-संवाददाता-
अम्बिकापुर,08 नवम्बर 2025
(घटती-घटना)।
अंबिकापुर में शुक्रवार को आयुर्वेद अधिकारी संघ द्वारा एक प्रदेशस्तरीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया,जिसमें बड़ी संख्या में आयुर्वेद चिकित्सकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य आयुर्वेद चिकित्सा सेवाओं के सशक्तिकरण और चिकित्सकों की समस्याओं को उजागर करना था।
संघ के प्रांताध्यक्ष गजाधर पंडा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि सरगुजा जिले में 1200 से अधिक संविदा आयुर्वेद चिकित्सक कार्यरत हैं, जो वर्ष 2003 से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक उनका नियमितिकरण नहीं किया गया है। पंडा ने बताया कि संविदा चिकित्सकों का वेतन वृद्धि समय पर नहीं होती और उन्हें कई अन्य सुविधाओं से भी वंचित किया जाता है। उन्होंने ने आगे कहा कि संघ ने स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर अपनी मुख्य मांगें रखी हैं, जिनमें आयुर्वेद संविदा चिकित्सकों का नियमितिकरण,वेतन वृद्धि, और चिकित्सा अवकाश की प्रावधान शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मांग की कि आयुर्वेद चिकित्सकों के लिए प्रशासनिक पदों पर पदोन्नति का अवसर प्रदान किया जाए और उन्हें 4 स्तरीय निर्धारणमान की व्यवस्था दी जाए। संघ ने यह भी सुझाव दिया कि आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों के लिए 2008 के बाद बने नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदों की स्वीकृति दी जाए, ताकि आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली को मजबूती मिल सके। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि सरगुजा जिले में आयुर्वेद चिकित्सालय में शल्य चिकित्सक और पंचकर्म सहायक की नियुक्ति की जाए,ताकि क्षारसूत्र चिकित्सा की गुणवत्ता में सुधार हो सके। संघ ने यह भी प्रस्ताव रखा कि जिले में जिला आयुर्वेद कार्यालय और आवासीय भवन का निर्माण किया जाए, और आयुष के तहत ब्लॉक आयुष मेडिकल ऑफिसर पद की व्यवस्था की जाए। पंडा ने आगे कहा कि आयुर्वेद चिकित्सकों को एलोपैथिक चिकित्सकों की तरह दूरस्थ और कठिन क्षेत्रों में काम करने के लिए सीआरएमसी लाभ भी दिया जाए। इस कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ सदस्य कोमल सिंह, निशांत कौशिक, आशीष सिंह और अन्य आयुर्वेद चिकित्सक भी उपस्थित रहे।
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