अंतरिम रोक हटाई
न्यू दिल्ली,12 अगस्त 2025 (ए)। सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की उस याचिका को बंद कर दिया, जिसमें आयुर्वेद और अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि याचिका में मांगी गई राहत पहले ही मिल चुकी है, इसलिए अब इस मामले को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही, कोर्ट ने नियम 170 को हटाने पर लगाई गई अंतरिम रोक को भी हटा दिया और पक्षकारों को हाई कोर्ट में जाने की छूट दी।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई शुरू करते हुए कहा, याचिका में मांगी गई सारी राहत पहले ही पूरी हो चुकी है। अब इस मामले को बंद करना चाहिए। वकील ने दलील दी कि आयुर्वेद के विज्ञापनों में कई बार गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर के इलाज का दावा किया जाता है, जिससे मरीज भटक जाते हैं और जब तक वे
एलोपैथी डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, तब तक बीमारी गंभीर हो चुकी होती है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा, जब तक इन दवाओं को बनाने की इजाजत है, हम यह नहीं कह सकते कि इन्हें बेचा न जाए। जस्टिस विश्वनाथन ने यह भी कहा कि विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाना अनुचित व्यापार व्यवहार हो सकता है।
आम आदमी की समझ को कम न आंके
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ऐसी शिकायतों के लिए कानूनी व्यवस्था मौजूद है। एक वकील ने देश की बड़ी अनपढ़ आबादी का हवाला देते हुए चिंता जताई, जिस पर मेहता ने टिप्पणी की,यह जंतर-मंतर नहीं है, जहां कोई भी आकर कुछ भी कह दे। आम आदमी की समझ को कम न आंके। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि वे सिर्फ एक मंच हैं और फेसबुक, व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म को बेवजह मुकदमों में नहीं घसीटा जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियम 170 को हटाने से जुड़े किसी भी मुद्दे पर पक्षकार हाई कोर्ट जा सकते हैं।
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