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नई दिल्ली@बिहार की तरह देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन होगा

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आधे से ज्यादा वोटर्स को पेपर नहीं दिखाने होंगे, 1987 के बाद जन्मे नए वोटर्स को पैरेंट्स के दस्तावेज दिखाने होंगे
नई दिल्ली,17 सितम्बर 2025 (ए)। चुनाव आयोग ने बुधवार को बताया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन बिहार की तर्ज पर देशभर में होगा। लेकिन ज्यादातर राज्यों में आधे से ज्यादा मतदाताओं को किसी प्रकार का दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके नाम पिछली एसआईआर की वोटर लिस्ट में शामिल हैं। ज्यादातर जगह यह प्रक्रिया 2002 से 2004 के बीच हो गई थी। जिन लोगों के नाम उस समय की वोटर लिस्ट में थे,उन्हें अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान साबित करने के लिए कोई नया कागज नहीं देना होगा। जो नए वोटर बनना चाहते हैं,उन्हें डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा। इसमें उन्हें यह बताना होगा कि वे भारत में कब जन्मे हैं। 1987 के बाद जन्मे लोगों को पैरेंट्स के दस्तावेज दिखाने होंगे बिहार में 2003 की एसआईआर सूची को आधार बनाया गया है। वहां के लगभग 5 करोड़ मतदाता (60′) पहले से ही उस सूची में दर्ज हैं, इसलिए उन्हें कोई अतिरिक्त दस्तावेज नहीं देना पड़ा। वहीं लगभग 3 करोड़ नए मतदाताओं (40′) से 11 निर्धारित दस्तावेजों में से कोई एक मांगा गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसमें 12वां दस्तावेज आधार कार्ड भी माना गया। दिल्ली की पिछली एसआईआर सूची 2008 की है और उत्तराखंड की 2006 की, जो अब राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। नई व्यवस्था में ऐसे लोग जो नए वोटर बनना चाहते हैं या दूसरे राज्य से शिफ्ट होकर आए हैं,उन्हें डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा।

इसमें उन्हें यह बताना होगा कि वे भारत में कब जन्मे हैं
1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे हैं, तो खुद का जन्म प्रमाण देना होगा।
1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे हैं, तो माता-पिता के जन्म या नागरिकता के दस्तावेज भी दिखाने होंगे।
2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे लोगों के लिए शर्त और कड़ी है- उन्हें यह साबित करना होगा कि माता-पिता में कम-से-कम एक भारतीय नागरिक हैं और दूसरा गैर-कानूनी प्रवासी नहीं है। यानी उन्हें भी अपने पेरेंट के दस्तावेज दिखाने होंगे।
विपक्ष लगातार एसआईआर पर सरकार और चुनाव आयोग का विरोध कर रहा है, अगस्त में संसद सत्र के दौरान भी विपक्ष के सांसदों ने विरोध किया था।
विपक्ष लगातार एसआईआर पर सरकार और चुनाव आयोग का विरोध कर रहा है, अगस्त में संसद सत्र के दौरान भी विपक्ष के सांसदों ने विरोध किया था।
करीब दो लाख नए बीएलओ जोड़े जाएंगे…
चुनाव आयोग सभी राज्यों में एक साथ एसआईआर कराना चाहता है। हालांकि बिहार से मिले अनुभवों के आधार पर आयोग अपनी प्रक्रियाओं में भी कुछ सुधार करेगा। आयोग सूत्रों के मुताबिक, करीब दो लाख नए बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) जोड़े जाएंगे। सुनिश्चित किया जाएगा कि 250 घरों पर कम से कम एक चुनाव प्रतिनिधि जरूर हो। हाल में हुई बैठक में राज्यों के निर्वाचन अधिकारियों से मिले इनपुट के आधार पर राष्ट्रव्यापी एसआईआर का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इसमें मतदाता फॉर्म भरने, दावे और आपत्तियां दर्ज करने और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ड्राफ्ट और फाइनल मतदाता सूची जारी करने की टाइमलाइन भी बनाई जाएंगी। आयोग के सूत्रों ने कहा कि देशव्यापी एसआईआर की कवायद का बिहार विधानसभा चुनाव से कोई संबंध नहीं है।
राज्यों को तैयारी शुरू
करने के निर्देश मिल चुके

राज्यों के निर्वाचन अधिकारियों को तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। तारीख घोषित होते ही पूरा अमला काम में जुट जाएगा। असम,मणिपुर मेघालय, मिजोरम,नगालैंड, त्रिपुरा,जम्मू-कश्मीर में गहन समीक्षा 2005 में हुई थी। बाकी राज्यों में 2002-03 में हुई थी। महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश में 2006-07 में और दिल्ली में 2008 में गहन समीक्षा हुई थी।


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