क्या धूल दस्त उड़ाते खुलेआम दौड़ रहीं वाहनों पर नहीं है प्रशासनिक भय?
-सुदामा राजवाड़े-
बलरामपुर,09 सितम्बर 2025 (घटती-घटना)। बलरामपुर जिले में गिट्टी खनन और परिवहन में भारी अनियमितताएँ अनियमिताएं देखन को मिल रही हैं। जानकारों का मानना है माइनिंग विभाग एवं आर टी ओ विभाग के अधिकारियों की कथित साठ गांठ से बिना जीएसटी बिल और पिटपास के ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। ओवर लोड बहनों के द्वारा सीमावर्ती राज्यों यूपी एवं झारखंड तक गिट्टी पहुंच रहे हैं। जानकारों का यह भी मानना है कि इस अवैध कारोबार से खनिज विभाग को करोड़ों का राजस्व नुकसान हो रहा है। वहीं दूसरी ओर जर्जर सड़कों का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। नियमों के अनुसार गिट्टी का परिवहन केवल वैध ट्रांजि़ट पास और बिल के साथ ही परिवहन करना संभव है, जानकारों ने तो शंका जाहिर कर यह भी कहा कि ज्यादातर वाहन बिना किसी दस्तावेज के खुलेआम दौड़ रहे हैं। संबंधित विभागीय अधिकारी कभी-कभार कुछ वाहनों को कार्रवाई जरूर करते हैं, लेकिन बड़े स्तर पर हो रहे अवैध कारोबार पर कोई अंकुश से कतराते हैं। शायद इस लिए कार्यवाही के चंद दिनों बाद बेधड़क होकर धूल उड़ाते आसानी से देखे जाते हैं। यह बताना लाजिमी होगा कि संभवतः जलवायु परिवर्तन होने के कारण 10 जून से 15 अक्टूबर तक छत्तीसगढ़ में नदी-नालों से रेत और गिट्टी का उत्खनन और परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है?
ओवरलोडिंग बनी जर्जर सड़क की सबसे बड़ी वजह, आमजनों के जान पर आई आफत : जानकारों ने कहा कि अंबिकापुर से पस्ता तक का सफर करना अब तेरी खीर हो गई है। आए दिन आसानी से देखे जा सकते हैं वाहने सड़क पर गड्ढों और कीचड़ धंसे नजर आते हैं । अब तो राहगीर है दीवाने लाइट वाहन दोपहिया को उक्त सड़क पर चलना चलकर गंतव्य तक पहुंचाना उपलब्धि ही माना जा सकता है। यदि किसी वाहनों में सफर करने के दौरान वाहन चालक एवं सामने बैठे सवारियों के बीच यह कहते आसानी से कहते सुनते देखे जाते हैं अब न 343 में अब सड़क में गड्ढे नहीं बल्कि गड्ढों में सड़क ढूंढ कर चलना पड़ता है। इसके लिए अंबिकापुर से लेकर बलरामपुर जिले से लेकर ब्लॉक स्तर तक मैं ना जाने कई बार विपक्षी पार्टियों पत्रकारों एवं जनप्रतिनिधियों समाजसेवियो के द्वारा धरना प्रदर्शन कर एन एच 343 के विभाग के नाम ज्ञापन भी सौंपे जाने के बावजूद विभाग वाचाल गूंगा- बहरा बनकर मोनी बाबा बनी रही। जिसका खामजिया आम जनमानस को भुगतना पड़ रहा है। अब देखना यह है प्रशासन एवं एन एच 343 के द्वारा आम जनमानस को राहत कब दिया जाता है?
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