अब सस्ता और आसान होगा समुद्री व्यापार
नई दिल्ली,22 अगस्त 2025 (ए)। संसद के मानसून सत्र में पांच बड़े समुद्री विधेयक पारित हुए हैं, जिन्हें भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था और व्यापार जगत के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इन नए कानूनों का उद्देश्य औपनिवेशिक युग के पुराने समुद्री कानूनों की जगह आधुनिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप नियम लागू करना है, जिससे न केवल व्यापार आसान होगा बल्कि लागत में भी कमी आएगी। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि पारित हुए नए कानूनों में बिल ऑफ लैडिंग 2025,कैरिज ऑफ गुड्स बाय सी बिल 2025, कोस्टल शिपिंग बिल 2025, मर्चेंट शिपिंग बिल 2025 और इंडियन पोर्ट्स बिल 2025 शामिल हैं। ये सभी कानून क्रमशः 1925, 1958 और 1908 के पुराने औपनिवेशिक कानूनों को बदल देंगे। बिल ऑफ लैडिंग 2025 का उद्देश्य कानूनी दस्तावेजों को सरल बनाना है,ताकि आयात-निर्यात के दौरान विवाद कम हों और व्यापारियों को लेन-देन में आसानी हो। वहीं, कैरिज ऑफ गुड्स बाय सी बिल 2025 हेग-विस्बी नियमों को अपनाकर मुकदमेबाजी कम करने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत बनाने में मदद करेगा। कोस्टल शिपिंग बिल 2025 भारत के 6त्न तटीय नौवहन हिस्सेदारी को पुनर्जीवित करने पर केंद्रित है. इससे हर साल लगभग 10,000 करोड़ रुपये की रसद लागत बचत होगी. साथ ही सड़क यातायात और प्रदूषण दोनों में कमी आएगी.
मर्चेंट शिपिंग बिल 2025 वैश्विक मानकों के अनुरूप जहाजों की सुरक्षा,नाविकों के कल्याण और समुद्री पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित है. इसमें जहाज़ दुर्घटनाओं में मलबा हटाने और बचाव कार्यों को तेज़ बनाने का भी प्रावधान है।
इंडियन पोर्ट्स बिल 2025 के तहत राज्य समुद्री बोर्डों को छोटे बंदरगाहों के प्रबंधन की अधिक शक्ति दी जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर विवादों का समाधान होगा और डिजिटल पोर्ट सिस्टम के माध्यम से पारदर्शिता और निवेश बढ़ेगा।
मंत्री सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सागरमाला विजऩ के तहत 11,000 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा भारत की ब्लू इकोनॉमी के लिए नए अवसर खोलेगी। इससे न केवल निर्यात-आयात बढ़ेगा बल्कि रोजगार और निवेश के अवसर भी मिलेंगे।
ये नए कानून भारत के लिए न सिर्फ समुद्री व्यापार को सस्ता और आसान बनाएंगे, बल्कि देश को वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
भ्रष्ट पीएम-सीएम को हटाने वाले बिल पर अमित शाह का बयान
अगर केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया होता तो…

संसद के मॉनसून सत्र के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 130 वां संविधान संशोधन विधेयक समेत तीन अहम बिल पेश किए। इस दौरान संसद में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने सत्तादल पर कई गंभीर आरोप लगाए। अब शुक्रवार को अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अगर केजरीवाल इस्तीफा दे देते तो यह बिल पेश करने की जरूरत नहीं होती। शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान गृहमंत्री अमित शाह से इस 130वें संविधान संशोधन बिल पर सवाल किया गया। अमित शाह ने कहा कि देश की आजादी के बाद 75 सालों में ऐसा नहीं हुआ है कि इस तरह के बिल पेश करने की जरूरत पड़ी हो। उन्होंने कहा, क्या देश की जनता चाहती है कि कोई मुख्यमंत्री जेल में रहे और सरकार चलाए? यह कैसी बहस है? मेरी समझ में नहीं आता। यह नैतिकता का सवाल है। शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, अब वे पूछ रहे हैं कि इसे पहले संविधान में क्यों शामिल नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि जब संविधान बनाया गया था, तो यह सोचा भी नहीं गया था कि जेल जाने वाले लोग निर्वाचित पद पर बने रहेंगे और सरकार चलाएंगे। पहले भी ऐसी स्थितियां उत्पन्न हुईं है लेकिन उन लोगों ने जेल जाने के बाद अपने संवैधानिक पद से इस्तीफा दे दिया था।
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