Breaking News

अंबिकापुर@कोल खनन से दरक रहा रामगढ़

Share

अंबिकापुर,24 अगस्त 2025 (घटती-घटना)। रामगढ़ पहाड़ के समीप संचालित कोल लॉक में की जा रही लास्टिंग से रामगढ़ पहाड़ी पर दरारें पडऩे लगी हैं। रामगढ़ धरोहर संकट में है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर रविवार को कोठी घर में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने ठोस कदम उठाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी इस सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर से वंचित रह जाएगी।
टीएस सिंहदेव ने बताया कि रामगढ़ पर्वत केवल एक पहाड़ी नहीं, बल्कि सरगुजा अंचल की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान है। टीएस सिंहदेव ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने खनन कंपनी के हित में वन विभाग की नई सर्वे रिपोर्ट को आधार बनाकर केंते एक्सटेंशन कोल लॉक को स्वीकृति प्रदान की है। इस नई रिपोर्ट में खदान को रामगढ़ पर्वत से 10 किमी से अधिक दूर बताया गया है। जबकि कांग्रेस शासनकाल में तैयार की गई पूर्ववर्ती सर्वे रिपोर्ट में यह क्षेत्र रामगढ़ पर्वत के 10 किमी के दायरे में आता था। उसी आधार पर तत्कालीन सरकार ने खदान को मंजूरी देने से इंकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में तथ्यों के विपरीत जानकारी प्रस्तुत कर खदान को मंजूरी देने का प्रयास किया जा रहा है, जो बेहद खतरनाक और जनविरोधी कदम है। पूर्व उप मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को राजनीतिक सीमा से बाहर रखते हुए सभी वर्गों, संगठनों और दलों को एकजुट होकर रामगढ़ की रक्षा के लिए साथ आने की अपील की। उन्होंने कहा कि रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति का गठन इसी उद्देश्य से किया गया है कि यह संघर्ष किसी पार्टी विशेष का नहीं, बल्कि पूरे समाज का होना चाहिए। उन्होंने हाल ही में राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री बने स्थानीय विधायक राजेश अग्रवाल के बयान का भी स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि खदान के कारण रामगढ़ पर्वत को नुकसान पहुंचाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सिंहदेव ने कहा कि यह बयान इस बात का संकेत है कि सरकार के भीतर भी कई लोग इस मुद्दे पर चिंतित हैं और वे साथ आ सकते हैं। इस सिलसिले में शनिवार को रामगढ़ शेड, उदयपुर में क्षेत्र के नागरिकों,सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारी संख्या में ग्रामीणों,सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की उपस्थिति रही। सभी ने एक स्वर में रामगढ़ पर्वत को बचाने की आवश्यकता पर बल दिया और खनन गतिविधियों का विरोध किया। बैठक में रामगढ़ मंदिर के पुजारियों ने स्पष्ट रूप से बताया है कि वर्तमान में संचालित खदानों से होने वाली लास्टिंग के कारण पहाड़ में दरारें आ चुकी हैं। यदि पास में और खदानें शुरू की गईं, तो आने वाले वर्षों में यह पहाड़ी पूरी तरह बिखर सकती है। टीएस सिंहदेव ने कहा कि रामगढ़ पर्वत केवल एक भूगोलिक संरचना नहीं है, यह हमारी आस्था, संस्कृति और पहचान का प्रतीक है। यदि हमने आज इसके अस्तित्व की रक्षा के लिए कदम नहीं उठाए,तो आने वाली पीढिय़ां हमें क्षमा नहीं करेंगी। ये लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं,बल्कि हमारी सांस्कृतिक आत्मा की है।


Share

Check Also

बलरामपुर @एनएच-343 पर परिवहन व यातायात विभाग की संयुक्त कार्रवाई

Share बिना परमिट चल रही स्कूल बस जब्त,10 हजार रुपये का चालानबलरामपुर ,22 अप्रैल 2026 …

Leave a Reply