- कठिनाइयों के बीच संकल्प और सत्य की राह पर घटती-घटना
संस्थापक-संपादक का संदेश

हमारा संकल्प सूत्र — चरैवेति… चरैवेति…
प्रिय पाठकगण,
1 नवम्बर 2003 यह वही दिन था जब जन-जागरण और सत्य की पत्रकारिता के संकल्प के साथ दैनिक घटती-घटना की नींव रखी गई,उस समय हमारे पास न कोई बड़ी टीम थी,न संसाधन बस था एक विश्वास,कि अगर हम सच्चाई के साथ खड़े रहेंगे,तो जनता हमारे साथ खड़ी होगी,आज जब यह अख़बार अपनी 21वीं वर्षगांठ मना रहा है,तो गर्व होता है कि हमने हर मुश्किल दौर में सत्य,साहस और जनहित के अपने मूल्यों को अक्षुण्ण रखा। हमने सत्ताओं से सवाल किए,जनसमस्याओं को आवाज़ दी,और आम जनता के मुद्दों को मुख्यधारा तक पहुँचाने का काम किया,इस 21 वर्षों की यात्रा में हर पाठक, शुभचिंतक और सहयोगी हमारे परिवार का हिस्सा रहा है,आप सबका विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है,मैं इस अवसर पर उन सभी पत्रकार साथियों,पाठकों,विज्ञापनदाताओं और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करता हूँ,संस्कृत की एक प्रसिद्ध उक्ति है…
विद्या विवादाय धनम् मदाय,शक्तिः परेषां परपीडनाय खलस्य…अर्थात् दुष्ट व्यक्ति के पास यदि ज्ञान हो तो वह विवाद करता है,धन हो तो अहंकार करता है और शक्ति मिले तो दूसरों को पीड़ा पहुँचाता है,विगत दिनों घटती-घटना परिवार के साथ जो घटनाक्रम घटित हुआ,उसे देखते हुए यह कथन सौ प्रतिशत सत्य प्रतीत होता है,पिछले 21 वर्षों से दैनिक घटती-घटना ने सरगुजा अंचल में सत्य की मशाल जलाए रखी है,यह केवल समाचार नहीं देता,बल्कि समाज का वास्तविक प्रतिबिंब प्रस्तुत करता है सत्ता और समाज दोनों का दर्पण बनकर,हमने सदा निरपेक्ष होकर जनहित के मुद्दों को उठाया है,सत्ता की नीतियों पर प्रश्न किए हैं,और उसी के परिणामस्वरूप कई बार असंतोष,विरोध और संकट का सामना भी किया है।
‘‘प्रभुता पायी काही मद नाही’’…जब किसी के हाथ में सत्ता आती है,तो अक्सर वह आत्मकेंद्रित हो जाता है,उसे अपने पतन का भय सताने लगता है,और उसी भय में वह ऐसे निर्णय ले बैठता है जो अंततः उसके ही लिए घातक सिद्ध होते हैं,हमारी युवा टीम ने सदैव जनपक्षीय दृष्टिकोण से कार्य किया है,इसी कारण,सत्ता पक्ष को हमारी निष्पक्ष लेखनी से पीड़ा पहुँची, और उसके अस्तित्व को चुनौती देने के प्रयास हुए, लेकिन सत्य की विजय सदा होती है सत्यमेव जयते। आज यह परिवार सुरक्षित है,सशक्त है,और अपने मौलिक उद्देश्य ‘‘जनहित में निर्भीक पत्रकारिता’’पर दृढ़ता से अग्रसर है। आधुनिक राजव्यवस्था का मूल आधार जनकल्याण और जनसमर्थन है,व्यक्तिगत लाभ के स्थान पर जनहित सर्वोपरि होना चाहिए,इस संतुलन को बनाए रखने की जिम्मेदारी पत्रकारिता पर ही आती है,पत्रकार सत्ता और समाज के बीच सेतु का कार्य करता है जो देखता भी है,समझता भी है,और समाज के समक्ष सच्चाई को निर्भीकता से रखता है,घटती-घटना की यह यात्रा केवल एक अख़बार की कहानी नहीं,बल्कि एक संकल्प की गाथा है…संस्थापक-संपादक की कोई पारिवारिक पत्रकारिता पृष्ठभूमि नहीं रही,आर्थिक संसाधन सीमित रहे, परंतु संस्कारों और सत्य के प्रति समर्पण ने यह मार्ग प्रशस्त किया, कानून के विद्यार्थी के रूप में वैधानिकता के प्रति सजग रहकर,हमने समाज सेवा के मार्ग पर कदम बढ़ाया,पाठकों,विज्ञापनदाताओं,और शुभचिंतकों का स्नेह इस यात्रा का सबसे बड़ा आधार रहा है,और हमें विश्वास है कि यह सहयोग भविष्य में भी बना रहेगा, 22वें वर्ष में प्रवेश की इस पावन बेला पर,हम साहित्यकारों,कलाकारों,समीक्षकों और अपने सभी सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं,जिन्होंने घटती-घटना की यश-वृद्धि में योगदान दिया,शासन और प्रशासन से भी अपेक्षा है कि वे सच को सच और गलत को गलत मानने का साहस दिखाएँ,क्योंकि निर्णय अंततः सत्य के पक्ष में ही होता है।
अंततः हम उसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं —‘चरैवेति… चरैवेति…’
अर्थात् — चलते रहो,सत्य के मार्ग पर,अडिग रहो…।
सादर-अविनाश कुमार सिंह
संस्थापक-संपादक-दैनिक घटती-घटना
‘21 साल बेमिसाल’ संपूर्ण भारत के लिए एक प्रकाशन


