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बैकुंठपुर@पूर्व विधायक अंबिका सिंहदेव के विरोध में आने की वजह से सत्ता पक्ष व प्रशासन की जिद है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय महाविद्यालय परिसर में ही बनेगा?

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-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,09 सितंबर 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण का मामला सत्तापक्ष और जिला प्रशासन के लिए अब प्रतिष्ठा का विषय बन गया है और अब इस मामले में सत्तापक्ष और जिला प्रशासन अपने निर्णय पर कायम ही रहने की ठान चुके हैं और हर विरोध और हर आपत्ति को कुचलने की उनकी तैयारी जारी है क्या ऐसा कहना सही है? वैसे जिस तरह के बयान और जिस तरह का रुख सत्तापक्ष और जिला प्रशासन का सामने आ रहा है जो देखने सुनने को मिल रहा है उसके बाद यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि मामला अब अहम की लड़ाई का है और अब जन विरोध,छात्र विरोध, महाविद्यालय प्रबंधन विरोध सहित विपक्ष के द्वारा सभी विरोधों को समर्थन देने के तौर पर किया जा रहा विरोध कुचला जाएगा और जिसकी शुरूआत छात्र विरोध, महाविद्यालय प्रबंधन विरोध सहित जन विरोध करने वालों में से कुछ के विरोध को कुचलकर की जा चुकी है।
वैसे यह सूत्रों से प्राप्त जानकारी है जिसके अनुसार सत्तापक्ष साथ ही जिला प्रशासन हर हाल में महाविद्यालय परिसर में ही नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निर्माण करवा कर रहेगा और इस विषय को दोनों ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर मान लिया है। वैसे यह मामला महाविद्यालय के विस्तार सहित महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र छात्राओं के भविष्य से जुड़ा हुआ मामला था और इस मामले में एक बार कम से कम आम सहमति बनाए जाने की जरूरत थी जो नहीं बनाई गई यह भी आम चर्चा। वैसे सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शहर सहित जिले के किसी भी मामले में जो विकास और विस्तार से जुड़ा मामला हो क्या सत्तापक्ष और विपक्ष एकसाथ बैठकर एक आम सहमति वाला निर्णय नहीं बना सकते? क्या वह हर मामले को राजनीतिक तराजू में तौलकर लाभ हानि चुनावी मानकर ही निर्णय लेने वाली नीति पर अमल करते रहेंगे? वैसे महाविद्यालय परिसर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निर्माण सही नहीं है और इससे महाविद्यालय का विस्तार प्रभावित होगा और महाविद्यालय के छात्र छात्राओं की स्वतंत्रता प्रभावित होगी जैसा कोई विषय महाविद्यालय प्रबंधन की तरफ से सामने लाया गया था तो एकबार इस विषय पर चिंतन क्या आवश्यक नहीं था क्या यह विषय ऐसे ही जाने दिए जाने वाला विषय माना जाना सही था सवाल यह भी है। वैसे सत्ता की धौंस ऐसी होती है कि ऐसा जिला विभाजन भी हो जाता है जो न आवश्यक था न ही ऐसी परिस्थितियां थीं कि ऐसा किया जाना बिल्कुल अनिवार्य था।


निर्णय पर सत्तापक्ष और जिला प्रशासन पुनः विचार करें…
कुछ नेताओं ने सत्ता मिलते ही निर्णय लिया कुछ ने समर्थन किया और एक बंटवारा तय हो गया जिसमें किसे क्या मिला किसने क्या खोया यह जानना किसी ने जरूरी नहीं समझा और आज स्थिति ऐसी है कि न विभाजन के बाद छोटा सा ही जिला बनकर रह गया जिला अपने लोगों के हिसाब से लोगों को सही लग रहा है और न नए जिले के ही सभी शामिल क्षेत्र के लोग उत्साहित हैं प्रसन्न हैं। वैसे नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निर्माण जो महाविद्यालय परिसर में हो रहा है इस मामले में बैकुंठपुर की पूर्व विधायक जो कांग्रेस से हैं और कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में है वर्तमान में प्रदेश में के विरोध के बाद सत्तापक्ष और जिला प्रशासन और अधिक जिद ठान चुका है कि अब कुछ भी हो जाए निर्माण वहीं होगा जहां भूमिपूजन किया गया है क्या ऐसा कहना सही होगा? वैसे भी छात्र संघ सहित छात्रों के विरोध को जन विरोध को महाविद्यालय प्रबंधन विरोध को पूर्व विधायक ने समर्थन देते हुए यह घोषणा कर दी है कि वह उनके विरोध में उनके साथ हैं और वह जिस स्तर का समर्थन मांगेंगे वह देंगी, क्या यह घोषणा ही अब निर्माण की गति को तेज करते हुए विरोध को कुचलने का कारण बन रही है। वैसे सूत्रों के अनुसार महाविद्यालय प्रबंधन के विरोध,छात्र विरोध सहित आमजनों के विरोध को कुचलने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और इस क्रम में भय उत्पन्न करते हुए विरोध को कुचलने की कार्यवाही जारी है। सोशल मिडिया में विरोध दर्ज करने वालों को पुलिस से नोटिस मिल रहा है छात्र विरोध जो होना था उसे छात्रों को डराकर भय उनमें उत्पन्न कर रोक लिया गया है और महाविद्यालय प्रबंधन को भी कुर्सी मोह या महाविद्यालय विस्तार में से एक को चुनने संदेश देकर उनका विरोध भी दबा दिया गया है जैसा कि सूत्र बता रहे हैं। वैसे पूरे मामले में पूरा शहर महाविद्यालय प्रबंधन साथ ही महाविद्यालय के छात्र यह चाहते हैं कि नया पुलिस अधीक्षक कार्यालय महाविद्यालय परिसर में न बनाया जाए और इस निर्णय पर सत्तापक्ष और जिला प्रशासन पुनः विचार करें।


