नई दिल्ली,20 जुलाई 2025 (ए)। मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के अधिकारों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि ईडी को किसी भी मामले में बिना पूर्व संकेत के अपनी जांच शुरू करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ईडी कोई ऐसा ‘ड्रोन’ या ‘आत्मघाती हथियार’ नहीं है जो जिस पर चाहे हमला कर दे, न ही वह कोई ‘सुपर कॉप’ है जो हर मामले में हस्तक्षेप कर सकता है। मद्रास हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एमएस रमेश और न्यायमूर्ति वी लक्ष्मीनारायण शामिल हैं, ने कहा कि ईडी केवल तभी जांच कर सकता है जब उसे प्रधानमंत्री वित्तीय धोखाधड़ी निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत किसी अपराध का ठोस संकेत मिले। यदि पूर्व अपराध के कोई प्रमाण या संकेत नहीं हैं, तो पीएमएलए अधिनियम के तहत जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह मामला आरकेएम पॉवरजेन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी की 901 करोड़ रुपये की सावधि जमा राशि जब्त करने से जुड़ा हुआ है। कंपनी ने आरोप लगाया कि ईडी ने बिना उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना यह कार्रवाई की है और इसके खिलाफ अदालत में याचिका दायर की है।
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