संपादकीय लेख…. 01 नवम्बर 2003 को ‘जनजागृति का संकल्प’ लेकर आरंभ हुआ दैनिक घटती-घटना आज अपने गौरवमयी 21 वर्ष की यात्रा पूरी कर रहा है। सीमित संसाधनों में भी यह अखबार जनहित की आवाज़ बनकर उभरा है। न सत्ता की चमक से प्रभावित,न बाजार की चमक-दमक से, घटती-घटना ने हमेशा सच्चाई और निष्पक्षता की राह चुनी। हमारे लिए यह केवल एक समाचार-पत्र नहीं,बल्कि ‘जनता के मन की आवाज़’ है। इस यात्रा में हमने अनेक चुनौतियां देखीं,पर हर कठिनाई ने हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया। संयोग यह है कि दैनिक घटती-घटना अखबार समूह का स्थापना दिवस और भारत के 26 वें राज्य छत्तीसगढ़ का स्थापना दिवस एक ही दिन 1 नवम्बर को मनाया जाता है,जहां छत्तीसगढ़ राज्य अपने 25 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है,वहीं दैनिक घटती-घटना भी अपने गौरवपूर्ण 22वें वर्ष में कदम रख रहा है।
कठिनाइयों के बीच संकल्प और सत्य की राह पर दैनिक घटती-घटना का सफर चुनौतियों से भरा रहा
समाचार पत्र ने कभी सत्य का साथ नहीं छोड़ा,अनेक बार डराया गया,दबाया गया, कुचलने का प्रयास हुआ पर घटती-घटना अपनी अडिगता और निष्ठा के साथ अडिग रही। आज इसका परिणाम यह है कि पाठकों के हृदय में दैनिक घटती-घटना के प्रति गहरा विश्वास है,पाठक जानते हैं कि यह अख़बार हमेशा सत्य के पक्ष में खड़ा रहेगा और हर प्रकाशन योग्य तथ्य को बिना भय और दबाव के प्रकाशित करेगा,सत्य की राह कठिन है यह जानकर भी अख़बार ने अपना कर्तव्य नहीं छोड़ा, कभी कानूनी चुनौतियाँ मिलीं,कभी प्रशासनिक नोटिस आए पर यह सब घटती-घटना की खबर को नहीं रोक सके,इतना ही नहीं,एक समय तो ऐसा भी आया जब समाचार-पत्र के कार्यालय को जेसीबी से जमींदोज करने का प्रयास किया गया फिर भी अख़बार न झुका,न रुका…यह संघर्ष केवल एक संस्था का नहीं,बल्कि पत्रकारिता के उस सिद्धांत का प्रतीक है जिसमें सत्य और जनहित सर्वोपरि हैं,सैकड़ों वैधानिक व प्रशासनिक नोटिसों के बावजूद,अख़बार ने जन-आवाज को मुखरता से प्रकाशित किया,कई बार प्रयास हुआ कि खबरों को गलत ठहराया जाए,पर सत्य के प्रति निष्ठा ने अखबार को और मज़बूत बना दिया।
घटती-घटना परिवार की ओर से हार्दिक आभार
हम अपने प्रिय पाठकों,विज्ञापनदाताओं,सहयोगियों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं,जिन्होंने इस अख़बार को आज के मुकाम तक पहुँचाया। ‘आपका विश्वास ही हमारी असली पूंजी है।’
जनजागृति के संकल्प से लेकर जनपक्षीय संघर्ष तक…
1 नवम्बर 2003 को जन जागृति का संकल्प लेकर प्रारंभ हुआ दैनिक घटती-घटना आज भी उसी भावना के साथ समाज की सच्चाई को सामने लाने का कार्य कर रहा है। इन 22 वर्षों की यात्रा में अखबार ने न सत्ता से समझौता किया,न ही बाजार से बल्कि सच्चाई की राह पर डटे रहकर जनहित के पक्ष में आवाज उठाई। आज जब समाचार जगत में डिजिटल मीडिया और सनसनी के दौर ने पत्रकारिता को चुनौती दी है, वहीं घटती-घटना ने सीमित संसाधनों के बावजूद विश्वास की मिसाल कायम की है।
