क्या विपक्ष करेगा केंद्र का समर्थन
नई दिल्ली,09 जुलाई 2025 (ए)। दिल्ली स्थित आवास से कैश मिलने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की विदाई लगभग तय मानी जा रही है। दरअसल, आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार लोकसभा में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करने जा रही है। संसद में जस्टिस वर्मा के खिलाफ एक औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी। यह प्रक्रिया उन्हें उनके पद से हटाने के लिए की जाएगी। उनके आवास से बड़ी मात्रा में कैश मिलने के बाद यह कदम उठाया जा रहा है। वहीं इस महाभियोग में विपक्ष भी अपना समर्थन देगा।
केंद्र सरकार ने हस्ताक्षर जुटाने की प्रक्रिया शुरू की
वहीं,केंद्र सरकार ने हस्ताक्षर जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए सभी सांसदों से संपर्क किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा और एनडीए के सांसदों ने भी हस्ताक्षर कर दिए हैं और विपक्षी नेताओं का समर्थन हासिल करने के प्रयास जारी हैं। हालांकि, विपक्ष सैद्धांतिक रूप से इस प्रस्ताव पर सहमत है। प्रक्रिया के अनुसार, प्रस्ताव को पेश करने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 हस्ताक्षरों की आवश्यकता होती है। इसे पारित होने के लिए संबंधित सदन में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। अब सरकार को उम्मीद है कि इस मामले में उसे सफलता मिल जाएगी।
संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 12 अगस्त तक चलेगा। एक बार प्रस्ताव दो-तिहाई बहुमत से पारित हो जाने पर, लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति,भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक जांच समिति के लिए सर्वोच्च न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश और किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को नामित करने के लिए पत्र लिखेंगे। सरकार, अपनी ओर से,प्रस्ताव में उल्लिखित आरोपों की जांच करने वाले पैनल में एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता को नामित करती है।
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