एक महीने बाद भी कई सवाल अब भी हैं बरकरार…
अहमदाबाद,12 जुलाई 2025 (ए)। 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 उड़ान भरते ही एक मेडिकल हॉस्टल की इमारत पर जा गिरी। दोपहर 1ः39 पर टेक ऑफ करने वाली फ्लाइट 2ः40 तक क्रैश हो चुकी थी। हादसे में 241 यात्रियों और क्रू मेंबर्स की जान गई। इनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे। एकमात्र जीवित यात्री हैं रमेश कुमार विश्वास।
ब्लैक बॉक्स मिला, शुरुआती रिपोर्ट भी…
दुर्घटना के अगले दो दिनों में फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर बरामद कर लिए गए। जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो कर रही है। चूंकि विमान अमेरिकी कंपनी का था, अमेरिकी नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड भी अलग से जांच कर रहा है।
फ्यूल स्विच ऑफ कैसे हुआ?
ब्लैक बॉक्स के डेटा से इतना जरूर साफ है कि दोनों इंजन के फ्यूल स्विच बंद हुए थे। अमेरिका के एविएशन एक्सपर्ट जॉन कॉक्स के मुताबिक, ये स्विच इतने संवेदनशील नहीं होते कि यूं ही छूने से ऑफ हो जाएं। उन्हें ऑन/ऑफ करने के लिए स्पष्ट मूवमेंट चाहिए। ड्रीमलाइनर में फ्यूल कटऑफ होते ही इंजन को ताकत मिलनी बंद हो जाती है। नतीजा विमान की बिजली सप्लाई रुक सकती है,कॉकपिट के सिस्टम बंद हो सकते हैं। जांचकर्ता मान रहे हैं कि शायद पायलट ने इमरजेंसी के दौरान फ्यूल स्विच दबाया होगा।
आरएटी एक्टिव मिला,यानी दोनों इंजन बंद थे…
शुरुआती रिपोर्ट में एक और अहम बात सामने आई है कि क्रैश के वक्त एयरक्राफ्ट में रैम एयर टरबाइन एक्टिव थी। इसका मतलब ये कि दोनों इंजन पूरी तरह बंद हो चुके थे और विमान आपातकालीन बैकअप पावर पर चल रहा था। बोइंग की मानक प्रक्रिया के मुताबिक, डुअल इंजन फेल होने की स्थिति में पायलट को फ्यूल स्विच ऑन/ऑफ कर ईईसी रीसेट करना होता है इसे विंडमिल स्टार्ट कहा जाता है। लेकिन इतनी कम ऊंचाई (650 फीट) पर दोबारा इंजन स्टार्ट कर पाना लगभग नामुमकिन था।
क्या कोई साजिश थी?
28 जून को नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा था कि जांच हर एंगल से हो रही है, जिसमें साजिश की आशंका को भी खंगा जा रहा है। ब्लैक बॉक्स की जांच भारत में ही हो रही है। तीन महीने में विस्तृत रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
सभी ड्रीमलाइनर की जांच हुई, खतरा नहीं: सरकार
डीजीसीए के आदेश पर एयर इंडिया के सभी 33 ड्रीमलाइनर की जांच की गई है। मंत्री मोहोल के मुताबिक, सभी विमान सुरक्षित पाए गए हैं। यात्रियों को घबराने की जरूरत नहीं है।
इंजन में खराबी नहीं, तो फिर क्या हुआ?
अब तक की जांच में बोइंग 787 ड्रीमलाइनर और उसके जीई एयरोस्पेश इंजनों में कोई तकनीकी खराबी नहीं पाई गई है। वाल स्ट्रीट जॉरनल की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट टेक ऑफ के तुरंत बाद दोनों इंजनों के फ्यूल सप्लाई स्विच ऑफ कर दिए गए थे यही थ्रस्ट खत्म होने की वजह बनी। ये वही स्विच होते हैं जिन्हें पायलट सामान्यतः इंजन स्टार्ट या इमरजेंसी सिचुएशन में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये गलती से दब गए, जानबूझकर ऑफ किए गए, या किसी खराबी की वजह से अपने आप बंद हो गए?
पायलट की ट्रेनिंग और बैकग्राउंड भी जांच के दायरे में
फ्लाइट उड़ा रहे कैप्टन सुमित सभरवाल के पास 8200 घंटे और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर के पास 1100 घंटे की उड़ान का अनुभव था। बावजूद इसके, दोनों के ट्रेनिंग रिकॉर्ड और निर्णय प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur