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नई दिल्ली@संविधान दिवस पर संविधान 9 नई भाषाओं में जारी

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तीन तलाक खत्म करना ऐतिहासिक कदम,जीएसटी से देश की आर्थिक एकता मजबूत हुई : राष्ट्रपति मुर्मू


नई दिल्ली,26 नवम्बर 2025। संसद के सेंट्रल हॉल में बुधवार को 150 वां संविधान दिवस मनाया गया। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान को 9 नई भाषाओं मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया में जारी किया। राष्ट्रपति ने कहा- संसद ने तीन तलाक जैसी सामाजिक बुराई को खत्म कर महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। जीएसटी आजादी के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार है, जिसने देश की आर्थिक एकता को मजबूत किया है। राष्ट्रपति ने बताया- अनुच्छेद 370 हटाने से देश की राजनीतिक एकता में आ रही बाधा दूर हुई। नारी शक्ति बंधन कानून महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की नई शुरुआत करेगा। इस दौरान उन्होंने संविधान की प्रस्तावना भी पढ़ी। दरअसल 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान बनकर तैयार हुआ था। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और दोनों सदनों के सांसद शामिल रहे। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि हमारा संविधान देश के महान नेताओं ने संविधान सभा में तैयार किया था। यह दस्तावेज उन करोड़ों भारतीयों की सामूहिक बुद्धि, त्याग और सपनों का प्रतीक है, जिन्होंने आजादी के लिए संघर्ष किया।

उन्होंने कहा कि संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी और संविधान सभा के विद्वान सदस्यों ने देश की उम्मीदों और आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए गहराई से विचार किया। उनके निस्वार्थ योगदान की वजह से आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारा संविधान बुद्धि, अनुभव, बलिदान और आशाओं से जन्मा है। उन्होंने कहा, ‘संविधान की आत्मा ने साबित कर दिया है कि भारत एक था, एक है और हमेशा एक रहेगा। ‘
लोकसभा अध्यक्ष ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद को श्रद्धांजलि दी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि इस पावन अवसर पर हम भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद, संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान सभा के सभी सदस्यों को श्रद्धांजलि देते हैं। उनकी दूरदर्शिता, समझ और कड़ी मेहनत ने हमें ऐसा महान संविधान दिया, जो हर नागरिक को न्याय, समानता, बंधुत्व और सम्मान का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि यह केंद्रीय कक्ष वही पवित्र स्थान है, जहां लंबी बहस, चर्चा और विचार-विमर्श के बाद हमारा संविधान तैयार हुआ। यहां जनता की उम्मीदों और सपनों को संविधान में जगह दी गई। ओम बिड़ला ने बताया कि पिछले सात दशकों में संविधान के मार्गदर्शन में देश ने सामाजिक न्याय, समावेशी विकास, सुशासन और सामाजिक-आर्थिक प्रगति की दिशा में कई नीतियां और कानून बनाए। संविधान के मार्गदर्शन में भारत तेज़ी से परिवर्तन और विकास की ओर बढ़ रहा है।
बिहार में ज्यादा वोटिंग लोकतंत्र के ताज में एक और ‘कीमती हीरा’ जोड़ने जैसा : उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन
उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि 2024 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में हुए चुनावों में लोगों ने बड़ी संख्या में वोट डालकर दुनिया को फिर दिखा दिया कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था कितनी मजबूत है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए बिहार चुनावों में भी भारी मतदान हुआ, खासकर महिलाओं ने रिकॉर्ड संख्या में वोट डाले। यह भारतीय लोकतंत्र के ताज में एक और ‘कीमती हीरा’ जोड़ने जैसा है। उपराष्ट्रपति ने संविधान सभा की महिलाओं के योगदान की भी सराहना की और कहा कि उनका योगदान ‘अतुलनीय और ऐतिहासिक’ था, जिसने भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत आधार दिया।
हम संविधान पर हमला नहीं होने देंगे : राहुल
संविधान को गरीब का सुरक्षा कवच बताते हुए, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट में लोगों से यह प्रतिज्ञा लेने का आग्रह किया कि ‘हम संविधान पर कोई हमला नहीं होने देंगे’ और कहा कि इस पर किसी भी हमले के खिलाफ खड़े होने वाले वह पहले व्यक्ति होंगे।
राष्ट्रपति बोलीं- तीन तलाक को खत्म करना ऐतिहासिक कदम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, ‘तीन तलाक से जुड़ी सामाजिक बुराई को खत्म करके संसद ने हमारी बहनों और बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। जीएसटी, जो आजादी के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार है, देश की आर्थिक एकता मजबूत करने के लिए लागू किया गया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने से एक ऐसी रुकावट दूर हुई, जो देश की राजनीतिक एकता में बाधा बन रही थी। नारी शक्ति बंधन कानून महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का एक नया दौर शुरू करेगा। राष्ट्रपति ने बताया कि इस साल 7 नवंबर से पूरे देश में ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 साल पूरे होने पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
राष्ट्रपति बोलीं- अंबेडकर संविधान के मुख्य निर्माताओं में से एक थे
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, ‘संविधान दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। 26 नवंबर 1949 को इसी केंद्रीय कक्ष में संविधान सभा के सदस्यों ने भारत का संविधान तैयार करने का काम पूरा किया था। इसी दिन ‘हम भारत के लोग’ ने अपने संविधान को अपनाया। स्वतंत्रता मिलने के बाद संविधान सभा ने अंतरिम संसद का काम भी किया। डॉ. भीमराव अंबेडकर, जो ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन थे, हमारे संविधान के मुख्य निर्माताओं में से एक थे। ‘
संविधान दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं बल्कि आत्ममंथन का भी क्षण है : पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने पत्र में लिखा कि संविधान दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं बल्कि आत्ममंथन का भी क्षण है। इस दिन नागरिकों को यह विचार करना चाहिए कि वे राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का पालन कितनी निष्ठा से कर रहे हैं। पत्र में आग्रह किया गया है कि हर व्यक्ति लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभाए। प्रधानमंत्री ने नागरिकों को कर्तव्य बोध कराते हुए कहा कि हमारे संविधान का आर्टिकल 51ए मौलिक कर्तव्यों को समर्पित है। ये कर्तव्य हमें सामाजिक और आर्थिक प्रगति प्राप्त करने का रास्ता दिखाते हैं। वे मानते थे कि जब हम ईमानदारी से कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, तो हमें अधिकार भी स्वतः मिल जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का संविधान दिवस विशेष है क्योंकि यह सरदार पटेल और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, वंदे मातरम् के 150 वर्ष और गुरु तेग बहादुर की शहादत के 350 वर्ष का अवसर है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ है। प्रधानमंत्री ने संविधान सभा के सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. बाबासाहेब भीमराव आम्बेडकर और कई प्रतिष्ठित महिला सदस्यों को याद किया, जिनकी दूरदर्शिता ने संविधान को समृद्ध बनाया।

उन्होंने संविधान की 60वीं वर्षगांठ के दौरान गुजरात में आयोजित संविधान गौरव यात्रा तथा इसकी 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित संसद के विशेष सत्र और राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जिनमें रिकॉर्ड जन भागीदारी देखी गई।


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