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नई दिल्ली@जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में 12′ और 28′ टैक्स स्लैब हटाने की मंजूरी मिली

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दावा- जीएसटी की नई दरें 5′ और 18′ लागू होंगी
नई दिल्ली,01 सितम्बर 2025 (ए)। जीएसटी काउंसिल की 56वीं मीटिंग के पहले दिन 12′ और 28′ टैक्स स्लैब हटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा स्ट्रक्चर को सरल करने के लिए दो स्लैब 5′ और 18′ ही लागू किए जाएंगे। इस दो दिन की मीटिंग में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी दरों के प्रस्तावों और सुधारों पर चर्चा जारी है। 4 सितंबर को यह मीटिंग खत्म होगी। इसके बाद मीटिंग में लिए गए फैसलों का ऐलान किया जा सकता है।
कपड़े और जूते सस्ते होंगे
सूत्रों के मुताबिक, 2,500 रुपए तक के जूते और कपड़ों पर जीएसटी दर घटाकर 5′ की जा सकती है, जिससे ये चीजें ग्राहकों के लिए सस्ती हो जाएंगी।
एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए जल्द रजिस्ट्रेशन
रिपोर्ट के मुताबिक अब माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज और स्टार्टअप्स के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन में लगने वाला समय 30 दिन से घटाकर सिर्फ 3 दिन कर दिया गया है।
स्वास्थ्य बीमा और जीवन रक्षक दवाएं सस्ती होंगी
मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी काउंसिल ने बीमा प्रीमियम की दरों में कटौती करने पर सहमति जताई है, जिससे स्वास्थ्य बीमा लेना सस्ता हो जाएगा। इसके साथ ही, जीवन रक्षक दवाओं पर भी जीएसटी दरें कम होने की उम्मीद है।
निर्यातकों के लिए ऑटोमेटिक रिफंड
निर्यातकों को अब जीएसटी रिफंड ऑटोमेटिक मिलेगा। इस प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है, जिससे उनका काम आसान होगा।
लग्जरी इलेक्टि्रक व्हीकल्स पर टैक्स बढ़ेगा
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, 20 लाख रुपए से अधिक कीमत वाली लग्जरी इलेक्टि्रक गाडि़यों पर जीएसटी दर 5′ से बढ़कर 18′ हो सकती है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो टाटा मोटर्स, महिंद्रा, टेस्ला और मर्सिडीज-बेंज जैसी कंपनियों के लिए यह एक चुनौती बन सकता है।
नई टैक्स दरें 22 सितंबर से लागू हो सकती हैं
केंद्र सरकार जीएसटी की नई दरें 22 सितंबर से लागू कर सकती है। सरकार का मकसद नवरात्रि और फेस्टिव सीजन में कई सेक्टरों में डिमांड और सेल्स को बढ़ावा देना है।
वहीं ष्टहृख्ष्ट की रिपोर्ट में बताया गया था कि सरकार जीएसटी काउंसिल से दरों में बदलावों को तत्काल प्रभाव से मंजूरी देने की अपील कर रही है। दरअसल, सरकार कई प्रमुख सेक्टरों में बिक्री की रफ्तार धीमी होने की आशंका से चिंतित है। इसके लिए वह राज्यों के रेवेन्यू लॉस से जुड़ी चिंताओं को दूर करने पर भी काम कर रही है।


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