पूर्व विधायक की एंट्री क्या मामले में जिद की वजह बन रही सत्तापक्ष सहित जिला प्रशासन के लिए?
नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निर्माण महाविद्यालय परिसर में न किया जाए यह विषय सबसे पहले महाविद्यालय प्रबंधन ने उठाया और इसे छात्र स्वतंत्रता सहित महाविद्यालय विस्तार के लिए अनुचित एक प्रयास बताया,विरोध में छात्र संघ भी सामने आया जो सत्तापक्ष से सीधे जुड़ाव की बात खारिज करने वाला छात्र संघ है लेकिन यह जाहिर तथ्य भी है कि वह सत्तापक्ष से ही पोषित छात्र संघ है या उसका ही अंग है, इन विरोधों के दर्ज होते होते विपक्ष ने भी मामले में एंट्री की और पूर्व विधायक ने भी विरोध को समर्थन देने की बात कह डाली और पूर्व विधायक के मामले में कूदते ही मामला तुल पकड़ ले गया और सत्तापक्ष और जिला प्रशासन अपनी प्रतिष्ठा का विषय मानकर मामले में अडिग रुख जाहिर करने लगे। पहले जो प्रयास धीरे धीरे बेहतर विरोध दर्ज करते आगे बढ़ रहा था वह पूर्व विधायक की एंट्री होते ही एकाएक हाई प्रोफाइल विरोध साबित हो गया और सत्तापक्ष सहित जिला प्रशासन ने मामले में यह सीधे तौर पर स्पष्ट कर दिया कि अब निर्णय बदलने की जरूरत नहीं है और न ऐसी कोई वजह सामने है,जिला प्रशासन ने तो सत्तापक्ष से ही समर्थन पत्र मंगा लिया ऐसा विपक्ष का दावा है, वैसे अब सवाल यह है कि क्या पूर्व विधायक की एंट्री मात्र से मामला उलझ गया? छात्र विरोध महाविद्यालय प्रबंधन विरोध सहित जन विरोध सत्तापक्ष सहित जिला प्रशासन के लिए बेमतलब होगा अविचारणीय हो गया?


