Breaking News

अम्बिकापुर@प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाण-पत्र पर घेरा,आदिवासी समाज ने किया उग्र आंदोलन की चेतावनी

Share


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,31 अक्टूबर 2025 (घटती-घटना)।

प्रतापपुर विधानसभा की विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि उनका जाति प्रमाण-पत्र फर्जी और कूट रचित है। आरोपों के मुताबिक, उनका जाति प्रमाण-पत्र पति पक्ष से बनवाया गया है,जोकि किसी भी मामले में वैध नहीं हो सकता। जाति प्रमाण-पत्र पिता पक्ष से ही बनता है,न कि पति पक्ष से। इस संदर्भ में आदिवासी समुदाय द्वारा आरोप लगाए गए हैं कि विधायक ने फर्जी दस्तावेज़ के जरिए आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। उक्त बातें शुक्रवार को एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में धन सिंह धुर्वे, मुन्ना सिंह और रामवृक्ष ने कही। तीनों ने बताया कि विधायक के जाति प्रमाण-पत्र की जांच के लिए कलेक्टर बलरामपुर और सूरजपुर को आवेदन दिए गए थे, जिसमें यह पाया गया कि बिना किसी प्रमाण के जाति प्रमाण-पत्र जारी किया गया है। संबंधित दस्तावेजों का अभाव होने के कारण यह प्रमाण-पत्र पूरी तरह से फर्जी और कूट रचित प्रतीत होता है। अंबिकापुर और बलरामपुर के अभिलेखागार में भी इस जाति प्रमाण-पत्र से संबंधित कोई रिकॉर्ड नहीं पाया गया है। धन सिंह धुर्वे ने बताया कि गोंड समाज के जयश्री सिंह ने इस मामले में उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने 17 जून 2025 को आदेश दिया कि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की जाए। अदालत ने जिला स्तरीय छानबीन समिति और उच्च स्तरीय छानबीन समिति रायपुर को निर्देशित किया कि वे इस मामले की तुरंत जांच करें और संबंधित कार्रवाई करें। इसके बाद, जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति, जिला बलरामपुर ने विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते को तीन बार नोटिस जारी किया। 28 अगस्त, 15 सितंबर और 29 सितंबर 2025 को जारी किए गए इन नोटिसों में विधायक से जाति प्रमाण पत्र के संबंध में मूल दस्तावेज और अन्य सुसंगत अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया। हालांकि,विधायक ने इन नोटिसों का कोई भी जवाब नहीं दिया और न ही संबंधित दस्तावेज समिति के समक्ष प्रस्तुत किए।
इस कारण समिति ने यह निष्कर्ष निकाला कि यह जाति प्रमाण-पत्र पूरी तरह से फर्जी और कूट रचित है। आदिवासी समाज ने इस मुद्दे को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उनका आरोप है कि विधायक ने फर्जी आदिवासी प्रमाणपत्र के आधार पर आदिवासी समुदाय के आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और विधायक बनीं, जिससे सही आदिवासी उम्मीदवार का हक मारा गया। भाजपा को धोखा देकर विधायक बनीं शकुंतला सिंह पोर्ते के खिलाफ प्रतापपुर विधानसभा के आदिवासी समुदाय में गहरी नाराजगी है।
आदिवासी समुदाय ने बलरामपुर कलेक्टर और सूरजपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के चार महीने बाद भी जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। आदिवासी समाज का कहना है कि यदि 7 दिनों के भीतर विधायक का जाति प्रमाण-पत्र निरस्त नहीं किया जाता, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। आदिवासी समाज ने चेतावनी दी है कि जब तक जाति प्रमाण पत्र निरस्त नहीं होगा, आंदोलन अनिश्चितकालीन रूप से जारी रहेगा।


Share

Check Also

बलरामपुर @एनएच-343 पर परिवहन व यातायात विभाग की संयुक्त कार्रवाई

Share बिना परमिट चल रही स्कूल बस जब्त,10 हजार रुपये का चालानबलरामपुर ,22 अप्रैल 2026 …

Leave a Reply