दोनो बुजुर्ग ७0 साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद पूरे धूमधाम से रचाई शादी…
नई दिल्ली,08 जून 2025 (ए)। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक मामला जमकर वायरल हो रहा है,जहां एक बुजुर्ग जोड़े ने एक-दो नहीं,बल्कि 70 साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद पूरे धूमधाम से शादी रचाई है। बताया जा रहा है कि,एक शख्स जिसे 100 साल के होने में सिर्फ 5 साल बचे हैं,उन्होंने 95 साल की उम्र में अपने मनपसंद साथी का हाथ जीवनभर के लिए थाम लिया। बुजुर्ग जोड़े की गाजेबाजे के साथ बारात निकाली गई,जिसमें ग्रामीणों के साथ बुजुर्ग के बेटे,नाती और पोते भी जमकर नाचे। इस बीच कपल ने मंडप में दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर सात फेरे लिए। दुल्हन को देख अब लोग कह रहे हैं,वाह- किस्मत हो तो ऐसी। चलिए आपको बताते हैं इस अजब-गजब कपल की अजब-गजब प्यार की कहानी।
70 वर्षों का साथ, 70 वर्षों का इंतज़ार
राजस्थान के डूंगरपुर जिले से एक दिल छू लेने वाला मामला सामने आया है। जहां 95 वर्षीय दूल्हा और 90 वर्षीय दुल्हन,जो 70 वर्षों तक एक साथ रहे,उन्होंने हाल ही में शादी कर के पूरे समाज को हिलाकर रख दिया। यह दंपती सात दशक से साथ रह रहे थे,लेकिन किसी कारणवश विवाह नहीं हो पाया था। बच्चों ने जब इसकी जानकारी पाई,तो उन्होंने अपनी माता-पिता की अधूरी ख्वाहिश को पूरा करने की जिम्मेदारी ली। मां-पापा की इच्छानुसार,उन्होंने राजस्थान की सामाजिक मान्यताओं के बीच बुजुर्गों की शादी को विधिवत रूप से सम्पन्न कराया। शादी का आयोजन बहुत ही धूमधाम से हुआ। परिजनों,करीबी रिश्तेदारों और ग्रामवासियों ने मिलकर इस पल को यादगार बनाया। बैंड-बाजे की धुनों के बीच जब ये दोनों मंडप में पहुंचे,तो हर चेहरा भावुक हो उठा. बच्चे,पोते-पोतियां सब एक साथ आए और इस मौके पर जश्न मनाया,साथ ही यह भी दिखाया कि सच्चा प्रेम उम्र के बंधनों को तोड़ सकता है। 70 सालों बाद यह विवाह पूरे समुदाय को प्रेरणा देता है कि जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए।
95 का दूल्हा 90 की दुल्हन
डूंगरपुर की यह शादी राजस्थान भर के गांव-शहरों में विषय बनी है। यह एक उदाहरण बन गई कि किस तरह परिवार और समाज एक साथ मिलकर किसी की अधूरी तमन्ना पूरी कर सकता है। शादी में उपस्थित सभी लोगों की आंखों में खुशी और आश्चर्य एक थी….क्या ऐसी उम्र में भी शादी संभव है। इस अनूठी शादी के बाद,सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में सवाल उठ रहे हैं,क्या हम अपने बुजुर्गों की इच्छाओं और ख्वाहिशों को समय रहते समझते हैं? क्या हम उन्हें उसी सम्मान और प्यार से देख पाते हैं,जैसे यह परिवारों ने किया?
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