नई दिल्ली,18 जुलाई 2026। मध्य प्रदेश के 4 लाख से अधिक सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अब केंद्र सरकार जैसे ही अपने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाएगी, मध्य प्रदेश सरकार भी उसे तुरंत अपने यहां लागू कर देगी। सरकार इसके लिए अब पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ की सहमति का इंतजार बिल्कुल नहीं करना पड़ेगा। यही वजह है कि दोनों राज्यों के वित्त विभागों ने इस संबंध में एक अहम संयुक्त आदेश जारी कर दिया है। यह नई व्यवस्था पूरे प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी।
छत्तीसगढ़ से मंजूरी का 26 साल पुराना नियम समाप्त : पहले वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था। उस समय राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत पेंशनर्स को लाभ देने के लिए दोनों राज्यों की आपसी सहमति अनिवार्य की गई थी। लेकिन इस कागजी औपचारिकता के कारण फाइलें अक्सर महीनों तक सरकारी दफ्तरों में अटकी रहती थीं। नतीजतन बुजुर्ग पेंशनर्स को अपने हक के लिए 6-6 महीने तक लंबा इंतजार करना पड़ता था। अब इस पुराने पेंच को मध्य प्रदेश के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी और छत्तीसगढ़ के वित्त सचिव ने आपसी बैठक कर पूरी तरह हटा दिया है। इसलिए अब दोनों राज्य स्वतंत्र रूप से अपना कार्यकारी आदेश जारी कर सकेंगे।
केंद्र की तय सीमा से ज्यादा राहत देने पर रहेगी रोक : हालांकि इस नए नियम में एक जरूरी वित्तीय शर्त भी जोड़ी गई है। इसके अनुसार कोई भी राज्य केंद्र सरकार द्वारा घोषित दर से अधिक पेंशनर्स महंगाई राहत का भुगतान नहीं कर सकेगा। इसके अलावा दोनों राज्य भविष्य में आपस में केवल वित्तीय भार की जरूरी जानकारी साझा करेंगे। उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बेहद संवेदनशील निर्णय लिया है। इसके बाद अब बुजुर्गों को समय पर बढ़ा हुआ पैसा मिल सकेगा। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद प्रशासनिक लेटलतीफी पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी। आने वाले समय में जैसे ही नई दरें घोषित होंगी, बुजुर्गों के बैंक खातों में बढ़ी हुई राशि सीधे ट्रांसफर कर दी जाएगी। इससे प्रदेश के लाखों परिवारों को बड़ी आर्थिक मजबूती मिलेगी।
वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से अलग होकर एक नया राज्य बना सरकार : यह पूरा मामला दोनों राज्यों के बंटवारे से जुड़ा हुआ है। असल में वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से अलग होकर एक नया राज्य बना था। उस समय राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू किया गया था। इसके तहत दोनों राज्यों के बीच देनदारियों का बंटवारा हुआ।
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