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वाराणसी@ उत्तरप्रदेश पर मंडराया गंगा का कहर

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घाट व खेत डूबे,दुकानें बंद,गलियों में चल रहीं नावें, पटरी से उतरा जनजीवन…
वाराणसी,19 जुलाई 2025 (ए)।
यूपी के वाराणसी जिले में गंगा के उफान ने कोहराम मचा दिया है। जलस्तर में कुछ समय के ठहराव के बाद अचानक तेजी से बढ़ता पानी अब चेतावनी रेखा की ओर बढ़ रहा है। हर घंटे पांच सेंटीमीटर की रफ्तार से उफनती गंगा आधी रात तक चेतावनी बिंदु को छू सकती है। पानी ने घाटों, गलियों, और बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
अंतिम संस्कार को लगी शवों की कतार
प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट,जहां हर शाम गंगा आरती की भक्ति में हजारों लोग डूबते हैं,अब बाढ़ की मार झेल रहा है। जल पुलिस का बूथ और घाट की ऊपरी सीढि़यों पर बना गंगा मंदिर पूरी तरह पानी में डूब चुका है। पुलिसकर्मियों ने आनन-फानन अपने सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया। मणिकर्णिका घाट, जो अंतिम संस्कार के लिए जाना जाता है, की गलियों में पानी भर जाने से दुकानें बंद हो गई हैं। अब इन गलियों में नावें तैर रही हैं, और सीढç¸यों पर ही शवों को अंतिम स्नान कराया जा रहा है। छतों पर शवदाह की प्रक्रिया चल रही है, जिसके चलते शवों की लंबी कतारें लगने लगी हैं।
गंगा के पलट प्रवाह से उफनाई वरुणा
वरुणा नदी के नालों से जुड़े बाढ़ग्रस्त इलाकों में स्थिति और भी भयावह है। शनिवार को धूप निकलते ही पानी में सड़ रही गंदगी की दुर्गंध ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया। सलारपुर,चमेलिया बस्ती, पुलकोहना, दनीयलपुर, और रसूलगढ़ जैसे इलाकों में दर्जनों मकानों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। गंगा के पलट प्रवाह के कारण वरुणा नदी उफान पर है, और इसका पानी नालों के माध्यम से नए-नए इलाकों में फैल रहा है। स्थानीय लोग न केवल बाढ़ के पानी से, बल्कि उसमें आई गंदगी और दुर्गंध से भी परेशान हैं।
बाढ़ पीड़ितों को सता रहा बीमारी फैलने का खतरा
बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि अगर अगले तीन दिन तक धूप रही, तो गंदगी और सड़न के कारण बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। नगर निगम की ओर से अभी तक कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं किया गया है, जिससे लोगों में गुस्सा और निराशा बढ़ रही है। सलारपुर रेलवे लाइन के किनारे और छोटी मस्जिद के पास की गलियों में भी यही हाल है। लोग सांस लेने में तकलीफ और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से जूझ रहे हैं।
सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकले लोग
पुराने और नए असि घाट की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। सुबह-ए-बनारस का मंच, जहां सैलानी और स्थानीय लोग सूर्योदय का आनंद लेते हैं, अब पूरी तरह पानी में डूब चुका है। सड़क तक पानी पहुंचने में अब केवल आठ सीढि़यां शेष बची हैं। सामने घाट के पास निर्माणाधीन हिस्से के गुंबद तक पानी पहुंच गया है, और जज हाउस की सीढि़यों के ऊपर से पानी बह रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर भी गलियों में शवदाह की प्रक्रिया चल रही है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। तटवर्ती बस्तियों के निवासी अब अपने सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
जलस्तर खतरे का निशान पार करने की आशंका
गंगा के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि ने प्रशासन को भी हाई अलर्ट पर ला दिया है। शुक्रवार रात 8 बजे जलस्तर 68.71 मीटर था, जो सुबह 8 बजे तक 12 घंटों में 49 सेंटीमीटर बढ़कर 69.20 मीटर हो गया। इसके बाद, दोपहर तक अगले कुछ घंटों में 34 सेंटीमीटर की और वृद्धि के साथ यह 69.54 मीटर पर पहुंच गया। केवल चंद घंटों में 83 सेंटीमीटर की वृद्धि ने वाराणसी को संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि यही रफ्तार रही, तो गंगा जल्द ही चेतावनी बिंदु को पार कर सकती है, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है।
किसानों की जीविका पर संकट,पानी में डूबीं फसलें
गंगा का बढ़ता जलस्तर केवल शहर तक सीमित नहीं है; तटवर्ती गांवों और ढाब क्षेत्र में भी तबाही मचा रहा है। मोकलपुर, गोबरहां, रामपुर, रामचंदीपुर, और मुस्तफाबाद रेता जैसे गांवों में खेतों में लगी लौकी, नेनुआ, करैला, परवल, और हरे चारे की फसलें पूरी तरह पानी में डूब गई हैं। किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है, और उनकी आजीविका पर गहरा संकट मंडरा रहा है। मुस्तफाबाद रेता के अंत्येष्टि स्थल तक जाने वाले रास्ते पानी से घिर गए हैं, और तेज बहाव ने किसानों और स्थानीय लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।


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