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नई दिल्ली@ अपार संपत्ति के मालिक हैं महाराज निरुद्धाचार्य

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नई दिल्ली, 04 अगस्त 2025 (ए)।
आज के समय में अगर कोई आध्यात्मिक गुरु सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा छाए हुए हैं,तो वो हैं अनिरुद्धाचार्य महाराज. उनकी कथा सुनने वाले सिर्फ मंदिरों या पंडालों में ही नहीं,बल्कि मोबाइल और टीवी स्क्रीन पर भी लाखों-करोड़ों की तादाद में मौजूद हैं। अब सवाल ये उठता है कि इतने बड़े स्तर पर कार्यक्रम करने वाले अनिरुद्धाचार्य जी की कमाई कितनी है? उनकी नेट वर्थ और खर्चों का अंदाजा आखिर कैसे लगाया जाए? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,अनिरुद्धाचार्य जी का असली नाम अनिरुद्ध शर्मा है. उन्होंने बहुत ही कम उम्र में धर्म का रास्ता अपनाया और रामचरितमानस, श्रीमद्भागवत गीता जैसी धार्मिक ग्रंथों की कथा कहने में खुद को समर्पित कर दिया। उनकी आवाज में जो मिठास और अंदाज में जो अपनापन है, वही उन्हें बाकी कथा वाचकों से अलग बनाता है.
कुल संपत्ति लगभग 15 से 20 करोड़ रुपये
जहां तक इनकम की बात है, अनिरुद्धाचार्य जी के पास कमाई के कई स्रोत हैं। उनके धार्मिक आयोजनों के लिए लाखों की भीड़ जुटती है और आयोजनकर्ता उन्हें बुलाने के लिए मोटी दक्षिणा देते हैं। इसके अलावा उनके यूट्यूब चैनल पर करोड़ों व्यूज आते हैं,जिससे उन्हें सोशल मीडिया से भी अच्छी-खासी कमाई होती है। स्पॉन्सरशिप और डोनेशन से भी आमदनी होती है। कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो उनकी कुल संपत्ति लगभग 15 से 20 करोड़ रुपये के बीच है। ये संपत्ति सिर्फ पैसों तक ही सीमित नहीं है। बताया जाता है कि उनके पास कुछ जमीन और आश्रम भी हैं,जहां धार्मिक गतिविधियां होती हैं. इसके साथ ही जरूरतमंदों को मदद दी जाती है।
सोशल मीडिया पर भी कायम है जलवा
लेकिन सबसे खास बात ये है कि अनिरुद्धाचार्य जी अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा समाज सेवा में लगाते हैं। उनके द्वारा चलाए जा रहे प्रकल्पों में भोजन सेवा,गौ सेवा, गरीबों की मदद और शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं। वो खुद सादा जीवन जीते हैं और भव्यता से ज़्यादा भक्ति में विश्वास रखते हैं।
सोशल मीडिया पर भी उनका जलवा कम नहीं है। उनके यूट्यूब वीडियोज पर लाखों लाइक्स और शेयर आते हैं। इंस्टाग्राम, फेसबुक पर भी लोग उनके विचार और कथाएं बड़े चाव से देखते-सुनते हैं।
डिजिटल युग के धर्मगुरु हैं अनिरुद्धाचार्य
अनिरुद्धाचार्य जी की सफलता इस बात का सबूत है कि अगर भावनाओं के साथ धर्म की बात की जाए, तो वह दिलों तक पहुंचती है। आज वो न सिर्फ एक कथावाचक हैं,बल्कि एक डिजिटल युग के धर्मगुरु भी बन चुके हैं।


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