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नई दिल्ली@घुसपैठियों से चुनौती मिल रही,सतर्क रहना है : पीएम मोदी

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोहःप्रधानमंत्री ने स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया
नई दिल्ली, 01 अक्टूबर 2025 (ए)। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह में बुधवार को कहा, संघ के स्वयंसेवकों ने कभी कटुता नहीं दिखाई। चाहे प्रतिबंध लगे, या साजिश हुई हो। सभी का मंत्र रहा है कि जो अच्छा है, जो कम अच्छा,सब हमारा है। उन्होंने इस मौके पर आरएसएस के योगदान को दर्शाने वाला स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक जो लगातार देश सेवा में जुटे हैं। समाज को सशक्त कर रहे हैं, इसकी भी झलक इस डाक टिकट में है। मैं इसके लिए देश को बधाई देता हूं। पीएम ने कहा, डटकर मुकाबला करना है। दूसरे देशों पर आर्थिक निर्भरता,डेमोग्राफी में बदलाव के षड्यंत्र जैसी चुनौतियों से हमारी सरकार तेजी से निपट रही है। स्वयंसेवक होने के नाते मुझे खुशी है कि संघ ने इसके लिए ठोस रोडमैप भी बनाया है। घुसपैठियों से बड़ी चुनौती मिल रही है। हमें इससे सतर्क रहना है। दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, व्यक्ति को समाज के साथ जोड़ना है। इस कारण ही व्यक्ति राष्ट्र का अंग होता है।हमें कोई सर्टिफिकेट नहीं चाहिए,हम किसी का विरोध नहीं करते इसलिए स्वयं सेवक निस्वार्थ होकर काम करता है।
100 साल पहले आरएसएस की स्थापना संयोग नहीं
प्रधानमंत्री ने कहा कि 100 साल पहले आरएसएस की स्थापना मात्र एक संयोग नहीं थी,बल्कि यह भारतीय संस्कृति और राष्ट्र चेतना का कालजयी पुनरुत्थान था। उन्होंने कहा,अन्याय पर न्याय और अंधकार पर प्रकाश की जीत – यही भारतीय संस्कृति का उद्घोष है। आरएसएस उसी अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार है, जो समय-समय पर नई चुनौतियों से निपटने के लिए प्रकट होती रही है।
राष्ट्र प्रथम-संघ का मूल मंत्र
पीएम मोदी ने कहा कि आरएसएस और उसके स्वयंसेवकों का उद्देश्य हमेशा एक रहा है-राष्ट्र प्रथम। उन्होंने कहा कि संघ ने जिस पद्धति को चुना, वह थी व्यक्ति निर्माण के जरिए राष्ट्र निर्माण। शाखा संघ की उस विराट धारा का माध्यम बनी जिसने समाज को संगठित और सशक्त बनाया।
आजादी के बाद संघ के खिलाफ साजिश हुई
पीएम मोदी ने कहा,लक्ष्य एक ही रहा एक भारत श्रेष्ठ भारत। राष्ट्र साधना की यात्रा में ऐसा नहीं कि संघ पर हमले नहीं हुए, आजादी के बाद भी संघ को मुख्य धारा में आने से रोकने के लिए षड्यंत्र हुए। पूज्य गुरुजी को जेल तक भेजा गया। जब वे बाहर आए तो उन्होंने कहा था…कभी-कभी जीभ दांतों के नीचे आकर दब जाती है,कुचल जाती है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ देते, क्योंकि दांत भी हमारे हैं,जीभ भी हमारी है।
संघ की एक धारा,बंटती गई, राष्ट्र निर्माण करती गई
पीएम ने कहा, जिन रास्तों में नदी बहती है,उसके किनारे बसे गांवों को सुजलाम् सुफलाम् बनाती है। वैसे ही संघ ने किया। जिस तरह नदी कई धाराओं में अलग अलग क्षेत्र में पोषित करती है,संघ की हर धारा भी ऐसी ही है। समाज के कई क्षेत्रों में संघ लगातार काम कर रहा है। संघ की एक धारा बंटती तो गई,लेकिन उनमें कभी विरोधाभास पैदा नहीं हुआ, क्योंकि हर धारा का उद्देश्य, भाव एक ही है,राष्ट्र प्रथम। अपने गठन के बाद से ही आरएसएस विराट उद्देश्य लेकर चला राष्ट्र निर्माण, इसके लिए जो रास्ता चुना, व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण,जो पद्धति चुनी वह थी शाखा।

उन्होंने कहा, “हेडगेवार जी कहते थे, जैसा है वैसा लेना है, जैसा चाहिए वैसा बनाना है। लोकसंग्रह का तरीका समझना है तो कुम्हार को देखते हैं। जैसे ईंट पकाना है तो पहले मिट्?टी लाता है, आकार देता है, खुद भी तपता है, ईंट भी तपाता है। ऐसे ही हेडगेवार जी बिल्कुल सामान्य व्यक्ति को चुनकर देश के लिए तैयार करते थे। संघ के बारे में कहा जाता है कि इसमें सामान्य लोग मिलकर असामान्य काम करते हैं। संघ ऐसी भूमि है, जहां से स्वयं सेवक की अहं से वयं की यात्रा शुरू होती है। शाखा में व्यक्ति का सामाजिक, मानसिक विकास होता है। उनके मन में राष्ट्र निर्माण का भाव पनपता रहता है।


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