- बिल की मंजूरी को लेकर दिए फैसले पर पूछे थे 14 सवाल
- सीजेआई बीआर गवई की पीठ करेगी सुनवाई
- सुप्रीम कोर्ट मंगलवार 22 जुलाई को होगी सुनवाई
- पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष मामला
नई दिल्ली,19 जुलाई 2025 (ए)। विधेयकों की मंजूरी के बारे में समय सीमा तय करने के मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भेजे गए रिफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार 22 जुलाई को सुनवाई करेगा। राष्ट्रपति का रिफरेंस सुप्रीम कोर्ट की जारी मंगलवार की सुनवाई सूची में पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष सुनवाई पर लगा है।नियम के मुताबिक राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए रिफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ही सुनवाई करती है और अपनी राय राष्ट्रपति को देती है। जो पीठ मामले पर मंगलवार को सुनवाई करेगी उसमें प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई के अलावा जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा तथा जस्टिस एएस चंदुरकर शामिल हैं।
14 सवालों पर सुप्रीम कोर्ट से राय मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने गत आठ अप्रैल को तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा विधेयकों को लंबे समय तक रोके रखने के मामले में दिए फैसले में राज्य के विधेयकों पर मंजूरी के लिए राज्यपाल और राष्ट्रपति के लिए समय सीमा तय कर दी थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसी संबंध में संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत प्राप्त शक्तियों में सुप्रीम कोर्ट को रिफरेंस (राष्ट्रपति प्रपत्र) भेज कर राय मांगी है। राष्ट्रपति ने भेजे गए रिफरेंस में कुल 14 सवालों पर सुप्रीम कोर्ट से राय मांगी है। रिफरेंस में पूछा है कि जब संविधान में विधेयकों पर मंजूरी के लिए कोई समय सीमा तय नहीं है तो क्या न्यायिक आदेश के जरिए समय सीमा लगाई जा सकती है। इतना ही नहीं न्यायिक आदेश के जरिए विधेयक को कानून घोषित करने पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति ने पूछा है कि क्या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया गया कानून संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल की मंजूरी मिले बगैर लागू होगा।