विचारण न्यायालय में आवेदन कर सकेंगे दायर
बिलासपुर,10 अक्टूबर 2025। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2015 के चर्चित नान घोटाले से संबंधित सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिकाओं को निराकृत कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों की घोटाले में भूमिका होने के बावजूद एसीबी ने चालान नहीं किया, उनके खिलाफ विचारण न्यायालय में धारा 319 के तहत आवेदन दायर किया जा सकता है। इसके साथ ही, भाजपा नेता धरमलाल कौशिक द्वारा एसआईटी जांच के खिलाफ दायर याचिका को वापस लेने की अनुमति दी गई। नान घोटाले से संबंधित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण चार साल से हाईकोर्ट में सुनवाई रुकी हुई थी। सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी संबंधित मामलों का निराकरण होने के बाद, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस पीपी साहू की विशेष खंडपीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान केवल ‘हमर संगवारी’ एनजीओ और अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव की जनहित याचिकाओं के लिए याचिकाकर्ता या उनके अधिवक्ता मौजूद थे। अन्य याचिकाओं की तरफ से कोई उपस्थित नहीं हुआ। धरमलाल कौशिक की ओर से अधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय मौजूद थे। राज्य सरकार की ओर से दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिवक्ता अतुल झा ने कोर्ट को बताया कि 10 साल में ट्रायल कोर्ट में 224 में से 170 गवाहों की गवाही हो चुकी है और मामला अंतिम चरण में है। अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि उनकी याचिका का उद्देश्य उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई है, जिन्हें एसीबी ने जांच में शामिल नहीं किया।
जैसे जहरीले नमक की सप्लाई करने वाले अभियुक्त मुनीश कुमार शाह, जिनकी गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई।
एसआईटी और अन्य याचिकाएं 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद नान घोटाले की विशेष जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। इसके खिलाफ धरमलाल कौशिक और तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने जनहित याचिकाएं दायर की थीं। 2017, 2019 और 2021 में इस मामले में लंबी सुनवाई हुई, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सुप्रीम कोर्ट में याचिका के कारण हाईकोर्ट में सुनवाई दो साल तक रुकी रही। सुप्रीम कोर्ट में ईडी की याचिकाओं के निराकरण के बाद हाईकोर्ट में सुनवाई का रास्ता साफ हुआ।
कोर्ट का फैसला
खंडपीठ ने श्रीवास्तव की सीबीआई जांच की मांग को खारिज करते हुए कहा कि यह मांग विचारण न्यायालय में धारा 319 के तहत आवेदन द्वारा पूरी की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि 10 साल पुराने मामले में अब जांच एजेंसी बदलना उचित नहीं है, क्योंकि विचारण अंतिम चरण में है। इसके साथ ही, सभी जनहित याचिकाओं को निराकृत या खारिज कर दिया गया।
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