क्या पक्ष विपक्ष एक साथ जिले के जिला मुख्यालय के विकास के लिए आपस में आम सहमति बनाकर निर्णय कोई नहीं ले सकते किसी भी मामले में…?
वैसे सवाल यह भी है कि क्या जिले के विकास जिला मुख्यालय के विकास के मुद्दे पर राजनीति सही है? क्या ऐसे मामले में एक साथ बैठकर सत्तापक्ष के लोग विपक्ष के लोग एक आम सहमति बनाने का प्रयास नहीं कर सकते,कोरिया जिले में जिला विभाजन विषय भी आया तब भी सभी अलग अलग नजर आए और जिले की आज स्थिति सामने है जिला शुरू होते ही खत्म जैसे भौगोलिक क्षेत्रफल के साथ बौना हो गया वहीं अब नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण के समय भी बिल्कुल वैसी ही परिस्थिति सामने है और सत्तापक्ष हर विरोध के बावजूद निर्णय को सही बतला रहा है और विपक्ष सभी विरोधों को समर्थन देने की बात कर रहा है,अच्छा होता एक साथ बैठकर निर्णय लिया जाता जिसमें मुख्यालय के वरिष्ठजनों को शामिल किया जाता,युवाओं को राय देने अवसर प्रदान किया जाता छात्रों से उनकी भी मंशा आशंका पूछी जाती और फिर एक निर्णय लिया जाता। महाविद्यालय प्रबंधन तक के विरोध को वह भी दो दो महाविद्यालय प्रबंधन के ताक पर रख देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के किस नए अध्याय की शुरुआत है यह समझ से परे है।
पूरे शहर का विरोध फिर भी महाविद्यालय परिसर में ही बनेगा पुलिस अधीक्षक कार्यालय जिला प्रशासन सहित सत्तापक्ष की जिद?
जिला मुख्यालय के अग्रणी महाविद्यालय परिसर की भूमि पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय का निर्माण न किया जाए यह शहर भर में नजर आ रहा है विरोध है वहीं यह निर्णय सही है विकास और नवनिर्माण की तरफ बढ़ा हुआ एक बड़ा कदम है यह सत्तापक्ष का बयान है और जिला प्रशासन जिस बयान के साथ खड़ा, क्या सभी विरोधों को कुचलते हुए सत्तापक्ष सहित जिला प्रशासन कोरिया की यह जिद है कि निर्णय जो लिया जा चुका है वह बदलने योग्य नहीं है,वैसे यह तो तय नजर आ रहा है कि निर्णय बदलने के लिए कोई भी मंशा सत्तापक्ष सहित जिला प्रशासन का जाहिर नजर नहीं आया है और ऐसे में विरोध के धरे रह जाने की संभावना ज्यादा है।
नगरीय निकाय चुनाव निकट,किसे नुकसान किसे फायदा?
वैसे जिला मुख्यालय में नगर सरकार का चुनाव जल्द है,नगर सरकार में अपनी भूमिका वह भी पक्ष की भूमिका के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों आमने सामने होंगे,जिले के विभाजन उपरांत होने वाले प्रथम चुनाव में मुद्दे दोनों सामने होगें एक तरफ जिला विभाजन का मुद्दा होगा दूसरी तरफ महाविद्यालय परिसर में नए पुलिस अधिक्षक कार्यालय के भवन निर्माण का मामला भी सामने होगा,अब किसे फायदा होगा किसे नुकसान होगा यह देखना होगा।
महाविद्यालय परिसर में ही पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्माण को क्यों अपना सही निर्णय मानते हैं… सत्तापक्ष के लोग और जिला प्रशासन?
जिला मुख्यालय के अग्रणी महाविद्यालय परिसर में नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्माण की मंजूरी जिला प्रशासन ने प्रदान की है,भूमि आबंटन सहित भूमि का चयन सही स्थल पर किया गया यह सत्तापक्ष का बयान है, महाविद्यालय प्रबंधन दो दो,शहर के लोग, महाविद्यालय के छात्र इसे महाविद्यालय विस्तार सहित छात्र स्वतंत्रता में बाधा उत्पन्न करने वाला निर्णय मानते हैं वह विरोध में हैं,अब जिला प्रशासन और सत्तापक्ष से जुड़े लोग क्यों इस निर्णय को सही बतला रहे हैं सभी विरोधों के बावजूद क्यों वह इस निर्णय को नव निर्माण और विकास के हिसाब से बड़ा कदम बता रहे हैं यह एक बड़ा सवाल है।
क्या अब यह तय हो गया कि निर्माण महाविद्यालय परिसर में ही नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय का तय है?
महाविद्यालय परिसर में नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्माण का विरोध भले ही एक जनविरोध विषय तक जा पहुंचा लेकिन जिस तरह का रुख जिला प्रशासन दिखा रहा है अब तक और जैसे बयान सत्तापक्ष के नेता दे रहे हैं यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या अब हर हाल में निर्माण महाविद्यालय परिसर में तय है नए पुलिस अधिक्षक कार्यालय का। वैसे जिला प्रशासन पूरे मामले में बारीकी से हर विरोध पर नजर टिकाए हुए है और वह विरोध को कुचलने रणनीति के तहत काम कर रहा है ऐसा सूत्रों का दावा है। वहीं जिला प्रशासन और सत्तापक्ष अपने रुख से यह जाहिर भी कर रहे हैं कि निर्णय बदले जाने की बड़ी वजह सामने नहीं है और उत्पन्न विरोध वह कुचलने सक्षम हैं।
क्या किसी जन विरोध के साथ विपक्ष के खड़े होने मात्र से वह विषय सत्तापक्ष के लिए प्रतिष्ठा का विषय हो जाता,गलत भी तब सही हो जाता है?
वैसे इस मामले में एक सवाल यह भी है कि क्या किसी जन विरोध के केवल पक्ष में विपक्ष के खड़े हो जाने मात्र के कारण वह जन विरोध सत्तापक्ष के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन जाता है और उसे कुचलने सत्तापक्ष फिर प्रशासन का सहारा लेकर सामने आ जाता है, महाविद्यालय परिसर में नए पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण के मामले में ऐसा ही कुछ आभास होने लगा है,अब यह लगने लगा है कि विपक्ष की एंट्री से ही मामला प्रतिष्ठा का बन गया और अब हर हाल में सत्तापक्ष निर्माण के पक्ष में नजर आएगा भले ही विरोध के लिए गिनाए जा रहे कारण सही हों। वैसे क्या सही के पक्ष में खड़े होकर यदि विपक्ष का कोई विरोध दर्ज नजर आता है तो क्या वह सत्तापक्ष के लिए सत्ता पर आसीन लोगों के लिए वह एक ठेंस का विषय बन जाता है?


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