बीएलए पर अमेरिका के जाल में फंसे जनरल मुनीर,भारत से नहीं सीख पाए…
न्यू दिल्ली,12 अगस्त 2025 (ए)। अमेरिका के दौरे पर गए पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाकायदा उल्लू बना दिया है। मुनीर ये सोच रहे होंगे कि ट्रंप ने उनकी मनचाही मुराद पूरी कर दी है। दरअसल, अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी ‘मजीद ब्रिगेड’ को विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। पाकिस्तान में यह माना जा रहा है कि मुनीर ने अमेरिका की धरती से बड़ी जीत हासिल कर ली है। मगर, हकीकत यह है कि इसके पीछे अमेरिका की मंशा कुछ और ही है, जो पाकिस्तान समझ नहीं पाया। वह भारत से सबक भी नहीं ले सका कि भारत ने किस तरह से ट्रंप की बात न मानकर रूस से अपनी दोस्ती बरकरार रखी है। इसे समझते हैं।
ट्रंप सरकार ने क्या किया, जिससे खुश हो गए मुनीर
दरअसल,पाकिस्तान में बलूच विद्रोही संगठन बीएलए लंबे समय से पाकिस्तान के लिए सिरदर्द रहा है। मजीद ब्रिगेड को इस संगठन का आत्मघाती हमला करने वाला विंग माना जाता है। अमेरिका ने कहा कि इस कदम का मकसद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की फंडिंग और हथियारों की आपूर्ति पर रोक लगाना है, ताकि इसकी हिंसक गतिविधियों को खत्म किया जा सके। यह कदम चीन के लिए राहत वाला बताया जा रहा है, क्योंकि बीएलए ग्वादर पोर्ट और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी सीपीईसी के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता है।
भारत ने कड़े टैरिफ लगाने के बाद भी नहीं मानी बात
भारत ने खुद को शुरू से ही एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में दुनिया को बताया है। उसने कभी भी किसी देश की गुटबाजी
या खेमेबाजी से अपने को दूर रखा। ट्रंप इस बार यूक्रेन से युद्ध करने वाले रूस से तेल न लेने के लिए भारत पर दबाव डाल रहे हैं। इसके लिए वो भारत पर टैरिफ पर टैरिफ लगा रहे हैं। अब तक 50 फीसदी टैरिफ भी लगा चुके हैं। मगर, भारत ने रूस से दोस्ती नहीं तोड़ी और न ही उसने तेल लेना ही बंद किया है। भारत ने अमेरिका को साफ शब्दों में बता दिया है कि रूस से तेल खरीदना उसके राष्ट्रीय आर्थिक हितों से जुड़ा है, जिससे वह किसी भी दबाव में नहीं झुकने वाला है।
बीएलए को लेकर क्या है अमेरिका का मकसद
सबसे पहले यह समझते हैं कि बीएलए को आतंकी संगठन घोषित करने और पाकिस्तान को खुश करने के पीछे अमेरिका का क्या मकसद है। दरअसल, बलूचिस्तान में दुर्लभ खनिजों का भंडार है, जिस पर अभी
कुछ हिस्सों में चीन ने निवेश कर रखा है। अमेरिका का मकसद वहां चीन को हटाकर अपनी जड़ें जमाना है। अमेरिका रेयर अर्थ मिनरल्स के मामले में अपनी बादशाहत हासिल करना चाहता है। यही वजह है कि वह ग्रीनलैंड, अलास्का और बलूचिस्तान समेत दुनिया के कई ऐसे हिस्सों पर अपना कब्जा जमाना चाहता है।
अब बलूचिस्तान ही क्यों, ये भी समझाए अमेरिका
दरअसल, अमेरिका को यह समझ आ गया है कि पाकिस्तान चीन के काफी करीब जा रहा है। जबकि पैसे लेने की बात आती है तो पाकिस्तान अमेरिका की ओर मुंह ताकता है। इंटरनेशनल मॉनीटरी फंड यानी आईएमएफ हो या वर्ल्ड बैंक, सभी अमेरिका के ही इशारे पर पाकिस्तान को फंडिंग करते हैं। यही वजह है कि अमेरिका अब आतंकवाद को बढ़ावा देने और आतंकियों को पनाह देने के आरोपों के बावजूद पाकिस्तान के खनिज भंडार पर ध्यान दे रहा है। ये खनिज स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा के लिए बहुत जरूरी हैं।
6 ट्रिलियन डॉलर की संपदा के लालच में है अमेरिका
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने उस वक्त प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की और इस्लामाबाद में पाकिस्तान मिनरल्स इन्वेस्टमेंट फोरम 2025 में हिस्सा लिया। यहां पाकिस्तान ने अपनी खनिज संपदा दिखाई,जिसकी कीमत लगभग 6 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है। इसमें दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा तांबे का भंडार भी शामिल है। इस फोरम में अमेरिका, चीन, सऊदी अरब और यूरोपीय संघ के निवेशकों ने भाग लिया। पाकिस्तान ने खुद को भविष्य में खनिजों का केंद्र बनाने की कोशिश की।
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