ईमानदारी के तराजू पर सच्चाई का संतुलन
हमारा उद्देश्य कभी ‘प्रभाव’ नहीं रहा बल्कि ‘प्रभावशाली सच्चाई’ रहा है। दैनिक घटती-घटना ने हमेशा लोकोन्मुखी पत्रकारिता को ही अपना धर्म माना। हमने वही लिखा जो जनता के हित में था,भले ही वह सत्ताधारियों को असुविधाजनक क्यों न लगे, ‘हमारी पत्रकारिता आलोचक भी है, और लोकहित की प्रहरी भी।’
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सच्ची जिम्मेदारी
दैनिक घटती-घटना ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभाई है। कभी भी लाभ, विज्ञापन या दबाव के चलते सच्चाई से समझौता नहीं किया। हमने हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता दी जो व्यवस्था को आईना दिखाती हैं न कि चमकाती हैं।
गांव से शहर तक, लोगों का भरोसा,लोगों की आवाज
हमारे अखबार और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म जी.जी. न्यूज़ को गांव-गांव से लेकर शहरों के दफ्तरों,दुकानों और घरों में समान रूप से सराहा गया है। हम अश्लीलता, सनसनी और द्वेष से दूर रहते हुए सकारात्मक व जिम्मेदार पत्रकारिता के प्रति वचनबद्ध हैं। इसी कारण, पाठक आज भी हर सुबह ‘घटती-घटना’ का इंतजार करते हैं—क्योंकि उन्हें पता है,यह अखबार वही दिखाता है जो सच है।
आपका विश्वास…हमारी पूंजी…
हम अपने सभी पाठकों, ग्राहकों,विज्ञापनदाताओं, सहयोगियों और शुभचिंतकों का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। आपका समर्थन ही हमारी प्रेरणा है। हम यह संकल्प लेते हैं कि आने वाले वर्षों में भी घटती-घटना अपने नाम की तरह घटनाओं की सच्चाई घटती नहीं, बढ़ती रहेगी।
घटती-घटना परिवार आमंत्रित करता है…
यदि आपके आसपास कोई साहित्यकार,पत्रकार, रचनाकार या सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो घर बैठे समाज की सच्चाई को आवाज देना चाहते हैं तो दैनिक घटती-घटना परिवार आपको ससम्मान आमंत्रित करता है, हमारे साथ जुड़ें क्योंकि सच्चाई की यह यात्रा सबकी है।
संस्थापक-संपादक का संदेश
हमारी नीतियों में पारदर्शिता और प्रवृत्ति में इंसानियत की झलक है…
जब तक सच्चाई है, तब तक घटती-घटना की कलम चलती रहेगी…
घटती-घटना को सिर्फ ईमानदारी के तराजू पर परखने की जन्म घुट्टी मिली है…
समाज की सेवा ही हमारा सबसे बड़ा पुरस्कार है…
हम हर उस आवाज़ को स्थान देते रहेंगे जो समाज को जोड़ती है,तोड़ती नहीं…
हमारी यात्रा के मील के पत्थर
2003: घटती-घटना का शुभारंभ — “जनजागृति का संकल्प”
2008: जिले के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले अखबारों में शामिल
2015: डिजिटल प्लेटफॉर्म “जी.जी. न्यूज़” का शुभारंभ
2020: ग्रामीण पत्रकारिता में पारदर्शिता व मानवता पर केंद्रित रिपोर्टिंग के लिए सम्मानित
2025: 21 वर्षों का गौरवपूर्ण सफर
अम्बिकापुर पत्रकारिता जगत से प्रतिक्रिया

