श्रीनगर,15 नवम्बर2025। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में नौगाम पुलिस स्टेशन में शुक्रवार रात करीब 11ः22 बजे बड़ा धमाका हुआ। 9 लोगों की मौत हो गई है, 32 लोग घायल हैं। इनका 92 आर्मी बेस और एसकेआईएमएस सौरा हॉस्पिटल में इलाज जारी है। अधिकारियों के मुताबिक,ब्लास्ट उस समय हुआ जब पुलिस व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल मामले में जब्त विस्फोटक के सैंपल ले रही थी। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या पुलिस स्टेशन में पूरा 360 किलो विस्फोटक रखा गया था या फिर कुछ हिस्सा ही लाया गया था। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी नलिन प्रभात ने कहा कि, यह एक हादसा था। सैंपलिंग के वक्त ब्लास्ट हुआ। मारे गए 9 लोगों में से एक इंस्पेक्टर,3 फॉरेंसिक टीम मेंबर, 2 क्राइम ब्रांच फोटोग्रॉफर,2 राजस्व अधिकारी और एक दर्जी शामिल है। दरअसल यह विस्फोटक हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल गनई के किराए के घर से जब्त किया गया था। गनई को दिल्ली ब्लास्ट केस में पहले ही अरेस्ट किया जा चुका है। 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किला के पास कार ब्लास्ट में 13 लोगों की मौत हो गई थी।
नौगाम ब्लास्ट : गवर्नर एलजी सिन्हा अस्पताल में घायलों से मिले
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा शनिवार को नौगाम पुलिस स्टेशन विस्फोट में घायल लोगों से मिले। उन्होंने उजाला सिग्नस अस्पताल का दौरा किया। एलजी मनोज सिन्हा ने घायलों की सेहत के बारे में जानकारी ली और उन्हें हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई है।
सीपीएल (एम) विधायक बोले…नौगाम धमाका बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
सीपीएल (एम) विधायक एमवाई तारिगामी कहते हैं, ‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और हम सभी शोकाकुल हैं। लेकिन इसकी जांच होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि इसका कारण क्या था, यह दुर्घटनावश हुआ या कुछ और हम आशा करते हैं कि भविष्य में ऐसे घटनाक्रम न हों।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा… नौगाम पुलिस स्टेशन ब्लास्ट हमारी गलती से हुआ
नौगाम पुलिस स्टेशन ब्लास्ट मामले पर,जम्मू-कश्मीर नेशनल कांग्र्रेस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कहा, यह हमारी गलती है,जिन्हें इस विस्फोटक की बेहतर समझ है,हमें उनके साथ पहले बात करनी चाहिए थी कि इसे कैसे संभालना है, खुद ही हाथ-पांव मारने के बजाय आप नतीजा देख ही चुके हैं,9 लोगों की जान चली गई। उन्होंने कहा, वहां कई घरों को नुकसान हुआ। हम अभी दिल्ली में चल रही उस आलोचना से बाहर नहीं आए हैं जहां हर कश्मीरी पर उंगली उठाई जा रही है। वह दिन कब आएगा जब वे स्वीकार करेंगे कि हम भी भारतीय हैं और हम इसके जिम्मेदार नहीं हैं। उन लोगों से पूछिए जो जिम्मेदार हैं कि इन डॉक्टरों को यह रास्ता क्यों अपनाना पड़ा? कारण क्या था? इसकी पूरी तरह जांच और अध्ययन की आवश्यकता है। ‘
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