वोट चोरी के आरोप के मुद्दे पर लगातार दूसरे दिन संसद में हंगामा हुआ। विपक्ष एसआईआर पर चर्चा की मांग पर अड़ा रहा और ‘वोट चोर-गद्दी छोड़’ के नारे लगाए। इस वजह से लोकसभा में कामकाज नहीं हो सका और कार्यवाही दो बार स्थगित की गई। राज्यसभा में भी सुबह से ही हंगामा शुरू हो गया था। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने एसआईआर पर तत्काल चर्चा की मांग की। चुनाव सुधार यानी एसआईआर पर लोकसभा में 9 दिसंबर को चर्चा होगी। संसद में दो दिन से फौरन चर्चा पर अड़ा विपक्ष बहस के लिए मान गया है। मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता के. सुरेश ने बताया, ‘9 दिसंबर को इलेक्टोरल रिफॉर्म्स यानी चुनावी सुधारों पर 10 घंटे बहस होगी।’ साथ ही उन्होंने कहा- एक दिन पहले 8 दिसंबर को वंदे मातरम् पर चर्चा होगी। इसके लिए भी 10 घंटे का समय तय किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहस की शुरुआत करेंगे। वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर सरकार सदन में इस पर चर्चा करा रही है।
खड़गे बोले…सरकार एसआईआर पर चर्चा को तैयार नहीं…
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा…विपक्ष एसआईआर मामले को गंभीरता से उठाना चाहता है और इस पर चर्चा मांग रहा है, लेकिन सभापति ने अनुमति नहीं दी और सरकार भी चर्चा करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा यह देश के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है। हम इस मुद्दे पर लड़ रहे हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे। वे हमें बोलने नहीं देते। यह तक नहीं बताते कि किस सदस्य ने नोटिस दिया है और मुद्दा क्या है।
संचार साथी एप को लेकर भड़का विपक्ष…
मोबाइल हैंडसेट पर संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल करने के संचार विभाग के निर्देशों पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा,…‘यह एक जासूसी ऐप है। नागरिकों को प्राइवेसी का अधिकार है। हर किसी को परिवार, दोस्तों को मैसेज भेजने की प्राइवेसी का अधिकार होना चाहिए। वे इस देश को हर तरह से तानाशाही में बदल रहे हैं। संसद इसलिए काम नहीं कर रही है क्योंकि सरकार किसी भी चीज पर बात करने से मना कर रही है।
लोकसभा की कार्यवाही
आज 11 बजे तक के लिए स्थगित
संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही दो बार बाधित होने के बाद दोपहर दो बजे पुनः शुरू हुई,लेकिन विपक्ष के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा कराने की मांग को लेकर नारेबाजी और हंगामे के कारण सिर्फ पांच मिनट में ही कार्यवाही अगले दिन बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गयी। विपक्षी सदस्य अध्यक्ष के आसन के समीप वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे, जिससे सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने विपक्षी सदस्यों से अपील की कि वे शांत होकर बैठें और सदन में चर्चा चलने दें। उन्होंने कहा कि देश की जनता सदन की कार्यवाही देख रही है और अपने मुद्दों की चर्चा सुनना चाहती है। उन्होंने विपक्ष पर बार-बार सदन को बाधित करने और वेल में हंगामा न करने की अपील करते हुए इसे जनता के लिए नुकसानदायक बताया। इसके बाद पीठासीन अधिकारी ने सिर्फ पांच मिनट के भीतर यानी दोपहर 2 बजकर 5 मिनट पर सदन की कार्यवाही अगले दिन बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
एसआईआर के खिलाफ संसद भवन के बाहर इंडी गठबंधन का प्रदर्शन
संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस की अगुवाई में इंडी गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। संसद भवन के बाहर हुए इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, महासचिव केसी वेणुगोपाल, लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई, प्रमोद तिवारी सहित कई दलों के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं ने कतारबद्ध होकर हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर प्रदर्शन किया। पोस्टरों पर ‘दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के वोट खत्म करने के लिए नहीं हैं’, ‘एसआईआर खत्म करो, वोट चोरी बंद करो’, ‘एसआईआर रोको, लोकतंत्र बचाओ’, ‘एसआईआर लोकतंत्र के खिलाफ अपराध है’ जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारियों ने ‘एसआईआर बंद करो’ के नारे भी लगाए। कांग्रेस और इंडी गठबंधन एसआईआर शुरू होने के बाद से ही चुनाव आयोग और सत्ताधारी पार्टी भाजपा पर हमलावर है। इन पार्टियों का आरोप है कि एसआईआर के माध्यम से उनके कोर वोटर्स के वोट को काटा जा रहा है।
वेणुगोपाल बोले…सरकार एसआईआर पर चर्चा के लिए आगे आए
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार को संसद में एसआईआर और अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘सरकार को आगे आकर चर्चा के लिए सहमत होना चाहिए। यह बहुत आसान बात है। जब पूरी विपक्षी पार्टी चर्चा की मांग कर रही है, तो उन्हें ऐसा करने से क्या रोक रहा है। पिछला सत्र पूरी तरह से सरकार के रुख की वजह से बेकार हो गया। ‘
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