21 वर्षों तक निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता निभाना आसान नहीं,दैनिक घटती-घटना ने यह कर दिखाया है।
अनंगपाल दीक्षित,वरिष्ठ पत्रकार,अंबिकापुर

छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय पत्रकारिता में घटती-घटना ने भरोसे की नई मिसाल कायम की है।
-विजय त्रिपाठी,संपादक, दैनिक जशपुरांचल
शुभचिंतक एवं बुद्धिजीवी वर्ग

सत्य,साहस और सरोकार का संगम है घटती-घटना, इसे 22 वीं वर्षगांठ पर हार्दिक शुभकामनाएं।
— राजेंद्र सिंह सेवानिवृत शिक्षक पाठक, कोरिया

जनता के सरोकारों को सत्ता तक पहुँचाने में यह अख़बार लगातार अग्रणी रहा है, यही उसकी असली ताकत है।
डी.के. सोनी,आरटीआई कार्यकर्ता एवं समाजसेवी
पाठकों का भावनात्मक संदेश

हमने घटती-घटना के साथ ही सच्ची खबरें पढ़नी सीखी हैं,यह अख़बार अब घर का हिस्सा बन चुका है।
आकाश सर्राफ व्यवसायी,अंबिकापुर

21 साल की यात्रा सिफऱ् अख़बार की नहीं,हमारे विश्वास की कहानी है।
रविन्द्र तिवारी व्यवसायी, अंबिकापुर,सरगुजा

दैनिक घटती-घटना परिवार को 22 वें वर्षगांठ की हार्दिक बधाई,यह समाचार-पत्र उनके लिए एक विश्वासपात्र है जो आज की व्यवस्था में कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में परेशान हैं,दैनिक घटती-घटना वह समाचार-पत्र है जिसका हर सुबह उस बेसब्री से लोगों को इंतजार रहता है जिस बेसब्री से तब सभी समाचार पत्रों का लोगों को इंतजार रहता था जब इलेक्ट्रॉनिक युग नहीं था,यह विश्वास कायम करना ही इस पत्र की उपलब्धि और जनसरोकारिता है।
रूपेश कुमार सिंह,कोरिया
जनता की आवाज

दैनिक घटती-घटना ने हमेशा हमारी समस्याओं को मुखरता से उठाया, यह सिफऱ् एक अख़बार नहीं,बल्कि जनता की सच्ची आवाज़ है।
बीडी लाल,सेवानिवृत शिक्षक अम्बिकापुर,सरगुजा

गांवों की सड़कों से लेकर मंत्रालय तक जहाँ भी सच्चाई दबी, घटती-घटना ने उसे उजागर किया।
आशिष जायसवाल,शिक्षक कोरिया
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