जोधपुर,07 नवम्बर 2025। रेगिस्तान की तपती रेत पर शुक्रवार को भारतीय सेना की शक्ति गरज उठी। जैसलमेर में फैले विशाल मरुस्थल में सेना ने अपने संयुक्त हथियार अभियान का शानदार प्रदर्शन किया। आसमान में उड़ते हेलीकॉप्टर और जमीन पर दौड़ते टैंक एक साथ दिखे -जैसे कोई जंग अभी शुरू होने वाली हो। दरअसल, भारत की तीनों सेनाएं इन दिनों पश्चिमी सीमा पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद सबसे बड़ा युद्धाभ्यास कर रही है, जिसका नाम युद्धाभ्यास त्रिशूल दिया गया है। करीब तीस हजार सैनिक इस अभ्यास में अपना दमखम दिखाकर दुनिया को सन्देश दे रहे हैं कि हम किसी से कम नहीं। युद्धाभ्यास में कमांड पोस्ट से हर यूनिट पर नजर रखी जा रही है। ड्रोन और सैटेलाइट से आई रीयल-टाइम तस्वीरें स्क्रीन पर हैं। यह सिर्फ अभ्यास नहीं, बल्कि तकनीकी तैयारी का इम्तिहान है, जहां एक गलती की गुंजाइश नहीं। सेना का कहना है कि यह अभ्यास भविष्य के युद्ध के लिए बेहद अहम है, क्योंकि आने वाले समय में युद्ध सिर्फ बंदूकों से नहीं, बल्कि नेटवर्क, सेंसर और सटीक समन्वय से लड़े जाएंगे। इस मिशन में सेना के भरोसेमंद हेलीकॉप्टर ध्रुव, रुद्र, चेतक और चीता अहम भूमिका निभा रहे है। विमानन विंग और मैकेनाइज्ड यूनिट्स ने अभूतपूर्व समन्वय का प्रदर्शनःअभ्यास के दौरान सेना के विमानन विंग और मैकेनाइज्ड यूनिट्स ने अभूतपूर्व समन्वय का प्रदर्शन किया। हवाई निगरानी, रीकॉन ओवरवॉच और विशेष हैलीबोर्न मिशन को सफलता से अंजाम दिया गया।
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