@अमेरिका ही नहीं भारत के पास भी ये खास मिसाईल,भारत की तैयारी से डरे दुश्मन
नई दिल्ली, 30 जून 2025(ए)। ईरान के फोर्डो परमाणु संयंत्र पर अमेरिका द्वारा जीबीयू-57 ए मैसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर्स के इस्तेमाल के बाद,भारत अपनी बंकर-भेदी क्षमता को बढ़ाने में तेज़ी दिखा रहा है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन अग्नि-5 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का एक नया रूप बना रहा है। यह मिसाइल दुश्मन के जमीन के अंदर बने ठिकानों को नष्ट करने के लिए 7500 किलोग्राम का हथियार ले जा सकती है। भारत का लक्ष्य अमेरिका की बराबरी करना है, जिसने हाल ही में ईरान के परमाणु ढांचे के खिलाफ 14 जीबीयू-57 का इस्तेमाल किया था। भारत मिसाइल बेस्ड सिस्टम विकसित कर रहा है, जो ज्यादा किफ़ायती और असरदार होगी।
ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध से सबक एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल के युद्धों से सबक लेते हुए भारत भविष्य के लिए एक शक्तिशाली मिसाइल सिस्टम बना रहा है। यह मिसाइल ज़मीन के अंदर बने मज़बूत ठिकानों को भेदने में सक्षम होगी। डीआरडीए अग्नि-5 मिसाइल का एक बदला हुआ रूप बना रहा है। अग्नि-5 मिसाइल 5000 किलोमीटर से ज्यादा दूर तक मार कर सकती है। आमतौर पर, यह परमाणु हथियार ले जाती है। लेकिन, नया रूप एक सामान्य हथियार होगा। यह 7500 किलोग्राम का बंकर-भेदी हथियार ले जा सकता है।
अग्नि मिसाइल दुश्मन ठिकानों को निशाना बनाएगी
यह मिसाइल दुश्मन के उन ठिकानों को निशाना बनाएगी जो कंक्रीट की मोटी परतों के नीचे दबे हैं। उम्मीद है कि यह विस्फोट से पहले 80 से 100 मीटर तक ज़मीन में घुस जाएगी। इससे पता चलता है कि भारत अमेरिका की बराबरी करना चाहता है। अमेरिका ने हाल ही में ईरान के परमाणु ढांचे के खिलाफ अपनी ताकत दिखाने के लिए 14 जीबीयू-57 का इस्तेमाल किया था। जीबीयू-57 दुनिया का सबसे बड़ा सामान्य बंकर-भेदी बम है। जीबीयू-57 और इसके पुराने रूप जीबीयू-43, जिसे मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स के नाम से जाना जाता है, ने ज़मीन में गहराई तक मार करने वाले हथियारों के लिए एक मिसाल कायम की है।
भारत का लक्ष्य अमेरिका से आगे जाने का
भारत का लक्ष्य इससे भी आगे जाना है। अमेरिका बड़े और महंगे बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल करता है। लेकिन, भारत मिसाइल से मार करने वाला बंकर-भेदी हथियार बना रहा है। यह ज़्यादा सुविधाजनक और सस्ता होगा। इस बदलाव से क्षेत्र में रणनीतिक योजना बदल सकती है।
अग्नि-5 के दो नए रूप बनाए जा रहे
रिपोर्ट्स के मुताबिक अग्नि-5 के दो नए रूप बनाए जा रहे हैं। एक में हवा में फटने वाला हथियार होगा,जो ज़मीन के ऊपर के लक्ष्यों को निशाना बनाएगा। दूसरा, ज़मीन के अंदर गहराई तक घुसने वाला मिसाइल होगा। यह जीबीयू-57 के जैसा होगा, लेकिन इसमें ज़्यादा हथियार ले जाने की क्षमता होगी। प्रत्येक हथियार का वज़न आठ टन तक हो सकता है। इससे यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली सामान्य हथियारों में से एक बन जाएगा। नए रूपों की मारक क्षमता 2500 किलोमीटर है, जो मूल अग्नि-5 से कम है। लेकिन, इनकी विनाशकारी क्षमता और सटीकता इन्हें भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण बना देगी। यह मिसाइलें दुश्मन देशों जैसे पाकिस्तान और चीन में बने कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर,मिसाइल साइलो और महत्वपूर्ण सैन्य ढांचे को निशाना बनाने के लिए बहुत ज़रूरी होंगी। उम्मीद है कि मिसाइलें मार्च 8 से मार्च 20 की रफ़्तार से चलेंगी। इससे यह हाइपरसोनिक हथियार बन जाएंगी। इनकी गति अमेरिका के बंकर-भेदी सिस्टम के बराबर होगी,लेकिन इनमें ज़्यादा हथियार ले जाने की क्षमता होगी। भारत का इन सिस्टम को खुद बनाने और इस्तेमाल करने पर ज़ोर देना, उसकी बढ़ती सैन्य क्षमता और रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
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