जयशंकर का प्लान पाकिस्तान का उड़ा देगा होश…
नई दिल्ली,10 जून 2025 (ए)। यूरोप के दौरे पर गए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ शब्दों में पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि पहलगाम में आतंक हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया पूरी दुनिया देख चुकी है। इसके बावजूद अगर पाकिस्तान और उसके यहां पल रहे आतंकी भारत के खिलाफ कुछ भी गलत करते हैं तो इस बार उनकी तबाही तय है। एक फ्रेंच अखबार ली फिगारो को दिए साक्षात्कार में जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर अडिग है। जयशंकर ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए एक प्लान भी बना लिया है। उन्होंने मध्य एशियाई देशों का आतंक पर नेटवर्क बनाने की बात की है। जयशंकर ने मध्य एशियाई देशों के मंत्रियों से मुलाकात की। यह मुलाकात भारत-मध्य एशिया वार्ता से पहले हुई। इस बैठक में आतंकवाद, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर बात हुई। भारत और मध्य एशियाई देश मिलकर आतंकवाद का मुकाबला करेंगे। वे व्यापार और कनेक्टिविटी को भी बढ़ाएंगे। दरअसल, विदेश मंत्री एस जयशंकर ऐसा प्लान बना रहे हैं, जिससे पाकिस्तान के नापाक मंसूबों पर पानी फिर जाएगा। यह पाकिस्तान में पल रहे आतंक के नेटवर्क को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर देगा।
जयशंकर ने मध्य एशियाई देशों को क्या कहा…
जयशंकर ने कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। खासकर, पहलगाम में हुए आतंकी हमलों के बाद इस पर जोर दिया गया। इसके अलावा, व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने पर भी बात हुई। उज्बेकिस्तान,
ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे मध्य एशियाई देशों को अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में मौजूद आतंकी संगठनों से खतरा है। इसलिए, सुरक्षा सहयोग बढ़ाना जरूरी है।
सुरक्षा होगी तो कारोबारी सहयोग भी बढ़ेगा भारत-मध्य एशिया बिजनेस काउंसिल को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कह-हमें अपने व्यापार के विकल्पों को बढ़ाना होगा। इससे हमारे पास ज्यादा विकल्प होंगे और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। हम नए अवसरों की तलाश में हैं। मैं चाहूंगा कि मध्य एशियाई देशों के मेरे दोस्त इस बात को समझें कि आज भारत की अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की है और यह हर साल 6-8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। इससे उत्पादों और सेवाओं की नई मांग पैदा होगी।
डॉलर पर पड़ेगी चोट, अमेरिका का वर्चस्व टूटेगा जयशंकर ने आगे कहा…मैं निश्चित रूप से उन कदमों का समर्थन करूंगा जो हम अपने राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार के आपसी निपटान को सुविधा जनक बनाने के लिए उठा सकते हैं। इसका मतलब है कि भारत और मध्य एशियाई देश अपनी-अपनी मुद्राओं में व्यापार कर सकते हैं। इससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम होगी।
पाकिस्तान होगा पूरी तरह दरकिनार,
भारत और मध्य एशिया के बीच व्यापार बढ़ने से दोनों क्षेत्रों को फायदा होगा। भारत को मध्य एशिया से ऊर्जा और खनिज मिल सकते हैं। वहीं, मध्य एशियाई देशों को भारत से मिल सकते हैं। कनेक्टिविटी बढ़ने से व्यापार और आसान हो जाएगा। भारत चाबहार बंदरगाह के माध्यम से मध्य एशिया तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। इससे पाकिस्तान को दरकिनार किया जा सकेगा।
तब डोभाल ने भी सुरक्षित मध्य एशिया की बात की थी…
इससे पहले दिसंबर, 2022 की बात है, जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने दिल्ली में पहली मध्य एशियाई देशों के अपने समकक्षों के साथ एक मीटिंग की थी। उस वक्त डोभाल ने कहा था कि मध्य एशिया भारत का विस्तारित पड़ोस है। भारत के लिए एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित, समृद्ध मध्य एशिया साझा हित में बेहद जरूरी है। अब जयशंकर ने एक कदम आगे बढ़ते हुए इस क्षेत्र की सुरक्षा को ज्यादा महत्वपूर्ण करार दिया है।
मध्य एशिया से संपर्क इसलिए भी है जरूरी
मध्य एशिया खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र है। यहां कोयला,सीसा,जस्ता, सोना और लौह अयस्क के अलावा कजाकिस्तान में यूरेनियम का सबसे बड़ा भंडार पाया जाता है। किर्गिस्तान सोने और पनबिजली में समृद्ध है जबकि तुर्कमेनिस्तान में प्राकृतिक गैस के विश्व के सबसे बड़ा भंडार हैं। ताजिकिस्तान में भारी जलविद्युत क्षमता है जबकि उज्बेकिस्तान में सोना, यूरेनियम और प्राकृतिक गैस का भंडार पाया जाता है।
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