अंबिकापुर,15 जून 2025 (घटती-घटना)। गर्मी व बारिश के बीच डायरिया का प्रकोप बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डायरिया या दस्त बीमारियों के रोकथाम के लिए जिले में 15 जून से लेकर 31 जुलाई तक डायरिया रोकथाम कार्यक्रम के तहत विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य डायरिया से होने वाली 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मौत को पूरी तरह से रोकना है। स्वच्छता के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना है व डायरिया के कारण निर्जलीकरण के उपचार के लिए ओआरएस व जिंक की उपलधता को उच्च जोखिम परिवार में सुनिश्चित करना है।
संक्रामक बीमारी रोकथाम कार्यक्रम प्रभारी डॉ. शैलेंद्र गुप्ता ने बताया कि सरगुजा में वर्ष 2023- 24 में 11 सौ से ज्यादा डायरिया के मरीज पीडि़त हुए थे। जिसमें 70 प्रतिशत मरीज जून व जुलाई में आए थे। डायरिया से विशेष कर 5 वर्ष के छोटी उम्र के बच्चों में जानलेवा साबित होता है। जिले में ग्रामीण क्षेत्र में खराब जल स्रोतों और हाथ धोने की कम आदत के कारण डायरिया के प्रकरण ज्यादा पाए गए हैं। डायरिया के रोकथाम के लिए प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में ओआरएस जिंक कॉर्नर बनाया गया है। मितानिन के पास ओआरएस पैकेट व जिंक उपलध कराया गया है। मितानिन व स्वास्थ्य कर्मचारी घर में ओआरएस घोल बनाने की विधि समझा रहे हैं। विद्यालय व आंगनबाड़ी केंद्र में स्वच्छता व हाथ धोने की विधि का प्रचार प्रसार किया जा रहा है। पीएचई विभाग के सहयोग से जलस्रोतों का क्लोरीनीकरण किया जा रहा है। प्रतिदिन डायरिया प्रकरणों की निगरानी एवं रिपोर्टिंग रखी जा रही है। डॉ. शैलेंद्र गुप्ता ने बताया कि डायरिया से होने वाली मौत पूरी तरह से रोके जाने योग्य है। ओआरएस घोल और जिंक समय पर देना, स्वच्छता अपनाना व पानी को उबालनकर पीना ये तीन सरल उपाय से डायरिया बीमारी से बच सकते हैं, समय पर ध्यान देने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। नवजात शिशु में डायरिया होने पर मां को दूध पिलाना बंद नहीं करना चाहिए। यदि दो दिन से अधिक दस्त हो या कमजोरी दिखे तो तुरंत नजदीक की स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक की देखरेख में इलाज कराना चाहिए।
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