उपराष्ट्रपति के लिए संभावित नामों की चर्चा जोरों पर…
नई दिल्ली,22 जुलाई 2025 ए)। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपे अपने इस्तीफे में धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया। यह फैसला संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन आया, जिसने उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया। सत्तारूढ़ भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों सहित निर्वाचक मंडल में बहुमत है, इसलिए अगले उपराष्ट्रपति के चयन में उसकी भूमिका निर्णायक होगी।
संविधान के अनुच्छेद 68 के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद की रिक्ति को यथाशीघ्र भरा जाएगा। नवनिर्वाचित व्यक्ति अपने पदभार ग्रहण करने की तारीख से पांच वर्ष तक पद पर रहेगा। भाजपा के पास इस पद के लिए कई अनुभवी नेता उपलब्ध हैं। धनखड़ के पूर्ववर्ती एम वेंकैया नायडू, जो 2017 में उपराष्ट्रपति बने थे,पहले मोदी मंत्रिमंडल में थे। संभावना है कि पार्टी किसी राज्यपाल,केंद्रीय मंत्री या संगठन के वरिष्ठ नेता को यह जिम्मेदारी सौंप सकती है।
राज्यसभा के उपसभापति और जदयू सांसद हरिवंश का नाम भी चर्चा में है, क्योंकि वे 2020 से इस पद पर हैं और सरकार का भरोसा जीत चुके हैं। एक भाजपा नेता ने कहा, पार्टी ऐसा उम्मीदवार चुनेगी जो विवादों से मुक्त हो और सभी को स्वीकार्य हो। धनखड़ का कार्यकाल विपक्ष के साथ तनावपूर्ण रहा,खासकर उनकी तीखी टिप्पणियों के कारण। मार्च 2025 में उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी, जिसके बाद उनकी सेहत को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया पद से इस्तीफा

भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित एक पत्र में स्वास्थ्य संबंधी कारणों और चिकित्सा सलाह का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत अपने इस्तीफे की घोषणा की। राष्ट्रपति मुर्मू को संबोधित अपने पत्र में जगदीप धनखड़ ने लिखा,‘स्वास्थ्य की प्राथमिकता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं.’। उन्होंने राष्ट्रपति को उनके सहयोग और सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए धन्यवाद दिया. साथ ही प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद को भी उनके सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर पीएम मोदी की पहली प्रतिक्रिया, लिखा- आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं…

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जगदीप धनखड़ की ओर से कल सोमवार को उपराष्ट्रपति के पद से अचानक इस्तीफा दिए जाने के बाद सियासी माहौल गरम हो गया है। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों को अपने इस्तीफे की वजह बताई है। अब पीएम नरेंद्र मोदी ने धनखड़ के इस्तीफे को लेकर पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।
क्या है अनुच्छेद 67(ए)?
अनुच्छेद 67(ए) उपराष्ट्रपति के इस्तीफे की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है. इसके तहत निम्नलिखित बातें महत्वपूर्ण हैं।
इस्तीफा केवल उपराष्ट्रपति को ही दिया जा सकता है, किसी अन्य को
नहीं-इस्तीफा लिखित रूप में होना चाहिए।
इस्तीफा स्वीकार होते ही पद रिक्त हो जाता है।
इस्तीफे के बाद, नया उपराष्ट्रपति चुने जाने तक राज्यसभा के
उपसभापति कार्यवाहक सभापति बन जाते हैं।
उपराष्ट्रपति के इस्तीफे से जुड़े कुछ अन्य जरूरी तथ्य
उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, लेकिन वे इस्तीफा देकर
या अन्य कारणों से पद छोड़ सकते हैं।
उपराष्ट्रपति को संसद के दोनों सदनों के विशेष बहुमत से हटाया भी जा
सकता है, लेकिन इस्तीफा स्वैच्छिक प्रक्रिया है।
यदि राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाए, तो उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति
बन जाते हैं. लेकिन यदि उपराष्ट्रपति ने इस्तीफा दे दिया है,तो यह
जिम्मेदारी मुख्य न्यायाधीश को मिलती है।
अब तक भारत में उप राष्ट्रपति के रूप में वी.वी. गिरी ने इस्तीफा दिया था, जिन्होंने राष्ट्रपति चुनाव लड़ना था।
भारत के संविधान ने उपराष्ट्रपति के इस्तीफे की प्रक्रिया को पूरी तरह स्पष्ट
और पारदर्शी बनाया है. अनुच्छेद 67(ए) के तहत उपराष्ट्रपति को
राष्ट्रपति को लिखित इस्तीफा देना होता है. इस्तीफे के बाद, राज्यसभा के
उपसभापति जिम्मेदारी संभालते हैं और छह महीने के भीतर नया
उपराष्ट्रपति चुना जाता है. यह व्यवस्था देश की लोकतांत्रिक और
संवैधानिक मजबूती को दर्शाती है, जिससे सत्ता का हस्तांतरण सुचारू
रूप से हो सके।
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